जगन मोहन रेड्डी ने डीएससी भर्ती घोटाले पर नायडू से माँगा जवाब, 7 वेरिफिकेशन स्टेज पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 13 सितंबर 2026 को डिस्ट्रिक्ट सेलेक्शन कमेटी (DSC) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर अपना हमला तेज़ कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर डीएससी भर्ती प्रक्रिया में 'चार ट्विस्ट' की ओर ध्यान दिलाया और नायडू से सीधे जवाब माँगा।
मुख्य घटनाक्रम
जगन ने आरोप लगाया कि एक उम्मीदवार वेरिफिकेशन के 7 चरणों से गुज़रने के बाद एसजीटी पद के लिए चुना गया, जबकि बाद में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने उसे अयोग्य घोषित कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि यदि उम्मीदवार अयोग्य था, तो वेरिफिकेशन के सात चरणों में क्या जाँचा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायडू हर बार नई सफ़ाई देते हैं, लेकिन हर सफ़ाई नए सवाल खड़े करती है — जिससे शिक्षक बनने की आकांक्षा रखने वाले लाखों युवाओं की उम्मीदों पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
चार ट्विस्ट — जगन का पक्ष
पहला: उम्मीदवार को 65 TET अंकों के आधार पर पद दिया गया, जबकि वह 7 वेरिफिकेशन चरणों से पास हुआ था।
दूसरा: DEO ने बाद में उसे अयोग्य करार दिया। उम्मीदवार ने कथित तौर पर स्वयं माना कि उसे नहीं पता कि नौकरी कैसे मिली।
तीसरा: अधिकारियों ने पुष्टि की कि उम्मीदवार ने 2018 की TET परीक्षा में 77 अंक हासिल किए थे। जगन ने पूछा कि यदि ये अंक पहले से रिकॉर्ड में थे, तो DEO ने उसे अयोग्य क्यों माना — और यह स्पष्टीकरण विवाद उठने के बाद ही क्यों आया।
चौथा: कथित तौर पर वे 77 अंक पेपर-II-बी (स्कूल असिस्टेंट स्पेशल एजुकेशन) के तहत दर्ज हैं, जबकि एसजीटी पद के लिए पेपर-I-ए की TET कैटेगरी अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठता है कि उम्मीदवार ने वेरिफिकेशन के 7 चरण कैसे पार किए। इसके अलावा, नौकरी मिलने के बाद भी उम्मीदवार ने 2025 में दोबारा TET दी — जो जगन के अनुसार खुद इस बात की मिसाल है कि 2018 के अंक वैध नहीं माने जा रहे थे।
जगन ने नायडू से माँगी नैतिक जवाबदेही
पूर्व मुख्यमंत्री जगन ने मुख्यमंत्री नायडू से तीन सीधे सवाल पूछे — क्या इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी कहा जा सकता है? क्या इससे डीएससी घोटाले को बल नहीं मिलता? और क्या वे इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेंगे?
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार और विपक्षी YSRCP के बीच राजनीतिक तनाव पहले से तीखा है। शिक्षक भर्ती का मुद्दा राज्य में युवाओं की बड़ी संख्या को प्रभावित करता है और चुनावी दृष्टि से संवेदनशील है।
आम जनता और अभ्यर्थियों पर असर
डीएससी भर्ती में अनियमितताओं के आरोप उन हज़ारों उम्मीदवारों के लिए चिंताजनक हैं जो वर्षों से शिक्षक पद की प्रतीक्षा में हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो पूरे चयन का भरोसा कमज़ोर पड़ सकता है।
अभी तक मुख्यमंत्री नायडू की ओर से इन नए सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे यह देखना होगा कि TDP सरकार जगन के इन विस्तृत आरोपों का जवाब किस रूप में देती है।