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भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, 100+ देशों को आपूर्ति: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, 100+ देशों को आपूर्ति: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

भारत अब वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में 60% हिस्सेदारी रखता है और 100 से अधिक देशों को आपूर्ति करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने CEPI के मंच पर स्पष्ट किया कि यह देश अगली महामारी की वैश्विक तैयारी में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए न केवल तैयार है, बल्कि पहले से ही उस दिशा में आगे बढ़ चुका है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में CEPI के उच्चस्तरीय समारोह को संबोधित किया।
भारत की वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत ; 100 से अधिक देशों को आपूर्ति।
WHO के नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों की 65 प्रतिशत से अधिक ज़रूरतें भारत पूरा करता है।
वर्ष 2025 में देश की बायोइकोनॉमी 195.3 अरब डॉलर तक पहुँची, 18 प्रतिशत सालाना वृद्धि।
बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम 11,855 स्टार्टअप्स तक विस्तारित; 2025 में 1,780 नए स्टार्टअप्स जुड़े।
कुल बायोइकोनॉमी में बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत ।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में घोषणा की कि भारत आज मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश की विविध स्वास्थ्य चुनौतियाँ, सुदृढ़ वैज्ञानिक क्षमता और तेज़ी से विकसित हो रहा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र भारत को वैक्सीन अनुसंधान, महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य समाधान विकसित करने हेतु एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है।

कार्यक्रम और संदर्भ

कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) के बोर्ड और निवेशक परिषद के लिए आयोजित उच्चस्तरीय स्वागत समारोह में डॉ. सिंह ने यह बात कही। यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और CEPI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें CEPI के शीर्ष नेतृत्व, निवेशक परिषद के सदस्य, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा वैक्सीन विकास और महामारी तैयारी से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

गौरतलब है कि भारत CEPI के गठन के शुरुआती दौर से ही उसका संस्थापक सदस्य और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार रहा है। डॉ. सिंह ने उन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों की सराहना की जिन्होंने भारत को वैश्विक वैक्सीन और जैव-चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत की बायोइकोनॉमी: आँकड़ों में तस्वीर

डॉ. सिंह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आया है। वर्ष 2025 में देश की बायोइकोनॉमी 195.3 अरब डॉलर तक पहुँच गई, जो सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इसके साथ ही देश का बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम 11,855 स्टार्टअप्स तक पहुँच गया है, जिनमें वर्ष 2025 के दौरान शुरू हुए 1,780 नए स्टार्टअप्स शामिल हैं। भारत की कुल बायोइकोनॉमी में बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।

वैक्सीन क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका

मंत्री के अनुसार, भारत की सबसे उल्लेखनीय प्रगति वैक्सीन क्षेत्र में दिखाई देती है। देश अब केवल किफ़ायती वैक्सीन बनाने वाले राष्ट्र के रूप में नहीं पहचाना जाता — बल्कि अनुसंधान, नवाचार, उन्नत बायोलॉजिक्स, क्लीनिकल विकास और बड़े पैमाने पर विनिर्माण जैसी समग्र क्षमताएँ भी विकसित कर चुका है।

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत वर्तमान में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा है। वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों की 65 प्रतिशत से अधिक ज़रूरतें भारत पूरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर महामारी-प्रतिरोधी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने की माँग तेज़ हो रही है।

कोविड-19 से मिली सीख और भविष्य की तैयारी

डॉ. सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित क्षमताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत केवल घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की महामारी तैयारी के लिए अनुसंधान, नवाचार, वैश्विक सहयोग और सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना पर निरंतर निवेश अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता, विकसित वैक्सीन निर्माण नेटवर्क, तेज़ी से विस्तार कर रही बायोइकोनॉमी और मज़बूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र देश को अगली पीढ़ी की महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य समाधानों का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। CEPI जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी इस महत्वाकांक्षा को ठोस आकार दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह क्षमता महामारी के पहले 100 दिनों में वैक्सीन उपलब्ध कराने के CEPI के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा कर सकती है। कोविड-19 के दौरान भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' के तहत आपूर्ति शुरू करके फिर अपनी घरेलू ज़रूरतों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात रोका था — यह विरोधाभास अभी भी अनसुलझा है। बायोइकोनॉमी के 195.3 अरब डॉलर के आँकड़े में स्टार्टअप संख्या और राजस्व की गुणवत्ता के बीच का अंतर सार्वजनिक रूप से पारदर्शी नहीं है। अगली महामारी में नेतृत्व के दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए भारत को आपूर्ति-श्रृंखला प्राथमिकता और वैश्विक प्रतिबद्धता के बीच की रेखा स्पष्ट करनी होगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में किस स्थान पर है?
भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है और वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। देश वर्तमान में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा है और WHO के नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों की 65 प्रतिशत से अधिक ज़रूरतें पूरा करता है।
CEPI क्या है और भारत की इसमें क्या भूमिका है?
CEPI यानी कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो महामारी के विरुद्ध वैक्सीन विकास में निवेश और समन्वय करता है। भारत इसके गठन के शुरुआती दौर से संस्थापक सदस्य और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार रहा है; जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने इस बार CEPI के बोर्ड और निवेशक परिषद के समारोह की सह-मेज़बानी की।
भारत की बायोइकोनॉमी कितनी बड़ी हो चुकी है?
वर्ष 2025 में भारत की बायोइकोनॉमी 195.3 अरब डॉलर तक पहुँच गई, जो सालाना 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इसमें बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है और बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम 11,855 स्टार्टअप्स तक पहुँच चुका है।
भारत अगली महामारी की तैयारी में कैसे अग्रणी भूमिका निभा सकता है?
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता, विकसित वैक्सीन निर्माण नेटवर्क और मज़बूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र इसे अगली पीढ़ी की महामारी तैयारी का अग्रणी केंद्र बनाते हैं। कोविड-19 के दौरान विकसित क्षमताओं ने यह सिद्ध किया कि भारत वैश्विक स्वास्थ्य संकट में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैक्सीन क्षेत्र में भारत की किन उपलब्धियों का ज़िक्र किया?
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत अब केवल किफ़ायती वैक्सीन बनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, उन्नत बायोलॉजिक्स, क्लीनिकल विकास और बड़े पैमाने पर विनिर्माण की क्षमताएँ भी अर्जित कर चुका है। 100 से अधिक देशों को वैक्सीन आपूर्ति और WHO टीकाकरण में 65% से अधिक योगदान इसके प्रमाण हैं।
राष्ट्र प्रेस
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