भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, 100+ देशों को आपूर्ति: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में घोषणा की कि भारत आज मात्रा के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश की विविध स्वास्थ्य चुनौतियाँ, सुदृढ़ वैज्ञानिक क्षमता और तेज़ी से विकसित हो रहा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र भारत को वैक्सीन अनुसंधान, महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य समाधान विकसित करने हेतु एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है।
कार्यक्रम और संदर्भ
कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) के बोर्ड और निवेशक परिषद के लिए आयोजित उच्चस्तरीय स्वागत समारोह में डॉ. सिंह ने यह बात कही। यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और CEPI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें CEPI के शीर्ष नेतृत्व, निवेशक परिषद के सदस्य, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा वैक्सीन विकास और महामारी तैयारी से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
गौरतलब है कि भारत CEPI के गठन के शुरुआती दौर से ही उसका संस्थापक सदस्य और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार रहा है। डॉ. सिंह ने उन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों की सराहना की जिन्होंने भारत को वैश्विक वैक्सीन और जैव-चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत की बायोइकोनॉमी: आँकड़ों में तस्वीर
डॉ. सिंह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आया है। वर्ष 2025 में देश की बायोइकोनॉमी 195.3 अरब डॉलर तक पहुँच गई, जो सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इसके साथ ही देश का बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम 11,855 स्टार्टअप्स तक पहुँच गया है, जिनमें वर्ष 2025 के दौरान शुरू हुए 1,780 नए स्टार्टअप्स शामिल हैं। भारत की कुल बायोइकोनॉमी में बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
वैक्सीन क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका
मंत्री के अनुसार, भारत की सबसे उल्लेखनीय प्रगति वैक्सीन क्षेत्र में दिखाई देती है। देश अब केवल किफ़ायती वैक्सीन बनाने वाले राष्ट्र के रूप में नहीं पहचाना जाता — बल्कि अनुसंधान, नवाचार, उन्नत बायोलॉजिक्स, क्लीनिकल विकास और बड़े पैमाने पर विनिर्माण जैसी समग्र क्षमताएँ भी विकसित कर चुका है।
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत वर्तमान में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा है। वैश्विक वैक्सीन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों की 65 प्रतिशत से अधिक ज़रूरतें भारत पूरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर महामारी-प्रतिरोधी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने की माँग तेज़ हो रही है।
कोविड-19 से मिली सीख और भविष्य की तैयारी
डॉ. सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित क्षमताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत केवल घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की महामारी तैयारी के लिए अनुसंधान, नवाचार, वैश्विक सहयोग और सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना पर निरंतर निवेश अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता, विकसित वैक्सीन निर्माण नेटवर्क, तेज़ी से विस्तार कर रही बायोइकोनॉमी और मज़बूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र देश को अगली पीढ़ी की महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य समाधानों का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। CEPI जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी इस महत्वाकांक्षा को ठोस आकार दे रही है।