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डॉ. जितेंद्र सिंह: नवाचार को लैब से बाज़ार तक लाना अब राष्ट्रीय प्राथमिकता, CSIR पोर्टल पर 800 तकनीकें उपलब्ध

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डॉ. जितेंद्र सिंह: नवाचार को लैब से बाज़ार तक लाना अब राष्ट्रीय प्राथमिकता, CSIR पोर्टल पर 800 तकनीकें उपलब्ध

सारांश

RISE कॉन्क्लेव 2026 में डॉ. जितेंद्र सिंह का संदेश साफ था — भारत का वैज्ञानिक तंत्र अब परिणाम-केंद्रित होना चाहिए। CSIR के 800+ तकनीक पोर्टल और लिथियम बैटरी जैसी सुविधाओं के साथ, सरकार लैब और बाज़ार के बीच की खाई पाटने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह ने 14 जून 2026 को बेंगलुरु में RISE कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित किया।
CSIR टेक्नोलॉजी शोकेस पोर्टल पर अभी 800 से अधिक स्वदेशी तकनीकें उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध हैं।
उद्योग की भागीदारी अनुसंधान योजना के प्रारंभिक चरण से सुनिश्चित होनी चाहिए, न कि तकनीक के पूर्ण विकास के बाद।
सार्वजनिक निवेश से बनी लिथियम बैटरी सुविधा की क्षमता लगभग 1,000 सेल प्रतिदिन है — साझा उपयोग का उदाहरण।
अत्याधुनिक क्षेत्रों में स्टार्टअप्स के लिए विशेष इनक्यूबेशन प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित 'RISE कॉन्क्लेव 2026' में कहा कि देश की प्रयोगशालाएँ, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग जगत को एकजुट होकर काम करना होगा, ताकि नवाचार महज 'प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट' के दायरे से निकलकर वास्तविक उपयोगकर्ताओं तक पहुँच सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब उस मुकाम पर है जहाँ वैज्ञानिक प्रगति को उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के पैमाने पर परखा जाना ज़रूरी है।

मुख्य घटनाक्रम

उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने सरकार की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया जो इनोवेशन के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर केंद्रित है। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को खुलकर सामने रखें, ताकि नीतिगत स्तर पर उन्हें दूर किया जा सके।

उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि CSIR टेक्नोलॉजी शोकेस पोर्टल पर अभी 800 से अधिक तकनीकें सूचीबद्ध हैं। यह पोर्टल उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को उनकी ज़रूरत के अनुरूप समाधान खोजने और तकनीक-अपनाने की प्रक्रिया को तेज़ करने का तैयार मंच प्रदान करता है।

उद्योग-अनुसंधान साझेदारी पर जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि उद्योग की भागीदारी अनुसंधान परियोजनाओं की योजना बनाने के प्रारंभिक चरण से ही सुनिश्चित होनी चाहिए — तकनीक के पूर्णतः विकसित हो जाने के बाद नहीं। उनके अनुसार, इस तरह की अग्रिम साझेदारी से वैज्ञानिक कार्यों को बाज़ार की माँग के अनुरूप ढालने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाने और व्यावसायिक सफलता की संभावनाओं को मज़बूत करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच गहरे तालमेल की ज़रूरत पर बल दिया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान को बाज़ार के लिए तैयार समाधानों और राष्ट्रीय विकास के ठोस परिणामों में बदलने की गति को तेज़ किया जा सके।

CSIR अवसंरचना का साझा उपयोग

CSIR प्रयोगशालाओं का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक निवेश से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं को उभरते क्षेत्रों में काम करने वाले इनोवेटर्स और उद्योगों के लिए साझा मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने एक ऐसी लिथियम बैटरी निर्माण सुविधा का विशेष उल्लेख किया जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1,000 सेल प्रतिदिन है। यह उदाहरण दर्शाता है कि वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचा किस तरह स्थापित उद्योगों और नई उद्यमी कंपनियों — दोनों को — स्वदेशी तकनीकी क्षमताएँ विकसित करने में सहायता कर सकता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष इनक्यूबेशन प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी अनुसंधान संस्थान और निजी उद्योग जगत किस हद तक मिलकर काम करने की इच्छाशक्ति दिखाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि CSIR पोर्टल पर 800 तकनीकों की उपलब्धता और उनके वास्तविक व्यावसायिक उपयोग के बीच की खाई कितनी गहरी है। भारत में सार्वजनिक अनुसंधान और उद्योग के बीच सहयोग की बाधाएँ केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संस्थागत और नौकरशाही भी हैं — जिनका ज़िक्र इस मंच पर कम हुआ। लिथियम बैटरी सुविधा जैसे उदाहरण उत्साहजनक हैं, पर ये अपवाद हैं, नियम नहीं। जब तक अनुसंधान संस्थानों के प्रदर्शन मूल्यांकन में 'बाज़ार-तक-पहुँच' को मापदंड नहीं बनाया जाता, तब तक ये कॉन्क्लेव प्रेरणादायक रहेंगे — परिवर्तनकारी नहीं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RISE कॉन्क्लेव 2026 क्या है और इसमें क्या हुआ?
RISE कॉन्क्लेव 2026 बेंगलुरु में आयोजित एक उद्योग-अनुसंधान संवाद मंच है, जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 जून 2026 को नवाचार को लैब से बाज़ार तक पहुँचाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने CSIR पोर्टल, उद्योग-अनुसंधान साझेदारी और स्टार्टअप इनक्यूबेशन पर विस्तार से बात की।
CSIR टेक्नोलॉजी शोकेस पोर्टल पर क्या उपलब्ध है?
CSIR टेक्नोलॉजी शोकेस पोर्टल पर अभी 800 से अधिक स्वदेशी तकनीकें सूचीबद्ध हैं। यह पोर्टल उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को उनकी ज़रूरत के अनुसार तकनीकी समाधान खोजने और तकनीक अपनाने की प्रक्रिया तेज़ करने का मंच देता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग-अनुसंधान सहयोग पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि उद्योग की भागीदारी अनुसंधान परियोजनाओं की योजना के प्रारंभिक चरण से ही होनी चाहिए, न कि तकनीक के पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद। इससे वैज्ञानिक कार्यों को बाज़ार की माँग के अनुरूप ढालना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाना संभव होगा।
लिथियम बैटरी सुविधा का उदाहरण क्यों दिया गया?
डॉ. सिंह ने लगभग 1,000 सेल प्रतिदिन की क्षमता वाली लिथियम बैटरी निर्माण सुविधा का उदाहरण देकर यह दिखाया कि सार्वजनिक निवेश से बनी वैज्ञानिक अवसंरचना किस तरह स्थापित उद्योगों और नई उद्यमी कंपनियों — दोनों के लिए — स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने में उपयोगी हो सकती है।
स्टार्टअप्स के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष इनक्यूबेशन प्रणालियाँ विकसित कर रही है। इसके साथ ही CSIR प्रयोगशालाओं की सुविधाओं को स्टार्टअप्स के लिए साझा मंच के रूप में उपलब्ध कराने की योजना है।
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