डॉ. जितेंद्र सिंह: टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी, स्टार्टअप्स 2 लाख पार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन अब भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की केंद्रीय धुरी बन चुका है, जिसका दायरा केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर उद्योग, स्टार्टअप्स और राष्ट्रीय विकास तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के ऑडिटोरियम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के 56वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्य संदेश: प्रयोगशाला से बाज़ार तक
डॉ. सिंह ने कहा कि अब विज्ञान को 'प्रयोगशालाओं से बाज़ार तक और विचारों से प्रभाव तक' पहुँचाना होगा। यह वक्तव्य एक नई नीति दिशा को रेखांकित करता है, जिसमें शोध को सीधे आर्थिक परिणामों से जोड़ने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश उद्योग और निजी क्षेत्र से अलग रहकर विज्ञान में आगे नहीं बढ़ सकता, इसलिए सरकार, अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच गहरा सहयोग अनिवार्य है।
एक दशक में निर्णायक बदलाव
मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निर्णायक बदलाव आया है। इसे उन नीतिगत फैसलों का बल मिला है, जिनके तहत अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोला गया है। इन कदमों से स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे भारत अपने विशाल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग कर पा रहा है और वैश्विक इनोवेशन इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है।
स्पेस सेक्टर और स्टार्टअप इकोसिस्टम में उछाल
स्पेस सेक्टर के तेज़ी से विस्तार का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र के लिए इसे खोलने के कुछ ही वर्षों में स्टार्टअप-आधारित इनोवेशन में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। सैटेलाइट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई क्षमताएँ विकसित हो रही हैं, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर रही हैं। गौरतलब है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम एक दशक पहले कुछ सौ तक सीमित था, जो अब 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुँच चुका है — यह वृद्धि किसी भी वैश्विक मानक पर असाधारण है।
वैज्ञानिक सलाहकारों की राय
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने इस अवसर पर कहा कि रिसर्च को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और कमर्शियलाइज़ेशन के साथ जोड़ना अनिवार्य है। DST सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), RDI फंड और नेशनल क्वांटम मिशन जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये कार्यक्रम भारत के विज्ञान और इनोवेशन इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वैश्विक वैज्ञानिक स्थिति में सुधार
डॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की वैश्विक वैज्ञानिक स्थिति काफी मज़बूत हुई है — उच्च स्तर के रिसर्च प्रकाशनों में देश की हिस्सेदारी बढ़ी है, जो गुणवत्ता और प्रभाव दोनों को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश की होड़ तेज़ हो रही है। आने वाले वर्षों में ANRF और नेशनल क्वांटम मिशन जैसी पहलों के परिणाम यह तय करेंगे कि भारत की नीतिगत महत्वाकांक्षाएँ ज़मीनी बदलाव में कितनी सफल होती हैं।