भारत और जापान के विज्ञान सहयोग की 40वीं वर्षगांठ पर जितेंद्र सिंह का संबोधन
सारांश
Key Takeaways
- भारत-जापान विज्ञान सहयोग की 40 वर्ष की यात्रा का जश्न।
- महिलाओं और युवा वैज्ञानिकों को समान अवसर।
- जापान की साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी द्वारा लोटस प्रोग्राम का लॉन्च।
नई दिल्ली/टोक्यो, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को टोक्यो में भारतीय दूतावास में आयोजित 'भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार आदान-प्रदान वर्ष' के ग्रैंड फिनाले में वर्चुअल भाषण दिया। इस अवसर पर उन्होंने चार दशकों से चल रही मजबूत द्विपक्षीय साझेदारी को उजागर किया।
मंत्री सिंह ने कहा, "सोमवार को भारत-जापान विज्ञान और प्रौद्योगिकी वर्ष के ग्रैंड फिनाले के मौके पर टोक्यो स्थित भारत के दूतावास में आप सभी से बात करना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।"
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर उन्होंने कहा कि भारत-जापान विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग हमारे अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधों में एक मजबूत स्तंभ है। उन्होंने आगे कहा, "मैं खुश हूं कि मैं आप सभी से वर्चुअली बात कर रहा हूं और इस वर्ष को मनाते हुए हम 40 साल के विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी को याद कर रहे हैं।"
भारत में नवाचार की बढ़ती भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें शिक्षा संस्थान, आर एंड डी संस्थान, और उद्यमी शामिल हैं। इसमें महिलाओं और युवा वैज्ञानिकों को समान अवसर भी मिलते हैं।
उन्होंने हाल के वर्षों में हासिल किए गए कुछ महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि 11वीं भारत-जापान संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति की बैठक 5 जून 2025 को नई दिल्ली में हुई थी, जिसने कई नए पहलों को आगे बढ़ाया।
साथ ही पिछले साल 31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में संबंधों को मजबूत करने के लिए एक जॉइंट स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इसके अलावा, जापान की मेडिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एजेंसी और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बीच नया समझौता (एमओसी) भी किया गया है।
वर्तमान सहयोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जापान के सुकुबा में बनी इंडियन बीमलाइन भी लेटेस्ट रिसर्च में मदद कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी, लोटस प्रोग्राम लॉन्च कर रही है, जिसमें हर साल 1,000 भारतीय शोधकर्ताओं को आमंत्रित और समर्थन दिया जाएगा। इसके अलावा, हमने इसरो और जापान के जेएएक्सए के बीच चांद पर एक साथ उतरने के लिए एक इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट किया है।
भविष्य की साझेदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम जापान को एक भरोसेमंद साथी मानते हैं, जहां जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। हम भारत और जापान के बीच एक संयुक्त केंद्र बनाने की उम्मीद रखते हैं, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार को तेज करेगा और दोनों देशों की वैज्ञानिक चुनौतियों, साथ ही सतत विकास जैसे वैश्विक लक्ष्यों को भी हल करेगा।
अपने संबोधन को समाप्त करते हुए उन्होंने भारत के जापान दूतावास को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई दी।