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भारत-जर्मनी क्वांटम टेक्नोलॉजी सहयोग: डॉ. जितेंद्र सिंह और थुरिंगिया के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट की अहम बैठक

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भारत-जर्मनी क्वांटम टेक्नोलॉजी सहयोग: डॉ. जितेंद्र सिंह और थुरिंगिया के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट की अहम बैठक

सारांश

भारत और जर्मनी ने क्वांटम टेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स और अंतरिक्ष सहयोग में नई साझेदारी की नींव रखी। 50 वर्षों की विज्ञान-तकनीक भागीदारी के बाद यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे डीप-टेक गठजोड़ की दिशा में अगला बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 2 जून को नई दिल्ली में थुरिंगिया के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट से मुलाकात की।
चर्चा में क्वांटम कम्युनिकेशन , फोटोनिक्स , क्वांटम सैटेलाइट संचार , डीप-टेक इनोवेशन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शामिल रहे।
भारत अब तक अपने प्रक्षेपण यानों से 11 जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है।
वर्ष 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे हुए।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
जर्मनी ने शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों का प्रस्ताव रखा।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार, 2 जून को नई दिल्ली में जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, क्वांटम सैटेलाइट संचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डीप-टेक इनोवेशन में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों की सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और वैज्ञानिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

बैठक में क्या हुई चर्चा

बैठक में थुरिंगिया को यूरोप के प्रमुख फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर सहमति जताई और माना कि भारत व जर्मनी की तकनीकी क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं।

चर्चा के दौरान क्वांटम नेटवर्क, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन और उन्नत फोटोनिक्स तकनीकों में सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। जर्मनी की ओर से यूरोप में चल रही क्वांटम और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन परियोजनाओं — विशेष रूप से यूरोओजीएस नेटवर्क — की जानकारी साझा की गई।

भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और उपलब्धियाँ

डॉ. सिंह ने भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हासिल प्रगति की जानकारी दी और बताया कि भारत सुरक्षित क्वांटम संचार एवं संबंधित तकनीकों के विकास में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और उद्योग-आधारित शोध को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं का भी उल्लेख किया।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, और बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर तथा अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विशाल अवसर उपलब्ध हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी

बैठक में अंतरिक्ष सहयोग पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) के बीच दीर्घकालिक साझेदारी पहले से चल रही है और भारत अब तक अपने प्रक्षेपण यानों के ज़रिए 11 जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है।

दोनों पक्षों ने सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मानव अंतरिक्ष मिशन, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, पृथ्वी अवलोकन, ड्रोन तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।

50 वर्षों की साझेदारी और आगे का रास्ता

डॉ. सिंह ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे हुए — यह साझेदारी आज दोनों देशों के संबंधों का एक सुदृढ़ स्तंभ है। जर्मनी की ओर से शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान कार्यक्रमों और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया।

दोनों देशों ने क्वांटम कंप्यूटिंग, मानक निर्माण, प्रतिभा आदान-प्रदान और तकनीकी व्यावसायीकरण में सहयोग की संभावनाओं पर सहमति जताई। बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच बढ़ता तालमेल भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करेगा तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नए रास्ते खोलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी यह होगी कि संस्थागत साझेदारियाँ कागज़ से निकलकर संयुक्त शोध परिणामों और व्यावसायिक उत्पादों तक पहुँचती हैं या नहीं। भारत-जर्मनी विज्ञान सहयोग के 50 वर्षों के बावजूद, गहरे तकनीकी व्यावसायीकरण में दोनों देश अभी भी अपनी पूरी क्षमता से पीछे हैं — यूरोओजीएस जैसी परियोजनाओं में भागीदारी इस अंतर को पाटने का एक ठोस अवसर है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह और मारियो वोग्ट की बैठक में क्या तय हुआ?
2 जून को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारत और जर्मनी ने क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डीप-टेक इनोवेशन में दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया।
भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन क्या है?
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य सुरक्षित क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित तकनीकों का विकास करना है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बैठक में इस मिशन के तहत हासिल प्रगति की जानकारी जर्मन प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा की।
थुरिंगिया को इस सहयोग में क्यों चुना गया?
थुरिंगिया यूरोप के प्रमुख फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में जाना जाता है। बैठक में माना गया कि भारत और थुरिंगिया की तकनीकी क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं, जिससे संयुक्त प्रयासों से वैश्विक स्तर की तकनीकें विकसित की जा सकती हैं।
इसरो और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के बीच सहयोग कैसा रहा है?
इसरो और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) के बीच दीर्घकालिक साझेदारी चल रही है, जिसके तहत भारत अब तक अपने प्रक्षेपण यानों से 11 जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है। इस बैठक में दोनों पक्षों ने मानव अंतरिक्ष मिशन, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च और ड्रोन तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
भारत-जर्मनी विज्ञान सहयोग कितने वर्ष पुराना है?
वर्ष 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे हुए। डॉ. सिंह ने इस बैठक में इस साझेदारी को दोनों देशों के संबंधों का एक मज़बूत स्तंभ बताया और भविष्य में इसे और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्र प्रेस
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