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एआई, क्वांटम और परमाणु तकनीक से भारत बनेगा वैश्विक महाशक्ति: डॉ. जितेंद्र सिंह

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एआई, क्वांटम और परमाणु तकनीक से भारत बनेगा वैश्विक महाशक्ति: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि एआई, क्वांटम, परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाएंगी। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने तीन वर्षों में आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए — यह भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा का ठोस संकेत है।

मुख्य बातें

केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि एआई, क्वांटम, परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाएंगी।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) , जो 2023 में शुरू हुआ, तीन वर्षों में आधे से अधिक निर्धारित लक्ष्य हासिल कर चुका है।
क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन में प्रगति — रक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक संचार में उपयोगी।
परमाणु ऊर्जा को डेटा सेंटर और डिजिटल बुनियादी ढाँचे की ऊर्जा माँग पूरी करने में अहम भूमिका दी जाएगी।
मंत्री ने चेतावनी दी — इन तकनीकों में पिछड़ने वाले देश आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों में कमज़ोर पड़ेंगे।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 27 जून 2025 को नई दिल्ली में एक मीडिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम, परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक भारत को आने वाले दशकों में एक निर्विवाद वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगी। उन्होंने रेखांकित किया कि ये चार अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्र न केवल आर्थिक प्रगति, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक प्रभाव की दिशा भी तय करेंगे।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की प्रगति

वर्ष 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक हासिल कर लिए हैं — यह जानकारी स्वयं डॉ. सिंह ने दी। उन्होंने विशेष रूप से क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया, जिसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है। गौरतलब है कि क्वांटम-एन्क्रिप्टेड संचार को वर्तमान कंप्यूटिंग तकनीकों से तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है, जिससे इसका रणनीतिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

एआई: हर क्षेत्र की नई ज़रूरत

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं रही — यह शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवाओं में समान रूप से अपरिहार्य होती जा रही है। उनके अनुसार, भारत डिजिटल बुनियादी ढाँचे, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणालियों में निवेश कर इस तकनीकी इकोसिस्टम को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ एआई नीति और निवेश में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में हैं।

परमाणु ऊर्जा: स्वच्छ और रणनीतिक धुरी

मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए मज़बूत और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की तकनीक-आधारित विकास यात्रा को गति देने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाने में आने वाले वर्षों में और अधिक निर्णायक भूमिका निभाएगी।

भू-राजनीतिक चेतावनी

डॉ. सिंह ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी — जो देश इन तकनीकों को अपनाने में पिछड़ेंगे, वे आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मोर्चों पर कमज़ोर पड़ने का जोखिम उठाएँगे। उन्होंने कहा, 'भारत आज उस मुकाम पर पहुँच चुका है, जहाँ वह कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है।' साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत यह तकनीकी परिवर्तन लोकतांत्रिक मूल्यों, समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए आगे बढ़ा रहा है।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, एआई, क्वांटम, अंतरिक्ष और परमाणु — इन चारों क्षेत्रों में एक साथ निवेश और नीतिगत ध्यान देना भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता के लिए अनिवार्य है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की मध्यावधि सफलता इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, हालाँकि इन तकनीकों का व्यापक औद्योगिक और सामाजिक अनुप्रयोग सुनिश्चित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी नीतिगत घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीनी क्रियान्वयन से तय होगी। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की मध्यावधि सफलता उत्साहजनक है, किंतु भारत में अनुसंधान से व्यावसायिक अनुप्रयोग तक की यात्रा ऐतिहासिक रूप से लंबी और अवरोधों से भरी रही है। एआई के क्षेत्र में वैश्विक होड़ में अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में भारत का कंप्यूटिंग और डेटा बुनियादी ढाँचा अभी भी अंतर को पाटने की प्रक्रिया में है। परमाणु ऊर्जा को डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ बनाने का विचार दूरदर्शी है, पर इसके लिए नियामकीय सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी की गति बढ़ानी होगी — जो अभी तक अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किन तकनीकों को भारत की वैश्विक महाशक्ति बनने की कुंजी बताया?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई, क्वांटम, परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक को भारत की वैश्विक महाशक्ति बनने की कुंजी बताया। उनके अनुसार ये तकनीकें आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक प्रभाव की दिशा भी तय करेंगी।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) क्या है और इसकी अब तक क्या प्रगति हुई है?
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक रणनीतिक कार्यक्रम है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, मिशन ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक हासिल कर लिए हैं, जिनमें क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन में उल्लेखनीय प्रगति शामिल है।
क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन का भारत के लिए क्या महत्व है?
क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन एक ऐसी तकनीक है जिसे मौजूदा कंप्यूटिंग तकनीकों से तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है। इसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और अति-संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है, जिससे इसका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विशेष महत्व है।
परमाणु ऊर्जा को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था से क्यों जोड़ा जा रहा है?
डॉ. सिंह के अनुसार, उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग के लिए मज़बूत और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ज़रूरत होगी। परमाणु ऊर्जा इस माँग को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
तकनीकी दौड़ में पिछड़ने वाले देशों पर क्या असर होगा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जो देश एआई, क्वांटम, परमाणु और अंतरिक्ष जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने में पिछड़ेंगे, वे आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मोर्चों पर कमज़ोर पड़ने का जोखिम उठाएँगे। उनके अनुसार, तकनीकी प्रगति के बिना दीर्घकालिक विकास संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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