एआई और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित अगली औद्योगिक क्रांति में भारत अग्रणी भूमिका निभाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 9 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एक मीडिया कॉन्क्लेव में कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित अगली औद्योगिक क्रांति में एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछली IT-आधारित औद्योगिक क्रांति में भारत देर से शामिल हुआ था, लेकिन इस बार देश शुरुआत से ही वैश्विक नवाचार की अगली पंक्ति में खड़ा है।
भारत की प्रमुख तकनीकी पहलें
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्होंने एक समर्पित बायोटेक्नोलॉजी नीति — बायोई3 (अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यावरण के लिए बायोटेक्नोलॉजी) — तैयार की है। इसके साथ ही नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहलों के ज़रिए देश ने उभरती तकनीकों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
मंत्री ने कहा, 'अगली औद्योगिक क्रांति, जो बायोटेक्नोलॉजी और एआई पर आधारित होगी, उसमें भारत एक अहम भूमिका निभाएगा। पिछली इंडस्ट्रियल क्रांति आईटी पर आधारित थी और भारत उसमें देर से शामिल हुआ था।'
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव और भारत की तैयारी
डॉ. सिंह ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे नए क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत इस वैश्विक बदलाव में सबसे आगे रहने की ठोस तैयारी कर चुका है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुनिया के प्रमुख देश तकनीकी वर्चस्व की होड़ में लगे हुए हैं।
स्पेस इकोनॉमी में उल्लेखनीय वृद्धि
भारत की तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो कुछ वर्ष पहले तक बेहद सीमित थी, अब बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर हो गई है। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले 8 से 9 वर्षों में यह 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुँच सकती है।
इस वृद्धि का श्रेय उन्होंने नीतिगत सुधारों को दिया — विशेष रूप से 2020 में स्पेस सेक्टर को निजी भागीदारी के लिए खोलने के निर्णय को। गौरतलब है कि इस कदम के बाद से भारत में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है।
नीति-निर्माण में भारत की अग्रणी स्थिति
टेक्नोलॉजी डेवलपर्स, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य हितधारकों की उपस्थिति में आयोजित इस कॉन्क्लेव में डॉ. सिंह ने कहा, 'भारत की तकनीकी यात्रा में बड़ा बदलाव आया है और देश अब कई क्षेत्रों में वैश्विक मानकों के अनुरूप काम कर रहा है।' उनके अनुसार, बायोई3 नीति, क्वांटम मिशन और एआई मिशन जैसी पहलें भारत को न केवल तकनीकी उपभोक्ता, बल्कि वैश्विक तकनीकी निर्माता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं।
आने वाले वर्षों में इन नीतियों के क्रियान्वयन की गति और उनके ठोस परिणाम ही तय करेंगे कि भारत वास्तव में अगली औद्योगिक क्रांति में अपनी अग्रणी भूमिका सुनिश्चित कर पाता है या नहीं।