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भारत 12 वर्षों में टेक्नोलॉजी फॉलोअर से लीडर बना: डॉ. जितेंद्र सिंह का दावा

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भारत 12 वर्षों में टेक्नोलॉजी फॉलोअर से लीडर बना: डॉ. जितेंद्र सिंह का दावा

सारांश

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का दावा — मोदी सरकार के 12 वर्षों में भारत टेक्नोलॉजी अनुयायी से वैश्विक नेतृत्वकर्ता बना। स्पेस स्टार्टअप एकल अंक से 400 पार, स्पेस इकोनॉमी $9 अरब। AI, क्वांटम, बायोटेक में भी बड़ी छलाँग का दावा।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 31 मई 2026 को एक पॉडकास्ट में कहा कि भारत पिछले 12 वर्षों में टेक्नोलॉजी फॉलोअर से लीडर बना।
भारत के स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक हो गई है।
भारत की स्पेस इकोनॉमी का मौजूदा मूल्य लगभग $9 अरब डॉलर आँका गया है।
अंतरिक्ष, क्वांटम प्रौद्योगिकी, AI, जैव प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी प्रगति का दावा।
मंत्री ने नीतिगत बदलाव और निजी क्षेत्र की भागीदारी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार, 31 मई 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत एक टेक्नोलॉजी अनुयायी देश से वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। उन्होंने यह बात एक पॉडकास्ट के दौरान कही और इसे 'विकसित भारत-2047' के विजन की मजबूत वैज्ञानिक नींव बताया।

मुख्य वक्तव्य

डॉ. सिंह ने कहा कि दशकों तक भारत उन तकनीकों को अपनाता रहा जो अन्य देशों में विकसित हुई थीं, और अग्रणी राष्ट्रों के कई वर्षों बाद नई प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कदम रखता था। उनके अनुसार, आज भारत न केवल वैश्विक तकनीकी विकास में तेज़ी से भागीदारी कर रहा है, बल्कि कई क्षेत्रों में इनोवेशन की भावी दिशा तय करने में भी सहायक भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा, 'इस दृष्टिकोण ने भारत को एक ऐसा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनाने में सक्षम बनाया है जो एक साथ आर्थिक विकास, रणनीतिक क्षमता और सार्वजनिक सेवा वितरण का समर्थन करता है।'

किन क्षेत्रों में हुई प्रगति

मंत्री ने विशेष रूप से अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में विकसित की गई वैज्ञानिक क्षमताएँ और इनोवेशन का माहौल 'विकसित भारत-2047' की बुनियाद हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी छलाँग

अंतरिक्ष क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि निजी भागीदारी के लिए इस क्षेत्र को खोले जाने के बाद भारत ने दुनिया के सबसे गतिशील स्पेस इकोसिस्टम में से एक विकसित किया है। उन्होंने कहा कि स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक हो चुकी है। भारत की स्पेस इकोनॉमी, जिसका मौजूदा मूल्य लगभग $9 अरब डॉलर आँका गया है, आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि के पथ पर है।

नीतिगत बदलाव और निजी क्षेत्र की भूमिका

डॉ. सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय नीति-निर्माण के केंद्र में लाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और इनोवेशन-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की नीतिगत सोच को दिया। उनके अनुसार, इसी दृष्टिकोण ने एक ऐसे मजबूत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम की नींव रखी है जो आर्थिक, रणनीतिक और सामाजिक — तीनों आयामों को एक साथ साधता है। यह देखना बाकी है कि ये दावे दीर्घकालिक वैश्विक बेंचमार्क पर कितने खरे उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'टेक्नोलॉजी लीडर' जैसे दावों को स्वतंत्र वैश्विक सूचकांकों — जैसे ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स या R&D खर्च के अनुपात — से परखना ज़रूरी है। स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या प्रभावशाली है, परंतु इकोसिस्टम की गुणवत्ता और व्यावसायिक सफलता दर अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। $9 अरब की स्पेस इकोनॉमी वैश्विक स्तर पर अभी भी अपेक्षाकृत छोटी है — अमेरिका और चीन से कहीं पीछे। असली कसौटी यह होगी कि भारत के इनोवेशन का कितना हिस्सा घरेलू पेटेंट, निर्यात और उत्पादकता में परिवर्तित होता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के टेक्नोलॉजी लीडर बनने के बारे में क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत टेक्नोलॉजी फॉलोअर से लीडर देश बन गया है। उन्होंने यह बात 31 मई 2026 को एक पॉडकास्ट के दौरान कही।
भारत की स्पेस इकोनॉमी अभी कितनी बड़ी है?
डॉ. सिंह के अनुसार, भारत की स्पेस इकोनॉमी का मौजूदा मूल्य लगभग $9 अरब डॉलर है और आने वाले वर्षों में इसके काफी बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक हो चुकी है।
'विकसित भारत-2047' विजन में टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका है?
मंत्री के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में विकसित वैज्ञानिक क्षमताएँ, इनोवेशन का माहौल और तकनीकी बुनियादी ढाँचा 'विकसित भारत-2047' की नींव हैं। यह विजन 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखता है।
भारत ने किन प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी प्रगति की है?
डॉ. सिंह ने अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वच्छ ऊर्जा का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में भारत अब वैश्विक इनोवेशन की दिशा तय करने में भी भूमिका निभा रहा है।
भारत के स्पेस सेक्टर में निजी भागीदारी का क्या असर हुआ?
निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खुलने के बाद स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक हो गई है। मंत्री के अनुसार, इससे भारत ने दुनिया के सबसे गतिशील स्पेस इकोसिस्टम में से एक विकसित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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