16 जुलाई 2026
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विल्लुपुरम गुटबाजी पर एआईएडीएमके की सख्त कार्रवाई, 11 पदाधिकारी संगठनात्मक पदों से बर्खास्त

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विल्लुपुरम गुटबाजी पर एआईएडीएमके की सख्त कार्रवाई, 11 पदाधिकारी संगठनात्मक पदों से बर्खास्त

सारांश

विल्लुपुरम में 9 जुलाई की हिंसक झड़प के बाद एआईएडीएमके ने 11 पदाधिकारियों को पदों से हटाकर सख्त संदेश दिया है। शन्मुगम और पसुपति खेमों के बीच यह टकराव पार्टी की उस आंतरिक दरार को उजागर करता है जो विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर आने के बाद से बनी हुई है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके ने विल्लुपुरम जिले में गुटबाजी पर 11 पदाधिकारियों को संगठनात्मक पदों से हटाया।
9 जुलाई को पार्टी कार्यकर्ता बैठक में सी.
शन्मुगम और जिला सचिव पसुपति के समर्थकों के बीच पथराव व हिंसक झड़प हुई।
बर्खास्त पदाधिकारी शन्मुगम खेमे के समर्थक माने जाते हैं।
पार्टी महासचिव एडप्पडी के.
पलानीस्वामी ने अनुशासन बहाल करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया।
विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर आने के बाद से विल्लुपुरम में गुटबाजी लगातार बनी हुई है।
शन्मुगम ने अब तक इस कार्रवाई पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के शीर्ष नेतृत्व ने विल्लुपुरम जिले में भड़की गुटबाजी पर कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए 11 पदाधिकारियों को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया है। यह कार्रवाई 9 जुलाई को पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 9 जुलाई को आयोजित कार्यकर्ता बैठक में वरिष्ठ नेता सी. वे. शन्मुगम और हाल ही में नियुक्त विल्लुपुरम जिला सचिव पसुपति के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हुई, जो देखते-देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। आरोप है कि दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पथराव किया, एक वाहन को भी निशाना बनाया गया और कुछ कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। समीक्षा के बाद सी. वे. शन्मुगम खेमे के समर्थक माने जाने वाले 11 पदाधिकारियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया

बताया जा रहा है कि पार्टी महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने जिला इकाई में अनुशासन बहाल करने और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया। पार्टी नेतृत्व ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन की कार्यप्रणाली को बाधित करने या पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियाँ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएँगी।

गौरतलब है कि एआईएडीएमके ने पलानीस्वामी के नेतृत्व में एकजुटता का संदेश देने की लगातार कोशिश की है, लेकिन राज्य के कई जिलों की तरह विल्लुपुरम में भी आंतरिक मतभेद पूरी तरह थमे नहीं हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

सूत्रों के मुताबिक, विल्लुपुरम में दोनों गुटों के बीच तनाव विधानसभा चुनाव के बाद से बना हुआ है। उस चुनाव में एआईएडीएमके तीसरे स्थान पर खिसक गई थी, जिसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक ढाँचे को लेकर मतभेद उभर आए। पसुपति को जिला सचिव नियुक्त किए जाने के बाद उनके समर्थकों और शन्मुगम खेमे के बीच खींचतान और तेज हो गई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले खुद को पुनर्गठित करने की कोशिश में है। 9 जुलाई की घटना को हाल के महीनों में जिला इकाई के भीतर सबसे गंभीर आंतरिक विवादों में से एक माना जा रहा है।

आम जनता और कार्यकर्ताओं पर असर

इस बर्खास्तगी से जिले में पार्टी की जमीनी संरचना प्रभावित होने की आशंका है, क्योंकि हटाए गए पदाधिकारी स्थानीय स्तर पर संगठन की रीढ़ माने जाते थे। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अल्पकालिक अनुशासन तो स्थापित कर सकती है, लेकिन गुटों के बीच की मूल कड़वाहट को दूर नहीं करती।

क्या होगा आगे

फिलहाल एआईएडीएमके ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस मामले में और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या नहीं। वहीं, सी. वे. शन्मुगम ने अब तक 11 पदाधिकारियों की बर्खास्तगी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी के भीतर यह देखा जाएगा कि क्या यह कदम विल्लुपुरम में स्थायी शांति ला पाता है या गुटबाजी किसी और रूप में सामने आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बीमारी का नहीं। शन्मुगम और पसुपति खेमों के बीच की यह खाई नई नहीं है — यह उस व्यापक नेतृत्व-शून्यता की उपज है जो पार्टी के तीसरे स्थान पर खिसकने के बाद उभरी। पलानीस्वामी जब तक जिला-स्तरीय असंतोष की जड़ों को नहीं संबोधित करते, तब तक इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ महज अस्थायी राहत बनकर रह जाएँगी। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी 2026 के चुनावों से पहले इन आंतरिक दरारों को पाटने में सफल होगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके ने विल्लुपुरम में 11 पदाधिकारियों को क्यों हटाया?
9 जुलाई को विल्लुपुरम में पार्टी कार्यकर्ता बैठक के दौरान दो गुटों के बीच हिंसक झड़प और पथराव की घटना के बाद यह कार्रवाई की गई। बर्खास्त पदाधिकारी वरिष्ठ नेता सी. वे. शन्मुगम खेमे के समर्थक माने जाते हैं।
विल्लुपुरम में किन दो गुटों के बीच झड़प हुई?
वरिष्ठ नेता सी. वे. शन्मुगम के समर्थकों और हाल ही में नियुक्त विल्लुपुरम जिला सचिव पसुपति के समर्थकों के बीच टकराव हुआ। पसुपति की नियुक्ति के बाद से दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया था।
एआईएडीएमके में यह गुटबाजी कब से चल रही है?
सूत्रों के अनुसार विल्लुपुरम में यह विवाद विधानसभा चुनाव के बाद से बना हुआ है, जिसमें एआईएडीएमके तीसरे स्थान पर रही थी। उस हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए।
क्या एआईएडीएमके आगे और अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी?
अभी तक पार्टी ने इस बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। वहीं, सी. वे. शन्मुगम ने भी इस बर्खास्तगी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पलानीस्वामी की इस कार्रवाई का क्या महत्व है?
यह कदम महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी के उस प्रयास का हिस्सा है जिसमें वे पार्टी को एकजुट दिखाना चाहते हैं। यह संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व आंतरिक अनुशासन के मामले में सख्त रुख अपनाने को तैयार है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
राष्ट्र प्रेस
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