तमिलनाडु: एआईएडीएमके का टीवीके सरकार पर आरोप — 25 विधायकों की खरीद-फरोख्त, इस्तीफे पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार और विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के बीच राजनीतिक संघर्ष 26 मई को एक नए मोड़ पर पहुँच गया, जब एआईएडीएमके ने सरकार पर विधायकों की खरीद-फरोख्त और दलबदल को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने का आरोप लगाया। चेन्नई के सचिवालय में विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद यह आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए।
मुख्य घटनाक्रम
एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाले गुट के विधायक अग्रि कृष्णमूर्ति ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया कि पार्टी नेतृत्व ने सभी एआईएडीएमके विधायकों को विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके सरकार के विरुद्ध मतदान करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, कृष्णमूर्ति के अनुसार, पार्टी के 25 विधायकों ने इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए सत्ताधारी दल के पक्ष में मतदान किया।
इस मतदान के तत्काल बाद, एआईएडीएमके ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग करते हुए अध्यक्ष को एक औपचारिक याचिका सौंपी। कृष्णमूर्ति ने बताया कि अध्यक्ष ने पार्टी को सूचित किया है कि इस याचिका पर अभी विचार-विमर्श जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इस्तीफों पर विवाद
एआईएडीएमके नेता ने तीन विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई, जबकि उनके विरुद्ध अयोग्यता की कार्यवाही अभी भी लंबित है। उनके अनुसार, पार्टी ने अध्यक्ष से विशेष रूप से अनुरोध किया था कि दलबदल विरोधी याचिका का निपटारा होने तक इन इस्तीफों पर कोई कार्रवाई न की जाए।
कृष्णमूर्ति ने तर्क दिया कि लंबित अयोग्यता कार्यवाही के बीच इस्तीफे स्वीकार करना प्रक्रियात्मक और लोकतांत्रिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है और यह विधानसभा के स्थापित नियमों के विपरीत है।
सरकार पर सीधा हमला
कृष्णमूर्ति ने आरोप लगाया कि विधायकों की खरीद-फरोख्त बेहद तेज़ रफ्तार से हो रही है। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफा देने वाले कुछ विधायकों को मिनटों के भीतर टीवीके के पहचान पत्र जारी कर दिए गए — जो उनके अनुसार एक पूर्व-नियोजित प्रक्रिया का संकेत है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सचिवालय राज्य के प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम कर रहा है या टीवीके पार्टी कार्यालय के विस्तार के रूप में — एक तीखा राजनीतिक प्रहार जो सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस्तीफा देने और राजनीतिक निष्ठा बदलने के लिए प्रोत्साहित करने से तमिलनाडु की राजनीति में व्यापक अस्थिरता पैदा हो सकती है। उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति भविष्य में दलबदल की दर को और तेज़ कर सकती है, जो मतदाताओं के जनादेश को कमज़ोर करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की विधानसभा में सत्ता संतुलन को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं का लंबे समय तक अनिर्णीत रहना भारतीय विधानसभाओं में एक पुरानी समस्या रही है।
क्या होगा आगे
अब सभी की नज़रें विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के निर्णय पर टिकी हैं — वे दलबदल विरोधी याचिका पर कब और क्या फैसला लेते हैं। एआईएडीएमके ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर कानूनी और संसदीय सभी विकल्पों का उपयोग करेगी।