एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री षणमुगम और विजयभास्कर के टीवीके में शामिल होने की अटकलें तेज
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े उलटफेर की संभावना सामने आई है — एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम और सी. विजयभास्कर कथित तौर पर कुछ अन्य नेताओं के साथ रविवार को तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी नेता ने इस संबंध में कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
2026 चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरण
2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से तमिलनाडु की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 107 सीटें जीतने में सफल रही, लेकिन बहुमत के आँकड़े तक नहीं पहुँच सकी। इसके बाद टीवीके नेता विजय ने सरकार बनाने के लिए डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के दलों से समर्थन माँगा।
गठबंधन का गठन और सत्ता की साझेदारी
सबसे पहले कांग्रेस ने डीएमके गठबंधन से अलग होकर टीवीके सरकार को समर्थन दिया, जिसके बदले में उसे दो मंत्री पद और राज्यसभा की एक सीट मिली। विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने शुरुआत में बाहर से समर्थन देने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में सरकार में शामिल हो गए और दोनों को एक-एक मंत्री पद प्राप्त हुआ। सीपीआई(एम) और सीपीआई ने सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया है।
एआईएडीएमके में टूट और विधायकों की वापसी
राजनीतिक तनाव तब और गहरा गया जब एएमएमके के महासचिव टी.टी.वी. दिनाकरन ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के विधायक कामराज को टीवीके ने राजनीतिक सौदेबाजी के जरिए अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद नाराज एआईएडीएमके विधायकों का एक वर्ग एस.पी. वेलुमणि के मार्गदर्शन में पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में वापस लौट आया। गौरतलब है कि पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम और सी. विजयभास्कर उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जो पार्टी में नहीं लौटे, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगातार तेज होती रही हैं।
पहले भी हुए हैं दलबदल
यह ऐसी पहली घटना नहीं होगी — एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन और कई अन्य नेता पहले ही टीवीके में शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दलबदल का सिलसिला 2026 के बाद से एआईएडीएमके की कमज़ोर होती स्थिति का संकेत है।
टीवीके पर संभावित असर
आलोचकों का कहना है कि यदि और नेता पार्टी बदलते हैं, तो विधानसभा में टीवीके की संख्यात्मक स्थिति और मज़बूत हो सकती है, जिससे सरकार की स्थिरता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले हफ्तों में और तेज़ी से बदल सकता है।