टीवीके में DMK-AIADMK नेताओं का पलायन तेज़, स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की संभावित घोषणा के बीच सत्ताधारी दल तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की ओर नेताओं का रुख तेज़ी से बढ़ रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) दोनों दलों के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता 17 मई 2026 तक TVK में शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह प्रवृत्ति विधानसभा चुनावों में TVK के उभार के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में आ रहे व्यापक बदलाव का संकेत है।
कौन-कौन से नेता बदल रहे हैं पाला
हाल के हफ्तों में TVK में शामिल होने वाले उल्लेखनीय नामों में DMK के राज्यस्तरीय पदाधिकारी इरोड जिले के एल्लापलयम आर. शिवकुमार, नामक्कल पूर्वी जिले के कोषाध्यक्ष ए.के. बालाचंदर और रासीपुरम नगर पालिका के पूर्व पार्षद रामकुमार एवं गेट थंगावेल शामिल हैं। AIADMK की ओर से पूर्व मंत्री केवी. रामलिंगम ने वरिष्ठ मंत्री केए. सेंगोत्तैयन की उपस्थिति में TVK की सदस्यता ग्रहण की।
गौरतलब है कि ये दलबदल केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक पुनर्गठन के संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य जिलों के कई और पदाधिकारी भी इसी दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।
स्थानीय निकाय चुनाव — बदलाव की असली वजह
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि आगामी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की आहट ने जमीनी स्तर के नेताओं को अपनी राजनीतिक संभावनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने पर मजबूर किया है। यह आम धारणा बन रही है कि TVK नगर पालिका और स्थानीय स्तर पर भी वही प्रदर्शन दोहरा सकती है जो उसने विधानसभा चुनावों में किया था।
एक सूत्र ने बताया कि कई स्थानीय नेताओं में यह भावना प्रबल है कि यदि चुनाव शीघ्र घोषित होते हैं, तो सत्ताधारी पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा। यही सोच कार्यकर्ताओं को TVK की ओर आकर्षित कर रही है।
TVK का राजनीतिक उभार — पृष्ठभूमि
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। इसके बाद पार्टी ने कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), CPI(M), विदुथलई चिरुथाईगल काची (VCK) और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई। यह ऐसे समय में आया है जब DMK और AIADMK दोनों अपनी-अपनी संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, TVK की सांगठनिक मजबूती और सत्ता में रहते हुए बढ़ता जनाधार इस पलायन के पीछे प्रमुख कारण हैं। यह तमिलनाडु की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की शुरुआत हो सकती है।
विपक्षी दलों पर असर
दोनों प्रमुख विपक्षी दलों — DMK और AIADMK — के सूत्रों ने स्वीकार किया है कि हाल के हफ्तों में स्थानीय नेताओं का TVK की ओर जाना एक बढ़ती चिंता का विषय बन गया है। आलोचकों का कहना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्ष की उम्मीदवारी कमज़ोर पड़ सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या विपक्षी दल इस पलायन को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति अपनाते हैं या TVK का विस्तार इसी रफ्तार से जारी रहता है।