एआईएडीएमके को बड़ा झटका: करूर विधायक व पूर्व मंत्री एम.आर. विजयभास्कर ने विधानसभा से दिया इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) को 29 जून 2026 को एक और बड़ा राजनीतिक धक्का लगा, जब करूर से विधायक और पूर्व परिवहन मंत्री एम.आर. विजयभास्कर ने तमिलनाडु विधानसभा की सदस्यता से औपचारिक इस्तीफा दे दिया। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद से यह एआईएडीएमके के लिए विधायकों के पार्टी छोड़ने की बढ़ती कड़ी में एक और कड़ी है।
इस्तीफे का घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, विजयभास्कर ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को हस्तलिखित इस्तीफा सौंपकर विधानसभा सदस्यता त्याग दी। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, वह शीघ्र ही सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) में शामिल हो सकते हैं, हालाँकि इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले एआईएडीएमके के कई अन्य विधायक — मरगथम कुमारवेल, जयकुमार, सत्यभामा और इसाक्की सुब्बैया — विधानसभा से इस्तीफा देकर टीवीके में जा चुके हैं। विजयभास्कर के इस्तीफे से विधानसभा में एआईएडीएमके की संख्या और घट गई है।
चुनाव के बाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि
2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई और बाद में सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस मुकाबले को टीवीके और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के बीच सीधी लड़ाई बताया था। परिणाम में डीएमके मुख्य विपक्षी दल बनी, जबकि एआईएडीएमके तीसरे स्थान पर रही।
गौरतलब है कि चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एआईएडीएमके में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। दल-बदल की आशंका के चलते पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया था।
पार्टी के भीतर गुटबाज़ी और समझौता
उसी दौरान वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि, सी.वी. शनमुगम और विजयभास्कर को पार्टी के भीतर एक अलग गुट के रूप में देखा गया। बाद में वेलुमणि गुट ने एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी से समझौता कर लिया और पार्टी में वापस लौट आया।
हालाँकि, शनमुगम और विजयभास्कर ने पार्टी नेतृत्व से तत्काल मुलाकात नहीं की, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। दोनों बाद में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लौट गए थे।
एआईएडीएमके पर असर
विजयभास्कर के इस्तीफे के साथ एआईएडीएमके ने एक और प्रमुख पूर्व मंत्री को खो दिया है। यह इस्तीफा पार्टी में जारी राजनीतिक उथल-पुथल को और स्पष्ट करता है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठन को एकजुट रखने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
आगे क्या
माना जा रहा है कि यदि विजयभास्कर टीवीके में शामिल होते हैं, तो विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति और मज़बूत होगी। एआईएडीएमके नेतृत्व के लिए यह लगातार हो रहे पलायन को रोकना और शेष विधायकों को एकजुट रखना अब प्राथमिकता बन गई है।