एआईएडीएमके संकट: तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष ने 21 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई वापस ली, 4 पर जारी रहेगी प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीटी प्रभाकर ने मंगलवार, 9 जून 2026 को घोषणा की कि 13 मई 2026 को हुए विश्वास मत के दौरान तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में मतदान करने वाले 21 एआईएडीएमके विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई औपचारिक रूप से रद्द कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने इन विधायकों के स्पष्टीकरण और माफी को स्वीकार कर लिया है, जिससे अधिकांश बागी सदस्यों पर मंडरा रहा अयोग्यता का खतरा फिलहाल टल गया है।
मुख्य घटनाक्रम
13 मई 2026 को 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK सरकार के पक्ष में विश्वास प्रस्ताव 144 मतों से पारित हुआ, जबकि विरोध में केवल 22 मत पड़े और 5 सदस्यों ने मतदान से परहेज किया। मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने कार्यवाही के दौरान सदन से वॉकआउट किया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने सत्तारूढ़ TVK सरकार के समर्थन में मतदान किया — जो अपनी ही पार्टी के आधिकारिक रुख के विपरीत था। इसके बाद एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत इन 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की माँग करते हुए अध्यक्ष को याचिका दी।
अध्यक्ष का फैसला
चेन्नई स्थित सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए अध्यक्ष प्रभाकर ने बताया कि उन्हें पलानीस्वामी से इस मामले में चार अलग-अलग पत्र प्राप्त हुए थे। पत्रों की जाँच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि एआईएडीएमके नेतृत्व ने 21 विधायकों द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरणों को स्वीकार कर उन्हें क्षमा कर दिया है।
प्रभाकर ने कहा, 'एडप्पाडी के. पलानीस्वामी द्वारा 13 मई 2026 को भेजे गए पत्र में उल्लिखित अनुसार, मैं संबंधित सदस्यों की माफी स्वीकार कर रहा हूँ और उनके खिलाफ सभी आगे की कार्रवाई रोक रहा हूँ।'
चार विधायकों पर जारी रहेगी कार्रवाई
हालाँकि, अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पलानीस्वामी ने शेष चार विधायकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का अनुरोध किया है, क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया। इसी आधार पर एआईएडीएमके विधायकों एस. जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, सत्यबामा और इसाक्की सुब्बैया के खिलाफ औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अध्यक्ष ने बताया कि उचित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन चारों विधायकों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की प्रकृति की घोषणा बाद में की जाएगी।
आम जनता और राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एआईएडीएमके पहले से ही आंतरिक विभाजन और नेतृत्व के सवालों से जूझ रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पार्टी के विधायकों ने अपने आधिकारिक रुख से अलग मतदान किया हो — यह प्रवृत्ति पार्टी में बढ़ते केंद्रापसारी तनाव का संकेत देती है।
इस फैसले से TVK सरकार की विधानसभा में स्थिति और मजबूत हुई है, क्योंकि अधिकांश बागी विधायकों पर अयोग्यता की तलवार हट गई है। वहीं, चार विधायकों का राजनीतिक भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
क्या होगा आगे
अध्यक्ष प्रभाकर के अनुसार, जयकुमार, कुमारवेल, सत्यबामा और सुब्बैया के मामले में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी और उसके बाद अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या और विधायकों की स्वायत्तता के सवाल को नए सिरे से उठाता है।