एआईएडीएमके के दो पूर्व मंत्री 15,000 समर्थकों सहित टीवीके में शामिल, तमिलनाडु राजनीति में बड़ा उलटफेर
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर और एम.आर. विजयभास्कर ने 3 जुलाई 2025 को लगभग 15,000 समर्थकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण की। चेन्नई के निकट मल्लापुरम स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम को टीवीके के सत्ता में आने के बाद का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रवेश माना जा रहा है।
कार्यक्रम का स्वरूप और पैमाना
टीवीके के वरिष्ठ नेता एन. आनंद और अधव अर्जुन ने दोनों पूर्व मंत्रियों और उनके समर्थकों का पार्टी में औपचारिक स्वागत किया। आयोजकों के अनुसार, तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से आए समर्थक लगभग 200 बसों और 600 से अधिक कारों में कार्यक्रम स्थल पहुँचे, जो इस राजनीतिक परिवर्तन की व्यापकता को दर्शाता है।
कार्यक्रम में एआईएडीएमके के कई प्रमुख पूर्व नेता भी शामिल हुए — तिरुचिरापल्ली की पूर्व मंत्री एस. वलारमथी, तिरुप्पुर के पूर्व मंत्री एम.एस.एम. आनंदन तथा पूर्व विधायक मनराज (श्रीविल्लिपुत्तूर), एम. रामकुमार (कुंभकोणम), राजावर्मन (तिरुचिरापल्ली), सत्यन प्रभाकर (परमकुडी) और तिरुज्ञानसंबंधम (पेरावुरानी) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
जिला स्तर के नेताओं की भागीदारी
टीवीके में शामिल होने वालों में जिला स्तर के कई प्रमुख नेता भी सम्मिलित हैं। इनमें पी.के. वैरामुथु (पुडुकोट्टई), इलामबाई तमिलसेल्वन (पेरम्बलुर), ओराथानाडू एम. सेकर (तंजावुर) और श्रीनिवासन (तिरुचिरापल्ली) के नाम उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त, एआईएडीएमके के 208 पूर्व यूनियन सेक्रेटरी भी इस अवसर पर टीवीके में शामिल हुए।
नेताओं ने एआईएडीएमके छोड़ने का कारण बताया
पार्टी प्रवेश से पूर्व जारी एक संयुक्त बयान में डॉ. सी. विजयभास्कर और एम.आर. विजयभास्कर ने कहा कि वे अपने पूरे राजनीतिक जीवन में एआईएडीएमके के प्रति निष्ठावान रहे और पार्टी के सबसे कठिन समय में भी उसके साथ डटे रहे। दोनों नेताओं ने बताया कि उन्होंने एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले टीवीके के साथ चुनावी गठबंधन बनाने का आग्रह किया था, परंतु उनके सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया।
दोनों नेताओं ने यह भी दावा किया कि पलानीस्वामी ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के समर्थन से मुख्यमंत्री बनने का प्रयास किया। उन्होंने एआईएडीएमके और डीएमके के बीच किसी भी प्रकार के समझौते को 'अप्राकृतिक' और पार्टी संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन के आदर्शों के विरुद्ध बताया। पार्टी नेतृत्व से गहरी निराशा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने 'आंखों में आंसू लिए' एआईएडीएमके छोड़ने का यह दुखद निर्णय लिया।
तमिलनाडु की राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके अपने संगठनात्मक ढाँचे को पुनर्गठित करने की कोशिश में है और टीवीके राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। गौरतलब है कि यह टीवीके के सत्ता में आने के बाद का सबसे बड़ा सामूहिक दल-परिवर्तन है, जो एआईएडीएमके के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत देता है। आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह प्रवेश तमिलनाडु की राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।