एआईएडीएमके में एकता की कोशिशें तेज: पलानीस्वामी-शणमुगम गुट के बीच सुलह के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने 20 मई को चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में जिला सचिवों की बैठक बुलाकर पार्टी एकता का आह्वान किया। इसी दौरान वरिष्ठ नेता सी.वी. शणमुगम के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट और ईपीएस खेमे के बीच मतभेद दूर करने की कोशिशें भी तेज होती दिख रही हैं। पार्टी के भीतर एक वर्ग की यह आशंका गहरी होती जा रही है कि लगातार जारी आंतरिक कलह से एआईएडीएमके की राजनीतिक स्थिति और कमज़ोर पड़ सकती है।
बैठक का घटनाक्रम
मंगलवार को पलानीस्वामी द्वारा बुलाई गई जिला सचिवों की यह अनौपचारिक बैठक शुरुआत में उनके आवास पर होनी थी, लेकिन अंतिम समय में स्थान बदलकर एआईएडीएमके मुख्यालय कर दिया गया। ईपीएस समर्थक नेताओं का दावा है कि पार्टी के 82 में से अधिकांश जिला सचिव बैठक में उपस्थित रहे, जबकि विरोधी गुट का कहना है कि बड़ी संख्या में पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता डी. जयकुमार प्रमुख अनुपस्थित नेताओं में शामिल थे। पार्टी मुख्यालय की ओर से बाद में स्पष्ट किया गया कि कुछ जिला सचिवों ने अनुपस्थिति के कारण पार्टी को पहले ही सूचित कर दिए थे।
पलानीस्वामी का संदेश
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी ने बैठक में एआईएडीएमके के चुनावी प्रदर्शन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जिला सचिवों — विशेषकर नए पदाधिकारियों — को यह भरोसा दिलाया कि पार्टी पहले भी कठिन राजनीतिक दौर और भारी चुनावी हार से उबरकर सत्ता में वापसी कर चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके पिछले कई चुनावों में लगातार हार झेल रही है और उसकी संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
शणमुगम गुट की माँग
शणमुगम ने अपने कार्यालय में समर्थक विधायकों और पदाधिकारियों के साथ अलग बैठक की और पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हम बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन जनरल काउंसिल की बैठक जल्द होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य पार्टी से निकाले गए नेताओं और दूर चले गए कार्यकर्ताओं को वापस लाकर एआईएडीएमके को मजबूत और एकजुट करना है।" शणमुगम ने पार्टी की आम परिषद (जनरल काउंसिल) की जल्द बैठक बुलाने की अपनी माँग दोहराई, जिसमें लगातार चुनावी हार समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता बताई।
संगठनात्मक फेरबदल और आरोप
शणमुगम ने यह भी दावा किया कि पलानीस्वामी अब तक 31 जिला सचिवों को उनके पदों से हटा चुके हैं। ताज़ा संगठनात्मक फेरबदल में पूर्व विधायक एलाम्बई आर. तमिलसेलवन को मंगलवार शाम पेरम्बलूर जिला सचिव पद से हटा दिया गया।
सुलह की संभावनाएँ और आगे की राह
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग दोनों गुटों के बीच तनाव कम करने में सक्रिय है। उनका मानना है कि लंबे समय तक जारी आंतरिक मतभेदों से केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों — विशेषकर सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) — को फायदा होगा। हालाँकि, इन प्रयासों में अब तक कितनी ठोस प्रगति हुई है, यह स्पष्ट नहीं है। गौरतलब है कि जब तक जनरल काउंसिल की बैठक की तारीख तय नहीं होती, दोनों गुटों के बीच की खाई पाटना मुश्किल बना रहेगा।