सिल्वर लाइन भूमि अधिग्रहण रद्द: सतीशन सरकार का बड़ा फैसला, प्रदर्शनकारियों पर मामले वापस

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सिल्वर लाइन भूमि अधिग्रहण रद्द: सतीशन सरकार का बड़ा फैसला, प्रदर्शनकारियों पर मामले वापस

सारांश

सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने वह किया जो विपक्ष में रहते हुए वादा किया था — सिल्वर लाइन की सभी भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाएँ रद्द और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस। केरल की सबसे विवादास्पद बुनियादी ढाँचा परियोजना का यह अंत पिछली वाम सरकार की विरासत पर सीधा प्रहार है।

मुख्य बातें

सतीशन की कैबिनेट ने 20 मई 2026 को सिल्वर लाइन परियोजना की समस्त भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाएँ औपचारिक रूप से रद्द कीं।
तिरुवनंतपुरम-कासरगोड सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विरोध में उतरे प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे।
परियोजना सर्वेक्षण के दौरान निजी संपत्तियों पर लगाए गए विवादित पीले सर्वे पत्थर भी हटाए जाएंगे।
KPSC की 31 अगस्त को समाप्त होने वाली रैंक सूचियाँ 30 नवंबर तक बढ़ाने की सिफारिश की जाएगी।
सरकार की 'विजन 2031' योजना और 100-दिवसीय कार्य योजना जल्द जारी होगी।

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने 20 मई 2026 को अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में विवादास्पद सिल्वर लाइन सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना से जुड़ी समस्त भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाएँ औपचारिक रूप से रद्द कर दीं। तिरुवनंतपुरम-कासरगोड कॉरिडोर के लिए पूरे केरल में जारी अधिग्रहण नोटिस निरस्त करने की यह घोषणा पिछली वाम सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना पर एक निर्णायक उलटफेर है।

मुख्य घटनाक्रम

तिरुवनंतपुरम में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा, 'हमने इस परियोजना का शुरुआत से ही विरोध किया था। अब अधिग्रहण के लिए चिन्हित भूमि की अधिसूचना रद्द कर दी गई है।' यह निर्णय नई सरकार के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर लिया गया, जो यूडीएफ के चुनावी वादों की त्वरित पूर्ति का संकेत देता है।

सतीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के सर्वेक्षण के दौरान निजी संपत्तियों पर लगाए गए विवादित पीले सर्वे पत्थर भी हटाए जाएंगे — एक कदम जो प्रभावित भूस्वामियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस

सिल्वर लाइन विरोधी आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने घोषणा की कि उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे। इसके लिए सरकार न्यायालय में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी। गौरतलब है कि पिछली वाम सरकार के कार्यकाल में परियोजना के विरोध में उतरे सैकड़ों नागरिकों और कार्यकर्ताओं पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

पर्यावरण और विकास पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिल्वर लाइन परियोजना पर्यावरण के लिए एक संभावित आपदा थी और उनकी सरकार ऐसे विकास कार्यों की पक्षधर है जो लोगों और पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुँचाएं। उन्होंने संकेत दिया कि केरल में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी और केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच होगी।

अन्य कैबिनेट निर्णय

कैबिनेट ने केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) को यह सिफारिश करने का फैसला किया कि 31 अगस्त को समाप्त होने वाली सभी रैंक सूचियों को 30 नवंबर तक बढ़ाया जाए, जिससे हजारों नौकरी अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यूडीएफ के चुनावी घोषणापत्र को सभी विभागों में भेजकर सरकार की दीर्घकालिक 'विजन 2031' योजना के तहत क्रियान्वयन रोडमैप तैयार किया जाएगा। 100-दिवसीय कार्य योजना भी जल्द जारी की जाएगी, जिसमें तत्काल लागू किए जा सकने वाले वादों पर ध्यान केंद्रित होगा।

क्या होगा आगे

सरकार ने विभागीय आवंटन में देरी के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि शपथ ग्रहण की रात ही विभाग तय कर लिए गए थे और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को बुधवार को औपचारिक रूप से सौंप दिए गए। यह ऐसे समय में आया है जब नई सरकार अपने पहले सौ दिनों में त्वरित कार्रवाई से जनविश्वास अर्जित करने की कोशिश में है। सिल्वर लाइन परियोजना का औपचारिक समापन और प्रदर्शनकारियों पर मामले वापस लेने की प्रक्रिया अब न्यायालय में अगले चरण में प्रवेश करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल में बुनियादी ढाँचा राजनीति की उस शैली पर जनादेश है जो जन-सहमति से पहले ब्लूप्रिंट को तरजीह देती है। पिछली वाम सरकार ने ₹64,000 करोड़ से अधिक की इस परियोजना को राज्य के भविष्य के रूप में पेश किया था, लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों, विस्थापन के भय और वित्तीय पारदर्शिता की कमी ने इसे जन-आंदोलन का निशाना बना दिया। सतीशन के लिए असली परीक्षा यह है कि सिल्वर लाइन हटाने के बाद केरल की दीर्घकालिक परिवहन जरूरतों का विकल्प क्या होगा — क्योंकि राज्य की भौगोलिक चुनौतियाँ खत्म नहीं हुई हैं। 'विजन 2031' और 100-दिवसीय योजना के वादे तब तक खोखले रहेंगे जब तक उनमें मापने योग्य लक्ष्य और जवाबदेही तंत्र न हो।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिल्वर लाइन परियोजना क्या थी और इसे क्यों रद्द किया गया?
सिल्वर लाइन केरल की तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक प्रस्तावित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना थी, जिसे पिछली वाम सरकार ने राज्य की प्रमुख बुनियादी ढाँचा पहल के रूप में आगे बढ़ाया था। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इसे पर्यावरण के लिए संभावित आपदा बताते हुए 20 मई 2026 को सभी भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाएँ रद्द कर दीं।
सिल्वर लाइन विरोधी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों का क्या होगा?
सतीशन सरकार ने घोषणा की है कि परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे। इसके लिए सरकार न्यायालय में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।
पीले सर्वे पत्थर क्या हैं और इन्हें क्यों हटाया जाएगा?
सिल्वर लाइन परियोजना के सर्वेक्षण के दौरान पिछली सरकार ने केरल भर में निजी संपत्तियों पर पीले पत्थर गाड़े थे, जो संभावित भूमि अधिग्रहण का संकेत थे। इन पत्थरों ने व्यापक जन-विरोध को जन्म दिया था, और नई सरकार ने इन्हें हटाने की घोषणा की है।
KPSC रैंक सूचियों के विस्तार से किसे फायदा होगा?
कैबिनेट ने केरल लोक सेवा आयोग को सिफारिश की है कि 31 अगस्त को समाप्त होने वाली सभी रैंक सूचियाँ 30 नवंबर तक बढ़ाई जाएं। इससे उन हजारों नौकरी अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया लंबित है।
सतीशन सरकार की 'विजन 2031' और 100-दिवसीय योजना क्या है?
यूडीएफ के चुनावी घोषणापत्र को सभी विभागों में भेजकर 'विजन 2031' के तहत दीर्घकालिक क्रियान्वयन रोडमैप तैयार किया जाएगा। 100-दिवसीय कार्य योजना जल्द जारी होगी, जिसमें तत्काल लागू किए जा सकने वाले वादों को प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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