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एनआईडी अहमदाबाद की एर्गोनॉमिक पार्सल ट्रॉली: रेलवे स्टेशनों पर कुलियों का काम होगा आसान

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एनआईडी अहमदाबाद की एर्गोनॉमिक पार्सल ट्रॉली: रेलवे स्टेशनों पर कुलियों का काम होगा आसान

सारांश

अहमदाबाद के एनआईडी छात्रों ने भारतीय रेल के लिए एर्गोनॉमिक पार्सल ट्रॉली बनाई, जिसका कालूपुर स्टेशन पर सफल परीक्षण हो चुका है। कुलियों ने इसे सराहा। रेलवे-एनआईडी की 2035 तक की साझेदारी के तहत यह पहला व्यावहारिक नवाचार है।

मुख्य बातें

एनआईडी अहमदाबाद के रेलवे डिज़ाइन सेंटर के छात्रों ने भारतीय रेल के लिए विशेष एर्गोनॉमिक पार्सल ट्रॉली विकसित की।
ट्रॉली का कालूपुर रेलवे स्टेशन, अहमदाबाद पर सफल ट्रायल किया गया; कुलियों ने डिज़ाइन को सराहा।
भारतीय रेल और एनआईडी के बीच वर्ष 2035 तक की दीर्घकालिक सहयोग संधि के तहत यह नवाचार हुआ।
ट्रॉली एर्गोनॉमिक्स पर आधारित है — हल्की बनावट, कम शारीरिक श्रम, भीड़भाड़ में भी सुगम संचालन।
बॉडी पार्ट में रोलर जोड़ने सहित और सुधार जारी हैं; एक और ट्रायल के बाद व्यापक तैनाती की योजना।

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी), अहमदाबाद के रेलवे डिजाइन सेंटर के छात्रों ने भारतीय रेल के लिए एक विशेष एर्गोनॉमिक पार्सल ट्रॉली विकसित की है, जिसका अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह ट्रॉली प्लेटफॉर्म पर पार्सल की तेज़ और सुगम हैंडलिंग के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे कुलियों की मेहनत कम होगी और काम की गति बढ़ेगी।

रेलवे और एनआईडी की दीर्घकालिक साझेदारी

रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने और यात्री सुविधाओं को उन्नत करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने एनआईडी के साथ वर्ष 2035 तक की एक दीर्घकालिक सहयोग संधि की है। इसी साझेदारी के अंतर्गत एनआईडी के छात्रों ने कई नवाचार प्रयोग किए, जिनमें से यह पार्सल ट्रॉली एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) वेद प्रकाश के अनुसार, छात्रों ने पार्सल ढोने और ट्रॉली के संचालन को लेकर व्यापक प्रयोग किए, जिनमें से यह ट्रॉली सबसे सफल रही।

कालूपुर स्टेशन पर सफल परीक्षण

कालूपुर रेलवे स्टेशन पर किए गए पहले ट्रायल में कुलियों ने इस ट्रॉली को सहर्ष स्वीकार किया। एनआईडी के ट्रांसपोर्टेशन एंड ऑटोमोबाइल डिज़ाइन विभाग के प्रमुख नमित शर्मा ने बताया कि कुली वर्ग का सुझाव इस प्रक्रिया में बेहद अहम रहा। उन्होंने कहा, 'पार्सल ट्रॉली हल्की महसूस होती है — हमारी सोच यही थी कि हमें भारी वजन वाली ट्रॉली नहीं बनानी है।' कुलियों ने इसके डिज़ाइन को पसंद किया और इसे चलाना बेहद आसान बताया।

डिज़ाइन की खासियतें

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस ट्रॉली को एर्गोनॉमिक्स के सिद्धांतों पर आधारित किया गया है — यानी इसे पोर्टर्स की शारीरिक सहूलियत को केंद्र में रखकर बनाया गया है। इससे कुलियों को कम शारीरिक श्रम करना पड़ेगा, साथ ही भीड़-भाड़ वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे सुगमता से संचालित किया जा सकेगा। ट्रॉली की हल्की बनावट इसे पारंपरिक भारी ट्रॉलियों से अलग बनाती है।

अगले चरण में और सुधार

पहले ट्रायल के बाद इस ट्रॉली में कुछ और बदलाव किए जा रहे हैं। डीआरएम वेद प्रकाश ने बताया कि अभी और नवाचार की ज़रूरत है — जैसे कि ट्रॉली के बॉडी पार्ट में रोलर लगाना और यह सुनिश्चित करना कि इसके ज़रिए पार्सल को ट्रेन में तेज़ी से लोड किया जा सके। एक और ट्रायल बाकी है, जिसके बाद जहाँ भी ज़रूरत होगी, इस ट्रॉली का इस्तेमाल शुरू किया जाएगा।

आम जनता और कुलियों पर असर

यह ट्रॉली उन हज़ारों कुलियों के लिए राहत की खबर है जो प्रतिदिन भारी पार्सल ढोने के कारण शारीरिक थकान का सामना करते हैं। गौरतलब है कि भारतीय रेल प्रतिदिन लाखों पार्सल का परिवहन करती है और प्लेटफॉर्म पर तेज़ हैंडलिंग से ट्रेन की समयपालन में भी सुधार हो सकता है। यह पहल रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का एक व्यावहारिक उदाहरण है जो ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने की कोशिश करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बॉडी में रोलर जैसे बुनियादी सुधार अभी भी लंबित हैं। यह सवाल भी उठता है कि 2035 तक की इस साझेदारी में कितने और ऐसे नवाचार व्यावहारिक उपयोग तक पहुँचेंगे और कितने प्रयोगशाला तक ही सिमटे रहेंगे।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईडी अहमदाबाद की पार्सल ट्रॉली क्या है?
यह राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी), अहमदाबाद के रेलवे डिज़ाइन सेंटर के छात्रों द्वारा विकसित एक एर्गोनॉमिक ट्रॉली है, जो रेलवे प्लेटफॉर्म पर पार्सल की हैंडलिंग को तेज़ और आसान बनाने के लिए बनाई गई है। इसे कुलियों की शारीरिक सहूलियत को ध्यान में रखकर हल्का और सुगम डिज़ाइन किया गया है।
इस ट्रॉली का ट्रायल कहाँ और कब हुआ?
इस पार्सल ट्रॉली का ट्रायल अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर किया गया है। ट्रायल सफल रहा और कुलियों ने इसके डिज़ाइन को पसंद किया। एक और ट्रायल अभी बाकी है।
रेलवे और एनआईडी की साझेदारी क्या है?
भारतीय रेल ने एनआईडी के साथ वर्ष 2035 तक की दीर्घकालिक सहयोग संधि की है, जिसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक रूप देना और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाना है। इसी के तहत पार्सल ट्रॉली सहित कई नवाचार विकसित किए जा रहे हैं।
यह ट्रॉली कब से स्टेशनों पर उपलब्ध होगी?
डीआरएम वेद प्रकाश के अनुसार पहले ट्रायल के बाद ट्रॉली में कुछ सुधार किए जा रहे हैं, जैसे बॉडी पार्ट में रोलर लगाना। एक और ट्रायल के बाद जहाँ भी ज़रूरत होगी, इसे तैनात किया जाएगा, हालाँकि अभी कोई निश्चित तिथि नहीं दी गई है।
इस ट्रॉली से कुलियों को क्या फायदा होगा?
एर्गोनॉमिक डिज़ाइन के कारण कुलियों को भारी पार्सल ढोने में कम शारीरिक मेहनत करनी पड़ेगी और काम की गति बढ़ेगी। भीड़-भाड़ वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे आसानी से चलाया जा सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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