बीपीसीएल का रूसी कच्चे तेल में हिस्सेदारी 41% तक पहुँची, मध्य पूर्व तनाव के बीच आपूर्ति जुलाई 2026 तक सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। कंपनी के डायरेक्टर फाइनेंस वीआरके गुप्ता ने बुधवार, 20 मई को बताया कि अभी कंपनी के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत हो गई है। यह आँकड़ा वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के 31 प्रतिशत और तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के 25 प्रतिशत की तुलना में तेज़ उछाल दर्शाता है।
मुख्य घटनाक्रम
वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के नतीजों के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में गुप्ता ने कहा, 'हमने इस वर्ष आठ नए ग्रेड के कच्चे तेल में विविधता लाई है, जो चार भौगोलिक क्षेत्रों को कवर करती है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 तक कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली गई है, जिससे निकट भविष्य में आपूर्ति व्यवधान की आशंका कम है।
विविध स्रोतों पर जोर
बीपीसीएल रूस के अलावा अमेरिका और वेनेजुएला से भी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है। गुप्ता के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव के चलते कंपनी ने विविध स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई एकल बिंदु विफलता न हो। यह नीति ऐसे समय में आई है जब भारत की अधिकांश सरकारी तेल कंपनियाँ अपने आयात बास्केट में विविधता लाने पर जोर दे रही हैं।
वित्तीय प्रदर्शन
बीपीसीएल ने मंगलवार, 19 मई को वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही के नतीजे जारी किए। मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 28 प्रतिशत बढ़कर ₹5,624.54 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹4,391.83 करोड़ था। हालाँकि, क्रमिक आधार पर मुनाफे में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है — वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में यह ₹7,188.40 करोड़ था।
पूंजीगत खर्च का लक्ष्य
कंपनी ने वित्त वर्ष 27 के लिए ₹25,000 करोड़ के पूंजीगत खर्च का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो वित्त वर्ष 26 के ₹20,400 करोड़ के वास्तविक खर्च से काफी अधिक है। यह विस्तार योजना कंपनी की दीर्घकालिक रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और मध्य पूर्व में किसी भी व्यवधान का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। बीपीसीएल की रणनीतिक विविधीकरण नीति — जिसमें रूसी तेल की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ाना शामिल है — इस जोखिम को कम करने का प्रयास है। आने वाले महीनों में कंपनी के आयात बास्केट की संरचना और मध्य पूर्व की स्थिति दोनों पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।