रूस से तेल खरीद जारी रहेगी, छूट हो या नहीं — पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट संदेश

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रूस से तेल खरीद जारी रहेगी, छूट हो या नहीं — पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट संदेश

सारांश

अमेरिकी छूट खत्म होने के बावजूद भारत ने साफ कर दिया — रूस से तेल खरीद जारी रहेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का यह बयान ऊर्जा संप्रभुता की दिशा में एक निर्णायक संकेत है, जब मई में रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 19 लाख बैरल प्रतिदिन के करीब पहुँचने का अनुमान है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 18 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत रूस से तेल खरीद जारी रखेगा।
अमेरिकी ट्रेजरी की अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो गई; भारत ने इसे अपनी नीति पर असरहीन बताया।
डेटा फर्म क्लेपर के अनुसार मई में रूसी तेल आयात करीब रिकॉर्ड 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है; रूसी तेल से घरेलू रिफाइनरियों को राहत मिली है।
विश्लेषकों के अनुसार खरीद में बड़ा बदलाव संभव नहीं, हालाँकि दस्तावेज़ी जाँच कड़ी हो सकती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 18 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों या छूट की स्थिति से बेपरवाह होकर रूस से कच्चा तेल खरीदता रहेगा — क्योंकि यह निर्णय पूरी तरह व्यावसायिक आवश्यकताओं और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। रूसी कच्चे तेल की समुद्री आपूर्ति पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो जाने के ठीक बाद यह बयान आया है।

मंत्रालय का स्पष्ट रुख

मीडिया ब्रीफिंग में सुजाता शर्मा ने कहा, 'मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूँ कि हम पहले भी रूस से तेल खरीद रहे थे — छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक समझ और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्धता पर आधारित होते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और दीर्घकालिक समझौतों के ज़रिए आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। उनके अनुसार, छूट हो या न हो, भारत के नीतिगत फैसले पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिकी छूट का पृष्ठभूमि

यह अस्थायी छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मार्च के मध्य में जारी की थी और अप्रैल में इसे बढ़ाया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव कम करना और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करना था। गौरतलब है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है।

हाल के महीनों में अमेरिका ने रूस की कुछ कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिससे पिछले साल कुछ समय के लिए भारत की खरीद में कमी आई थी। लेकिन छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने खरीद फिर से बढ़ा दी।

आयात के आँकड़े

दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक भारत, कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूसी तेल खरीद में तेज़ी से वृद्धि कर चुका है। डेटा फर्म क्लेपर के अनुमान के अनुसार, मई में भारत का रूसी तेल आयात करीब रिकॉर्ड स्तर 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने की संभावना है।

इस खरीद से घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव को संभालने में मदद मिली है और वैश्विक बाज़ार में माँग का दबाव भी कुछ हद तक कम हुआ है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में भारत के रूस से तेल खरीद बंद करने की संभावना बेहद कम है। हालाँकि, आलोचकों का मानना है कि अब खरीद प्रक्रिया में अधिक दस्तावेज़ी जाँच और कड़ी निगरानी देखने को मिल सकती है, लेकिन तेल खरीद के स्रोतों में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ जारी हैं और ऊर्जा कूटनीति दोनों देशों के संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में भारतीय रिफाइनरियों की खरीद रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इस नीति की असली परीक्षा होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत दीर्घकालिक रूप से इस रणनीति की कीमत चुका सकता है — खासकर जब अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएँ एक नाज़ुक मोड़ पर हैं। 19 लाख बैरल प्रतिदिन का आयात आँकड़ा बताता है कि भारत की रिफाइनरियाँ रूसी तेल पर संरचनात्मक रूप से निर्भर हो चुकी हैं — यह महज़ 'व्यावसायिक निर्णय' से आगे की बात है। आलोचकों का यह भी तर्क है कि छूट-आधारित खरीद की अनिश्चितता ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में एक कमज़ोर कड़ी उजागर की है, जिसे विविधीकरण से ही दूर किया जा सकता है। बिना वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ठोस योजना के, यह 'ऊर्जा सुरक्षा' का दावा एकतरफा निर्भरता में बदलने का जोखिम रखता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत रूस से तेल क्यों खरीदता रहेगा, भले ही अमेरिकी छूट खत्म हो गई हो?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत की खरीद व्यावसायिक आवश्यकताओं और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, न कि किसी अन्य देश की नीति पर। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि छूट से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी खरीद जारी रही है।
अमेरिकी ट्रेजरी की रूसी तेल छूट क्या थी और यह कब खत्म हुई?
यह छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मार्च 2026 के मध्य में जारी की थी और अप्रैल में बढ़ाई गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव कम करना था और यह 16 मई 2026 को समाप्त हो गई।
मई 2026 में भारत का रूसी तेल आयात कितना है?
डेटा फर्म क्लेपर के अनुसार, मई 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात करीब रिकॉर्ड स्तर 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। यह भारत की रूसी तेल पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।
क्या भविष्य में भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में ऐसा होने की संभावना बेहद कम है। हालाँकि खरीद प्रक्रिया में अधिक दस्तावेज़ी जाँच और निगरानी बढ़ सकती है, लेकिन आपूर्ति स्रोतों में कोई बड़ा बदलाव अपेक्षित नहीं है।
रूसी तेल खरीद से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा हुआ है?
रूस से कम कीमत पर तेल खरीदने से घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के बावजूद भारत की आयात लागत नियंत्रण में रही है।
राष्ट्र प्रेस
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