रूस से तेल खरीद जारी रहेगी, छूट हो या नहीं — पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट संदेश
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 18 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों या छूट की स्थिति से बेपरवाह होकर रूस से कच्चा तेल खरीदता रहेगा — क्योंकि यह निर्णय पूरी तरह व्यावसायिक आवश्यकताओं और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। रूसी कच्चे तेल की समुद्री आपूर्ति पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो जाने के ठीक बाद यह बयान आया है।
मंत्रालय का स्पष्ट रुख
मीडिया ब्रीफिंग में सुजाता शर्मा ने कहा, 'मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूँ कि हम पहले भी रूस से तेल खरीद रहे थे — छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक समझ और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्धता पर आधारित होते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और दीर्घकालिक समझौतों के ज़रिए आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। उनके अनुसार, छूट हो या न हो, भारत के नीतिगत फैसले पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी छूट का पृष्ठभूमि
यह अस्थायी छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मार्च के मध्य में जारी की थी और अप्रैल में इसे बढ़ाया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव कम करना और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करना था। गौरतलब है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है।
हाल के महीनों में अमेरिका ने रूस की कुछ कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिससे पिछले साल कुछ समय के लिए भारत की खरीद में कमी आई थी। लेकिन छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने खरीद फिर से बढ़ा दी।
आयात के आँकड़े
दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक भारत, कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूसी तेल खरीद में तेज़ी से वृद्धि कर चुका है। डेटा फर्म क्लेपर के अनुमान के अनुसार, मई में भारत का रूसी तेल आयात करीब रिकॉर्ड स्तर 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने की संभावना है।
इस खरीद से घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव को संभालने में मदद मिली है और वैश्विक बाज़ार में माँग का दबाव भी कुछ हद तक कम हुआ है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में भारत के रूस से तेल खरीद बंद करने की संभावना बेहद कम है। हालाँकि, आलोचकों का मानना है कि अब खरीद प्रक्रिया में अधिक दस्तावेज़ी जाँच और कड़ी निगरानी देखने को मिल सकती है, लेकिन तेल खरीद के स्रोतों में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ जारी हैं और ऊर्जा कूटनीति दोनों देशों के संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में भारतीय रिफाइनरियों की खरीद रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इस नीति की असली परीक्षा होंगी।