ट्विशा शर्मा मौत मामला: पुलिस ने माना सबूत जमा करने में हुई चूक, फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई की रात अपने ससुराल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला गहराता जा रहा है। पीड़िता के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दीर्घकालिक मानसिक व शारीरिक शोषण, दहेज उत्पीड़न और जाँच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। 14 मई को दर्ज एफआईआर के बाद अब सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रजनीश कश्यप ने स्वीकार किया है कि घटनास्थल पर बरामद अहम सबूत को पोस्टमार्टम के दौरान समय पर जमा नहीं किया गया — और इस प्रक्रियागत चूक की अलग से जाँच की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
ट्विशा शर्मा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में मृत पाई गईं। परिजनों का आरोप है कि उन्हें पहले फंदे से उतारकर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें 'मृत अवस्था में लाया गया' घोषित किया गया — और इस दौरान पुलिस को घटनास्थल पर नहीं बुलाया गया। 14 मई को पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध दहेज मृत्यु और दहेज उत्पीड़न से संबंधित धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई।
सबूत में चूक — पुलिस का स्वीकारोक्ति
एसीपी रजनीश कश्यप ने पुष्टि की कि फाँसी में इस्तेमाल की गई रस्सी को घटना वाले दिन ही घटनास्थल से जब्त कर लिया गया था। हालाँकि, जाँच अधिकारी इसे पोस्टमार्टम जाँच के दौरान समय पर जमा करने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा, 'हम फिलहाल इस चूक की जाँच कर रहे हैं, और इससे सामने आने वाली जानकारी के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।' इसके बाद वह सामग्री फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को सौंपी गई और अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल में जमा है।
फोरेंसिक विलंब पर सवाल
पीड़िता के परिवार ने तर्क दिया है कि घटना के चार से पाँच दिन बाद फोरेंसिक जाँच होने से सबूत की प्रामाणिकता संदिग्ध हो सकती है — और इस अंतराल में उसमें बदलाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एसीपी कश्यप ने कहा कि विस्तृत जाँच में इन सभी संभावनाओं का समाधान किया जाएगा, और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
घटनास्थल प्रक्रिया और सीसीटीवी जाँच
एसीपी ने बताया कि ट्विशा के ससुराल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और पुलिस उनसे फुटेज हासिल करने की प्रक्रिया में है। शव को पहले अस्पताल ले जाने और पुलिस को बाद में सूचित करने की परिस्थितियों की भी जाँच चल रही है। उन्होंने कहा, 'चूँकि मामला अभी जाँच के अधीन है, इसलिए हम किसी निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुँचे हैं — लेकिन हर पहलू की गहन पड़ताल होगी।'
सह-आरोपी का दावा और पुलिस का रुख
सह-आरोपी गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर दावा किया है कि ट्विशा नशे की आदी थीं और खुराक न मिलने पर उनका शरीर काँपने लगता था। एसीपी कश्यप ने स्पष्ट किया कि अब तक इस दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत या जानकारी नहीं मिली है, और यदि यह आरोप सामने आता है तो इसकी भी जाँच की जाएगी। परिवार के आरोपों के बावजूद, 18 मई तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
आगे क्या होगा
एम्स भोपाल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। पुलिस की प्रक्रियागत चूक की आंतरिक जाँच के नतीजे और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण भी अगले कुछ दिनों में सामने आने की उम्मीद है। यह मामला दहेज उत्पीड़न के विरुद्ध कानूनी तंत्र की प्रभावशीलता और जाँच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।