भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत मामला: SIT जांच शुरू, अग्रिम जमानत खारिज, परिवार ने लगाया लीपापोती का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में 33 वर्षीया ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राज्य की न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोपों के बीच भोपाल पुलिस ने एसीपी रजनीश कश्यप के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जबकि मृतका के परिवार ने जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच की माँग की है।
मामले की पृष्ठभूमि
नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा पहले अभिनेत्री और मॉडल के रूप में काम कर चुकी थीं और बाद में दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं। उनका विवाह 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुआ था। शादी के लगभग छह महीने बाद भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उनकी मौत हो गई।
बचाव पक्ष का दावा है कि उस रात ट्विशा पहले ब्यूटी पार्लर गई थीं, फिर टहलने निकलीं और घर लौटने पर परिवार ने उन्हें छत पर लोहे की रॉड से एक्सरसाइज बैंड के सहारे लटका हुआ पाया। हालाँकि, मृतका के परिजनों ने इस दावे को पूरी तरह नकारते हुए कहा है कि ट्विशा को दहेज के लिए लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
अदालत का फैसला और आरोपी की फरारी
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने सोमवार को समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि विवाह के छह महीने के भीतर 'असामान्य परिस्थितियों' में हुई मौत और आरोपी के विरुद्ध गंभीर आरोपों को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि गवाहों के बयान, एफआईआर और व्हाट्सऐप चैट मुख्य रूप से समर्थ सिंह की ओर इशारा करते हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से समर्थ सिंह फरार है। उसके मोबाइल फोन बंद हैं और कई पुलिस टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। भोपाल पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में सहयोग करने वालों के लिए ₹10,000 के इनाम की घोषणा की है।
इस मामले में समर्थ सिंह और उनकी माँ, भोपाल जिला अदालत की सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा वर्तमान में भोपाल उपभोक्ता अदालत की प्रमुख गिरिबाला सिंह, दोनों के विरुद्ध दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज है। गिरिबाला सिंह को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
परिवार के गंभीर आरोप और राज्यपाल से अपील
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा का आरोप है कि आरोपी परिवार के न्यायपालिका, पुलिस और चिकित्सा प्रशासन में संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज कराने में भी परिवार को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा।
नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग करते हुए अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके पद से निलंबित किया जाए। उनकी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की गई है।
व्हाट्सऐप संदेश और पोस्टमार्टम विवाद
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुछ व्हाट्सऐप संदेशों का हवाला दिया, जो कथित तौर पर ट्विशा ने मृत्यु से कुछ दिन पहले अपनी माँ को भेजे थे। 9 मई के एक संदेश में उन्होंने लिखा था — 'मां, आप मुझे यहां से लेने आ जाओ कल प्लीज।' एक अन्य संदेश में उन्होंने अपनी जिंदगी को नरक बताया और पति के उनसे बात न करने का उल्लेख किया। बचाव पक्ष ने इन संदेशों को अविश्वसनीय बताते हुए छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।
कोर्ट रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि आरोपियों ने कथित तौर पर ट्विशा के गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता पर सवाल उठाए, उन पर गर्भपात का दबाव बनाया और कई बार मारपीट की।
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फाँसी बताया गया है, लेकिन रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान होने का भी उल्लेख है। ट्विशा के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है और एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की माँग की है, यह कहते हुए कि स्थानीय प्रशासन निष्पक्ष जांच में सक्षम नहीं है।
आगे क्या होगा
SIT अब दहेज प्रताड़ना, मारपीट और साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों की विस्तृत जांच करेगी। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी और दोबारा पोस्टमार्टम की माँग पर अदालत का अगला निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में दहेज संबंधी अपराधों और न्यायिक प्रभाव के आरोपों पर बहस फिर से तेज हो गई है।