ट्विशा शर्मा मृत्यु मामला: पिता ने MP राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, सास को पद से हटाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में 12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई 23 वर्षीया ट्विशा शर्मा के मामले ने एक नया और महत्त्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने 18 मई को मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल को एक तत्काल ज्ञापन सौंपा, जिसमें मामले की आरोपी और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को उनके अर्ध-न्यायिक पद से तत्काल हटाने की अपील की गई है।
मामले का मुख्य घटनाक्रम
9 दिसंबर 2025 को विवाह के बाद से ट्विशा पर कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक क्रूरता और शारीरिक यातना का सिलसिला जारी रहा। 12 मई को वह कटारा हिल्स स्थित सास के आवास पर फाँसी के फंदे से लटकी मिली। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फाँसी लगाना बताया गया है, किंतु रिपोर्ट में शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी स्पष्ट उल्लेख है।
15 मई को कटारा हिल्स पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई, जिसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 80(2), 85 और 3(5) तथा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धाराओं 3 और 4 के अंतर्गत दर्ज किया गया है।
राज्यपाल को ज्ञापन क्यों
परिवार की मुख्य आशंका यह है कि आरोपी गिरिबाला सिंह राज्य की पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में एक प्रमुख अर्ध-न्यायिक भूमिका में कार्यरत हैं। नवनिधि शर्मा का तर्क है कि इस प्रभावशाली पद पर उनकी निरंतर उपस्थिति स्थानीय कानून प्रवर्तन, गवाहों की गवाही और चिकित्सा-कानूनी फोरेंसिक प्रक्रियाओं पर अप्रत्यक्ष संस्थागत दबाव डाल सकती है।
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए पारदर्शी और स्वतंत्र जाँच को मौलिक अधिकार बताया गया है। परिवार ने माँग की है कि आपराधिक जाँच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके न्यायिक कर्तव्यों से अस्थायी रूप से निलंबित किया जाए।
परिवार का पक्ष
नवनिधि शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, परंतु संस्थागत पूर्वाग्रह की किसी भी संभावना को समाप्त करना न्याय की निष्पक्षता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने राज्यपाल से अपील की है कि वे तत्काल प्रशासनिक समीक्षा सुनिश्चित करें ताकि जाँच किसी भी प्रकार के अधिकार या प्रभाव से मुक्त रहे।
आगे क्या होगा
राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस जाँच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट की अंतिम पुष्टि का इंतजार है। गौरतलब है कि यह मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब आरोपी स्वयं न्यायिक तंत्र का हिस्सा हों — ऐसे में जाँच की निष्पक्षता पर जनता की नज़र बनी रहेगी।