ट्विशा शर्मा मृत्यु मामला: पिता ने MP राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, सास को पद से हटाने की माँग

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ट्विशा शर्मा मृत्यु मामला: पिता ने MP राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, सास को पद से हटाने की माँग

सारांश

भोपाल में 23 वर्षीया ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब संस्थागत जवाबदेही पर आ टिका है। पिता ने राज्यपाल से माँग की है कि आरोपी सास — जो खुद एक अर्ध-न्यायिक अधिकारी हैं — को जाँच पूरी होने तक पद से हटाया जाए।

मुख्य बातें

23 वर्षीया ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फाँसी के फंदे से लटकी मिली थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फाँसी बताया गया, साथ ही शरीर पर कई अन्य चोटों का भी उल्लेख है।
15 मई को पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध BNS धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 व 4 के तहत FIR दर्ज।
पिता नवनिधि शर्मा ने 18 मई को MP राज्यपाल मंगूभाई पटेल को ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह को MP राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पद से अस्थायी निलंबन की माँग की।
परिवार ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष जाँच को मौलिक अधिकार बताया।

भोपाल में 12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई 23 वर्षीया ट्विशा शर्मा के मामले ने एक नया और महत्त्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने 18 मई को मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल को एक तत्काल ज्ञापन सौंपा, जिसमें मामले की आरोपी और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को उनके अर्ध-न्यायिक पद से तत्काल हटाने की अपील की गई है।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

9 दिसंबर 2025 को विवाह के बाद से ट्विशा पर कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक क्रूरता और शारीरिक यातना का सिलसिला जारी रहा। 12 मई को वह कटारा हिल्स स्थित सास के आवास पर फाँसी के फंदे से लटकी मिली। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फाँसी लगाना बताया गया है, किंतु रिपोर्ट में शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी स्पष्ट उल्लेख है।

15 मई को कटारा हिल्स पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई, जिसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 80(2), 85 और 3(5) तथा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धाराओं 3 और 4 के अंतर्गत दर्ज किया गया है।

राज्यपाल को ज्ञापन क्यों

परिवार की मुख्य आशंका यह है कि आरोपी गिरिबाला सिंह राज्य की पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में एक प्रमुख अर्ध-न्यायिक भूमिका में कार्यरत हैं। नवनिधि शर्मा का तर्क है कि इस प्रभावशाली पद पर उनकी निरंतर उपस्थिति स्थानीय कानून प्रवर्तन, गवाहों की गवाही और चिकित्सा-कानूनी फोरेंसिक प्रक्रियाओं पर अप्रत्यक्ष संस्थागत दबाव डाल सकती है।

ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए पारदर्शी और स्वतंत्र जाँच को मौलिक अधिकार बताया गया है। परिवार ने माँग की है कि आपराधिक जाँच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके न्यायिक कर्तव्यों से अस्थायी रूप से निलंबित किया जाए।

परिवार का पक्ष

नवनिधि शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, परंतु संस्थागत पूर्वाग्रह की किसी भी संभावना को समाप्त करना न्याय की निष्पक्षता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने राज्यपाल से अपील की है कि वे तत्काल प्रशासनिक समीक्षा सुनिश्चित करें ताकि जाँच किसी भी प्रकार के अधिकार या प्रभाव से मुक्त रहे।

आगे क्या होगा

राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस जाँच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट की अंतिम पुष्टि का इंतजार है। गौरतलब है कि यह मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब आरोपी स्वयं न्यायिक तंत्र का हिस्सा हों — ऐसे में जाँच की निष्पक्षता पर जनता की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जाँच की निष्पक्षता केवल प्रक्रियागत नहीं, बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी बन जाती है। राज्यपाल कार्यालय की चुप्पी और पुलिस की FIR दर्ज करने में तीन दिन की देरी — मृत्यु 12 मई, FIR 15 मई — पहले से ही सवाल खड़े कर चुकी है। यदि प्रशासन ने त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला संस्थागत संरक्षण की उस पुरानी प्रवृत्ति की पुनरावृत्ति बन सकता है जो न्याय को शक्ति के सामने झुका देती है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा की मृत्यु कैसे हुई?
ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपनी सास गिरिबाला सिंह के घर में फाँसी के फंदे से लटकी मिलीं। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फाँसी बताया गया है, लेकिन रिपोर्ट में शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी उल्लेख किया गया है।
इस मामले में किन-किन पर FIR दर्ज हुई है?
15 मई 2026 को कटारा हिल्स पुलिस थाने में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध FIR दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 80(2), 85 और 3(5) तथा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धाराओं 3 और 4 के तहत दर्ज है।
परिवार ने राज्यपाल को ज्ञापन क्यों सौंपा?
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की आशंका है कि आरोपी सास गिरिबाला सिंह, जो MP राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अर्ध-न्यायिक भूमिका में हैं, अपने प्रभावशाली पद के जरिये जाँच, गवाहों और फोरेंसिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसीलिए उन्होंने राज्यपाल से गिरिबाला सिंह को जाँच पूरी होने तक पद से अस्थायी रूप से हटाने की माँग की है।
गिरिबाला सिंह का पद क्या है और वे आरोपी कैसे हैं?
गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश की पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं और वर्तमान में MP राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में प्रमुख अर्ध-न्यायिक भूमिका में कार्यरत हैं। ट्विशा की मृत्यु उन्हीं के घर में हुई और पुलिस ने उन्हें उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ मुख्य आरोपी बनाया है।
ट्विशा की शादी कब हुई थी और उत्पीड़न के आरोप क्या हैं?
ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शादी के बाद से ही उन पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक क्रूरता और शारीरिक यातना का सिलसिला जारी रहा, जिसका उल्लेख FIR में किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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