ओडिशा सीएम मोहन चरण मांझी ने बालिअंटा मॉब लिंचिंग पर जताया दुख, डीजीपी को कड़ी कार्रवाई के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने गुरुवार, 7 मई को भुवनेश्वर के बाहरी इलाके बालिअंटा में एक युवक को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले जाने की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और पुलिस को दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मृतक की पहचान सौम्या रंजन स्वैन के रूप में हुई है, जो ओडिशा सरकार रेलवे पुलिस (जीआरपी) का जवान था।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और निर्देश
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मांझी ने ओडिशा पुलिस के महानिदेशक वाईबी खुरानिया से सीधे बात की और उन्हें मामले की गहन जांच सुनिश्चित करने तथा सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने की हिदायत दी ताकि भविष्य में भीड़ द्वारा इस तरह की हत्या की घटनाएं दोबारा न हों।
मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने अब तक इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।
महिला आयोग की भूमिका
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि मांझी ने ओडिशा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सोवाना मोहंती से भी इस घटना पर चर्चा की। अध्यक्ष मोहंती शुक्रवार को बालिअंटा का दौरा कर उन महिलाओं से बात कर सकती हैं जिन्होंने मृतक सौम्या रंजन स्वैन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उनका उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सच्चाई का पता लगाना है।
घटनाक्रम: क्या हुआ बालिअंटा में
पुलिस के अनुसार, मृतक सौम्या रंजन स्वैन अपने मित्र ओम प्रकाश राउत के साथ भुवनेश्वर की ओर जा रहा था। इसी दौरान बालिअंटा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत रामचंद्रपुर पुल के पास उनकी मोटरसाइकिल ने स्कूटर पर सवार दो लड़कियों को ओवरटेक करते हुए टक्कर मार दी, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
कथित तौर पर जब स्वैन ने लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया, तो उनकी चीखें सुनकर स्थानीय ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने स्वैन को रस्सियों से बांधकर बेरहमी से पीटा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने सौम्या रंजन स्वैन को मृत घोषित कर दिया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पूरे देश में बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि इस मामले में मृतक एक सरकारी कर्मचारी था, जो इस घटना को और अधिक संवेदनशील बनाता है। जांच एजेंसियों पर अब दबाव है कि वे न केवल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में भीड़ न्याय की ऐसी घटनाएं न हों। महिला आयोग की जांच से मामले के अन्य पहलू भी सामने आने की उम्मीद है।