क्या धर्मशाला में कॉलेज छात्रा की मौत मामले में आरोपी प्रोफेसर का बचाव करना उचित है?

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क्या धर्मशाला में कॉलेज छात्रा की मौत मामले में आरोपी प्रोफेसर का बचाव करना उचित है?

सारांश

धर्मशाला में एक कॉलेज छात्रा की दुखद मौत ने शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला रैगिंग और यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। क्या यह घटना हमें शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा के प्रति जागरूक करती है?

Key Takeaways

  • धर्मशाला में छात्रा की मौत ने सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया।
  • रैगिंग और यौन उत्पीड़न के मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी है।
  • पुलिस और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।
  • बिना कार्रवाई के ऐसे मामलों में समाज को भी जागरूक रहना होगा।
  • छात्राओं की सुरक्षा के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

धर्मशाला, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी कॉलेज में कथित रैगिंग और यौन उत्पीड़न से मानसिक रूप से परेशान 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

छात्रा के पिता विक्रम कुमार के बयान के आधार पर पुलिस ने तीन छात्राओं और एक कॉलेज प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

विक्रम कुमार ने कॉलेज प्रशासन, पुलिस और समाज की सोच पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में छात्रा के साथ न केवल सीनियर छात्राओं ने दुर्व्यवहार किया, बल्कि एक प्रोफेसर ने भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे जाने और लगातार टॉर्चर का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी इस मानसिक यातना को सह नहीं सकी। यदि प्रारंभिक चरण में पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती, तो संभवतः उनकी बेटी जीवित होती।

उधर, एबीवीपी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। एबीवीपी की प्रांत मंत्री नैंसी अटल ने कहा कि इस पूरे मामले में वो पीड़ित परिवार के साथ हैं। पुलिस और कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि समय रहते यदि इनकी ओर से इस घटना पर संज्ञान लिया गया होता तो शायद आज ऐसा दृश्य देखने को न मिलता। उन्होंने पुलिस पर भी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया और कहा कि आपराधिक घटना के दौरान समय पर कार्रवाई नहीं करते, जिससे छात्रों को परेशानी होती है।

हालांकि कॉलेज के अन्य प्रोफेसरों ने आरोपी प्रोफेसर का पक्ष लेते हुए आरोपों को निराधार बताया है। कॉलेज के प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने संवेदना जताते हुए कहा कि छात्रा पूर्व में कॉलेज की छात्रा रही है, लेकिन इस सत्र में उसका नामांकन नहीं हुआ था। छात्रा शैक्षणिक रूप से अयोग्य पाई गई थी और यूनिवर्सिटी नियमों के तहत उसे आगे की कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जा सकता था। कॉलेज में रैगिंग को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति है और कोई औपचारिक शिकायत कॉलेज को प्राप्त नहीं हुई।

एएसपी वीर बहादुर ने बताया कि यह प्रकरण पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक भी पहुंचा था। पुलिस का कहना है कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, पीड़ित परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन उस समय छात्रा इलाज के लिए बाहर थी। छात्रा की मौत के बाद अब पूरे मामले की विधिवत जांच शुरू कर दी गई है।

Point of View

और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को गंभीरता से विचार करना होगा। यह मामला केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है।
NationPress
03/01/2026

Frequently Asked Questions

छात्रा की मौत कैसे हुई?
छात्रा की मौत रैगिंग और यौन उत्पीड़न के कारण मानसिक तनाव के चलते इलाज के दौरान हुई।
क्या कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में कोई कार्रवाई की?
कॉलेज प्रशासन ने इसकी गंभीरता नहीं समझी और कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली।
पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने छात्रा के पिता के बयान पर तीन छात्राओं और एक प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
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