शिवराज सिंह चौहान और कई नेताओं ने लिया संकल्प: एक साल तक नहीं खरीदेंगे सोना, अधिकारी भी साथ

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शिवराज सिंह चौहान और कई नेताओं ने लिया संकल्प: एक साल तक नहीं खरीदेंगे सोना, अधिकारी भी साथ

सारांश

PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील के बाद BJP नेताओं और अधिकारियों ने एक साल तक सोना न खरीदने का संकल्प लिया। शिवराज सिंह चौहान ने 'खेत बचाओ अभियान' का भी ऐलान किया। नेता ई-रिक्शा, EV और मेट्रो से चल रहे हैं — प्रतीकात्मक कदम, लेकिन आर्थिक संदेश स्पष्ट है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वरिष्ठ अधिकारियों ने 18 मई को एक वर्ष तक सोना न खरीदने का संकल्प लिया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इलेक्ट्रिक वाहन अपनाया; केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ई-रिक्शा से चल रही हैं।
'खेत बचाओ अभियान' के तहत वैज्ञानिक गाँव-गाँव जाकर मिट्टी के अनुसार खाद उपयोग पर जागरूकता फैलाएंगे।
पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने चेताया — सोने का अधिक आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है और रुपये को कमज़ोर कर सकता है।
राज्यसभा सदस्य राधा मोहन अग्रवाल ने कहा — राष्ट्रीय संकट के समय ऐसी अपीलें पहले भी होती रही हैं।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर समेत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने 18 मई को ऊर्जा बचत और सोने की खरीद में कटौती का सार्वजनिक संकल्प लिया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से आत्मनिर्भरता और ऊर्जा संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया था। इन नेताओं के साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक वर्ष तक सोना न खरीदने का फैसला किया है।

नेताओं ने क्या संकल्प लिया

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया है, और देश का हर वर्ग इसे गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा, 'आज हमने अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी अधिकारियों ने फैसला किया है कि खास परिस्थितियों को छोड़कर वे एक साल तक सोना नहीं खरीदेंगे।'

चौहान ने यह भी बताया कि बैठक में प्राकृतिक खेती और खाद के संतुलित उपयोग का संकल्प भी लिया गया। इसके तहत 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक गाँव-गाँव जाकर मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद उपयोग पर जागरूकता फैलाएंगे।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि वे स्वयं अब इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का उपयोग कर रहे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि वे ई-रिक्शा से चलना शुरू कर चुकी हैं और अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या भी घटा दी है।

दिल्ली सरकार में मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि वे बस और मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं तथा दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

सोना कम खरीदना क्यों जरूरी — आर्थिक तर्क

पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने सोने की खरीद घटाने के पीछे का आर्थिक तर्क स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत में सोने का उत्पादन बेहद सीमित है और अधिकांश आयात विदेशी मुद्रा में होता है। उनके अनुसार, यदि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा तो डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों में ईंधन दोगुने-तिगुने दाम पर मिल रहा है, जबकि भारत में अभी कोई कमी नहीं है।

ऐतिहासिक संदर्भ

राज्यसभा सदस्य राधा मोहन अग्रवाल ने याद दिलाया कि ऊर्जा बचत और सोने की खरीद कम करने की अपील पहली बार नहीं की गई है। उन्होंने कहा, 'जब-जब देश पर संकट आया है, तब-तब देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने देशवासियों से अपील की है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बनी हुई है।

आगे क्या होगा

नेताओं और अधिकारियों के इस सामूहिक संकल्प का उद्देश्य जनता को भी प्रेरित करना है। 'खेत बचाओ अभियान' के तहत वैज्ञानिक जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचना शुरू करेंगे। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतीकात्मक कदमों का दीर्घकालिक प्रभाव तभी होगा जब नीतिगत बदलाव भी इनके साथ आएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीतिगत गहराई से खाली है। भारत का सोना आयात बिल हर साल हजारों करोड़ रुपये का होता है — इसे घटाने के लिए व्यक्तिगत संकल्पों से कहीं अधिक संरचनात्मक बदलाव चाहिए। 'खेत बचाओ अभियान' की घोषणा सराहनीय है, लेकिन इसका क्रियान्वयन ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या ये कदम जनता के व्यवहार में बदलाव ला पाएंगे, या महज़ एक राजनीतिक संदेश बनकर रह जाएंगे।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवराज सिंह चौहान ने सोना न खरीदने का संकल्प क्यों लिया?
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने PM मोदी की ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता की अपील के समर्थन में यह संकल्प लिया। उन्होंने और उनके साथ अधिकारियों ने तय किया कि खास परिस्थितियों को छोड़कर एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदेंगे।
सोने की खरीद कम करने से देश को क्या फायदा होगा?
भारत में सोने का उत्पादन बेहद सीमित है और अधिकांश आयात विदेशी मुद्रा खर्च करके होता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के अनुसार, सोने का अत्यधिक आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है, जिससे डॉलर की तुलना में रुपया कमज़ोर हो सकता है।
'खेत बचाओ अभियान' क्या है?
यह शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित एक अभियान है जिसके तहत वैज्ञानिक गाँव-गाँव जाकर किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद उपयोग पर जागरूक करेंगे। इसका उद्देश्य अनावश्यक रासायनिक खाद के उपयोग को रोकना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
कौन-कौन से नेताओं ने ऊर्जा बचत के लिए व्यक्तिगत कदम उठाए हैं?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इलेक्ट्रिक वाहन अपनाया है, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ई-रिक्शा से चल रही हैं और काफिले में गाड़ियाँ घटाई हैं, जबकि दिल्ली सरकार में मंत्री पंकज सिंह बस और मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं।
क्या पहले भी ऐसी अपीलें हुई हैं?
हाँ, राज्यसभा सदस्य राधा मोहन अग्रवाल के अनुसार जब-जब देश पर संकट आया है, तब-तब प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने देशवासियों से ऊर्जा बचत और सोने की खरीद कम करने की अपील की है। यह पहली बार नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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