लखनऊ कोर्ट परिसर तोड़फोड़ विवाद: वकीलों ने लाठीचार्ज का आरोप लगाया, कई घायल

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लखनऊ कोर्ट परिसर तोड़फोड़ विवाद: वकीलों ने लाठीचार्ज का आरोप लगाया, कई घायल

सारांश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर हुई तोड़फोड़ के बाद लखनऊ में वकीलों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ गया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि पुलिस ने बिना पूर्व सूचना के लाठीचार्ज किया, जिससे कई वकील घायल हुए और कुछ को फ्रैक्चर तक हो गया।

मुख्य बातें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर लखनऊ नगर निगम ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर अवैध चैंबर और दुकानें तोड़ीं।
बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र यादव ने पुलिस पर विरोध कर रहे वकीलों पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया।
कथित लाठीचार्ज में कई वकील घायल हुए, कुछ को फ्रैक्चर हुआ और वे अस्पताल में भर्ती हैं।
वकीलों का विरोध हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ नहीं, बल्कि तोड़फोड़ की कार्यप्रणाली और सामान न निकालने देने के खिलाफ है।
प्रशासन की ओर से लाठीचार्ज के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

लखनऊ के जिला कोर्ट परिसर के बाहर 18 मई को तनाव उस समय और गहरा गया जब बार एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रशासन पर विरोध कर रहे वकीलों पर बेरहमी से लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। यह विवाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम द्वारा चलाए गए उस तोड़फोड़ अभियान के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें वकीलों के कथित अवैध चैंबर और दुकानें ध्वस्त की गई थीं।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच लखनऊ नगर निगम ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर बने अवैध चैंबरों और दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की। इस दौरान वकीलों ने जोरदार विरोध किया, जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़पें और तीखी नोकझोंक हुई। सोमवार को स्थिति और बिगड़ गई जब घायल वकीलों के अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आईं।

बार एसोसिएशन की प्रतिक्रिया

बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र यादव ने कहा, 'हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था, और हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। पिछले ढाई-तीन महीनों से हम इसके लागू होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, हम अपने सम्मानित सदस्यों के खिलाफ प्रशासन द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हैं।'

यादव ने आरोप लगाया कि वकीलों को अपने चैंबर से लैपटॉप, एयर-कंडीशनर, फर्नीचर और जरूरी फाइलें निकालने का मौका तक नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने इतना जबरदस्त लाठीचार्ज किया कि हमारे कई वकील घायल हो गए, कुछ को फ्रैक्चर भी हो गया, और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।'

विवाद का मूल कारण

वकीलों का कहना है कि उनका विरोध इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ नहीं, बल्कि तोड़फोड़ की कार्यप्रणाली के खिलाफ है। यादव ने स्पष्ट किया कि 'लाठीचार्ज का कोई आदेश नहीं था — कोर्ट ने सिर्फ तोड़फोड़ का आदेश दिया था।' गौरतलब है कि यह तोड़फोड़ अभियान कई महीनों की कानूनी प्रक्रिया के बाद शुरू हुआ था।

आम जनता और कानूनी बिरादरी पर असर

इस विवाद से लखनऊ के जिला कोर्ट में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। वकीलों के विरोध और तनावपूर्ण माहौल के कारण मुवक्किलों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका और प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

क्या होगा आगे

बार एसोसिएशन ने इस घटना की औपचारिक निंदा की है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक लाठीचार्ज के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घायल वकीलों की स्थिति और प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह उस वर्ग पर बल प्रयोग है जो स्वयं न्याय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। साथ ही, यह प्रश्न भी उठता है कि ढाई-तीन महीने की कानूनी प्रक्रिया के बावजूद प्रभावित पक्षों को सामान हटाने का समय क्यों नहीं दिया गया। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इस तरह की तोड़फोड़ कार्रवाइयों में प्रक्रियागत उचितता और मानवीय गरिमा का सवाल उतना ही महत्वपूर्ण है जितना स्वयं आदेश का पालन।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ कोर्ट परिसर में तोड़फोड़ क्यों हुई?
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर बने कथित अवैध चैंबरों और दुकानों को ध्वस्त किया। यह अभियान भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ रविवार को चलाया गया।
वकीलों ने लाठीचार्ज का आरोप किस पर लगाया?
बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र यादव ने प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगाया कि तोड़फोड़ के दौरान विरोध कर रहे वकीलों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया। उनके अनुसार कई वकील घायल हुए और कुछ को फ्रैक्चर तक हो गया।
क्या वकील हाई कोर्ट के आदेश का विरोध कर रहे थे?
नहीं। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वकील न्यायपालिका के आदेश का सम्मान करते हैं और उसका विरोध नहीं कर रहे। उनका विरोध तोड़फोड़ की कार्यप्रणाली के खिलाफ था — विशेष रूप से इस बात पर कि वकीलों को चैंबर से जरूरी सामान निकालने का मौका नहीं दिया गया।
घायल वकीलों की स्थिति क्या है?
बार एसोसिएशन के अनुसार कथित लाठीचार्ज में कई वकील घायल हुए, जिनमें से कुछ को फ्रैक्चर हुआ और वे अस्पताल में भर्ती हैं। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं आया है।
इस विवाद में आगे क्या हो सकता है?
बार एसोसिएशन ने इस घटना की औपचारिक निंदा की है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रशासन की प्रतिक्रिया और घायल वकीलों की स्थिति के आधार पर यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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