PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर देशव्यापी एकजुटता, राजस्थान-यूपी-महाराष्ट्र के नेताओं ने जताया समर्थन

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PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर देशव्यापी एकजुटता, राजस्थान-यूपी-महाराष्ट्र के नेताओं ने जताया समर्थन

सारांश

ईरान-अमेरिका तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बीच PM मोदी की ईंधन बचत अपील को राजनीतिक एकजुटता मिली — राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र के नेताओं ने काफिले घटाकर समर्थन दिखाया। सवाल यह है कि यह प्रतीकात्मक कदम दीर्घकालिक नीति में बदलेगा या नहीं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और नेताओं से ऊर्जा एवं ईंधन बचत की अपील की, जिसे 15 मई 2025 को देशव्यापी समर्थन मिला।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इसे 'राष्ट्र का कर्तव्य' बताया।
सिंह ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी मूल्य वृद्धि का कारण बताया।
यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ईरान-अमेरिका युद्ध को संभावित दीर्घकालिक ऊर्जा संकट का कारण बताया।
महाराष्ट्र में NCP एमएलसी जीशान सिद्दीकी ने मंत्रियों के काफिलों में वाहन घटाकर अपील का व्यावहारिक उदाहरण पेश किया।
कई राज्यों में मंत्री और विधायक अब बस और मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा एवं ईंधन संरक्षण की अपील को 15 मई 2025 को देशभर में व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला, जब विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और जनप्रतिनिधि इस अभियान से जुड़ते दिखे। ईरान-अमेरिका तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट की पृष्ठभूमि में यह अपील विशेष महत्व रखती है।

मुख्य घटनाक्रम

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस अपील को 'राष्ट्र-प्रथम' की भावना से जोड़ते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र प्रथम की भावना से लोगों से ऊर्जा बचाने का आह्वान किया है। यह हम सभी का कर्तव्य है। न केवल हम, बल्कि पूरे देश के लोग उनके दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। हमें एक-दूसरे का सहयोग करके ऊर्जा बचानी चाहिए।'

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने वैश्विक संदर्भ को रेखांकित करते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध लंबा खिंच सकता है और ऐसे में आने वाली ऊर्जा चुनौतियों को देखते हुए जनता से अनावश्यक वाहन उपयोग न करने की अपील की गई है। उन्होंने बताया कि नेताओं और मंत्रियों को काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि देश की आर्थिक स्थिति मज़बूत है और जीडीपी वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर बेहतरीन है। उन्होंने स्वीकार किया कि विदेशी मुद्रा भंडार पर कुछ दबाव है, जिसके कारण ईंधन मूल्य वृद्धि की गई है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान नागरिकों से संयम बरतने की अपील की हो। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी इसी तरह के कदम उठाए गए थे।

राज्यों में व्यावहारिक कदम

महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के एमएलसी जीशान सिद्दीकी ने बताया कि उनकी पार्टी ने सभी मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाकर इस अपील का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने जनता से घर से काम करने और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने की भी अपील की।

कई राज्यों में मंत्री और विधायक अब बस, मेट्रो और कम वाहनों वाले काफिलों से यात्रा कर रहे हैं — एक ऐसा बदलाव जो सामान्यतः सरकारी स्तर पर दुर्लभ माना जाता है।

आम जनता पर असर

ईंधन मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतें परिवहन लागत और घरेलू बजट दोनों को प्रभावित कर रही हैं। सरकार का तर्क है कि यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव को कम करने के लिए ज़रूरी था।

क्या होगा आगे

यह अभियान कितना टिकाऊ साबित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता कब लौटती है। आलोचकों का कहना है कि नेताओं के काफिले घटाना प्रतीकात्मक कदम है — असली परीक्षा नीतिगत स्तर पर दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण की होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह संरचनात्मक ऊर्जा नीति का विकल्प नहीं है। BJP प्रवक्ता का विदेशी मुद्रा भंडार वाला तर्क उल्लेखनीय है — यह स्वीकारोक्ति है कि ईंधन मूल्य वृद्धि मैक्रो-आर्थिक दबाव से प्रेरित है, न कि केवल वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों से। असली प्रश्न यह है कि क्या यह अभियान नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ निवेश या सार्वजनिक परिवहन सुधार जैसी ठोस नीतियों में तब्दील होगा — या यह एक और 'जन-जागरण' बनकर रह जाएगा जिसकी उम्र संकट जितनी ही होती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने ईंधन बचत की अपील क्यों की?
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के चलते PM मोदी ने नागरिकों से अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने और घर से काम करने की अपील की। सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रहित में एहतियाती कदम है।
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें क्यों बढ़ाई गईं?
BJP प्रवक्ता आर.पी. सिंह के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के कारण ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की जीडीपी वृद्धि दर और औद्योगिक विकास मज़बूत है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह कदम ज़रूरी था।
राज्य सरकारें इस अपील पर क्या कदम उठा रही हैं?
महाराष्ट्र में NCP एमएलसी जीशान सिद्दीकी ने बताया कि मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाई गई है। यूपी में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि नेताओं को काफिले सीमित रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और कई मंत्री बस व मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं।
क्या ईरान-अमेरिका युद्ध का सीधा असर भारत के ईंधन पर पड़ेगा?
यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार यह युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इसके विशिष्ट प्रभाव का आधिकारिक आकलन सार्वजनिक नहीं किया है।
आम जनता इस ईंधन बचत अभियान में कैसे भाग ले सकती है?
सरकार की अपील के अनुसार नागरिक घर से काम करके, अनावश्यक वाहन यात्रा कम करके और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाकर इस अभियान में योगदान दे सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा है कि आपसी सहयोग से ही ऊर्जा बचत संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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