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दिल्ली एलजी संधू का 30 जून का अल्टीमेटम: 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधार समयसीमा में पूरे हों

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दिल्ली एलजी संधू का 30 जून का अल्टीमेटम: 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधार समयसीमा में पूरे हों

सारांश

दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों के लिए 30 जून 2026 की कड़ी समयसीमा तय की है और 'जब तक मना न हो, तब तक अनुमति' वाली व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकल्प जताया है — यह दिल्ली के नियामक ढाँचे में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

संधू ने 15 मई 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
सभी प्राथमिकता वाले 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों को 30 जून 2026 तक लागू करने का निर्देश दिया गया।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' को शीघ्र आगे बढ़ाने के संकेत; मंजूरी प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित होंगी।
'जब तक मना न हो, तब तक अनुमति' वाली व्यवस्था लागू करने पर ज़ोर दिया गया।
पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिक-केंद्रित शासन विज़न से जोड़ा गया।

दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भारत सरकार द्वारा चिह्नित सभी प्राथमिकता वाले 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों को 30 जून 2026 तक बिना किसी चूक के लागू किया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' को शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे मंजूरी प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित होंगी और नियमों का अनुपालन सरल बनेगा।

बैठक में क्या हुआ

उपराज्यपाल संधू ने नई दिल्ली में दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 'डीरेगुलेशन' यानी नियमों को सरल बनाने की दिशा में चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि 'जब तक मना न हो, तब तक अनुमति' वाली व्यवस्था को व्यवहार में लाया जाए।

एलजी का विज़न: नागरिकों पर बोझ कम करना

संधू ने कहा कि हर प्रक्रियागत सुधार का प्रत्यक्ष परिणाम दिल्ली के नागरिकों के लिए अधिक कुशलता, पारदर्शिता और अवसर के रूप में दिखना चाहिए। उन्होंने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न से जोड़ा, जिसका उद्देश्य नागरिकों पर नियामक बोझ घटाना और उनके दैनिक जीवन को सहज बनाना है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शासन का ऐसा मॉडल बनाना लक्ष्य है जहाँ कुशलता और उत्कृष्टता का संयोग हर निवासी के हित में काम करे।

'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' की अहमियत

यह विधेयक दिल्ली में व्यापार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली लंबे समय से जटिल नियामक ढाँचे के कारण व्यापार सुगमता रैंकिंग में अन्य प्रमुख राज्यों से पीछे रही है। यह विधेयक उस खाई को पाटने का प्रयास है।

आम जनता और कारोबारियों पर असर

यदि 30 जून 2026 की समयसीमा में सुधार लागू होते हैं, तो छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और आम नागरिकों को लाइसेंस, अनुमति और अनुपालन प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियामक बाधाओं में कमी से नई दिल्ली में निवेश का माहौल बेहतर होगा और रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

आगे क्या

अधिकारियों को 30 जून 2026 तक सभी लंबित सुधार पूरे करने का लक्ष्य दिया गया है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' की विधायी प्रक्रिया भी तेज़ की जाएगी। संधू ने स्पष्ट किया कि प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — दिल्ली में केंद्र और राज्य के बीच शासन की जटिलता के बीच ऐसे सुधार अक्सर घोषणाओं तक सिमट जाते हैं। 'जब तक मना न हो, तब तक अनुमति' का सिद्धांत कागज़ पर आकर्षक है, परंतु इसे लागू करने के लिए विभागीय संस्कृति में बदलाव ज़रूरी है, जो महज़ एक बैठक से नहीं आता। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' की विधायी यात्रा और उसके बाद की निगरानी व्यवस्था यह तय करेगी कि यह पहल वास्तविक बदलाव लाती है या सुर्खियों तक ही रहती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली एलजी संधू ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों के लिए क्या निर्देश दिए?
उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने 15 मई 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत सरकार द्वारा चिह्नित सभी प्राथमिकता वाले 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों को 30 जून 2026 तक बिना किसी लापरवाही के लागू किया जाए। साथ ही 'जब तक मना न हो, तब तक अनुमति' वाली व्यवस्था अपनाने पर भी ज़ोर दिया गया।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' क्या है?
यह दिल्ली सरकार का प्रस्तावित विधेयक है, जिसका उद्देश्य व्यापार शुरू करने और संचालित करने की मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और नियमों का अनुपालन सरल बनाना है। एलजी संधू ने संकेत दिया है कि इसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा।
इन सुधारों से दिल्ली के कारोबारियों और नागरिकों को क्या फायदा होगा?
सुधार लागू होने पर छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और आम नागरिकों को लाइसेंस, अनुमति और अनुपालन प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, नियामक बाधाएँ कम होने से निवेश का माहौल बेहतर होगा और रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
एलजी संधू ने यह पहल किस विज़न से जोड़ी है?
संधू ने इस पूरी पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न से जोड़ा है, जिसका लक्ष्य नागरिकों पर नियामक बोझ कम करना और उनके जीवन को सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि हर प्रक्रियागत सुधार का नतीजा अधिक कुशलता, पारदर्शिता और अवसरों के रूप में सामने आना चाहिए।
30 जून 2026 की समयसीमा के बाद आगे क्या होगा?
एलजी संधू ने स्पष्ट किया है कि सुधारों की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' की विधायी प्रक्रिया भी समानांतर रूप से तेज़ की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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