दिल्ली LG टीएस संधू का DDA को निर्देश: सिंगल विंडो ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम से घटेगी लालफीताशाही
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को 'सिंगल विंडो ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम' (OBPS) लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिसका उद्देश्य राजधानी में भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। 12 मई को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह कदम 'ईज ऑफ लिविंग' के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जो दशकों पुरानी लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों को दूर करने की कोशिश करता है।
नई प्रणाली में क्या है खास
नई OBPS प्रणाली नागरिकों, मकान मालिकों, वास्तुकारों और डेवलपर्स को भवन निर्माण की अनुमतियों एवं संबंधित स्वीकृतियों के लिए एक एकीकृत डिजिटल इंटरफेस प्रदान करेगी। इस एकल खिड़की के माध्यम से भवन योजनाएँ, दस्तावेज़ और कई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे।
इससे प्रक्रियात्मक जटिलता में उल्लेखनीय कमी आएगी और DDA कार्यालयों में बार-बार चक्कर लगाने की ज़रूरत समाप्त होगी। आवेदक वास्तविक समय में अपने आवेदन की स्थिति जान सकेंगे, ऑनलाइन शुल्क भुगतान कर सकेंगे और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित स्वीकृतियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
तकनीक का उपयोग: AI से लेकर मोबाइल निरीक्षण तक
यह प्रणाली कई अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस है। इसमें AI-संचालित योजना जाँच, स्वचालित अनुपालन परीक्षण, भौगोलिक रूप से चिह्नित मोबाइल निरीक्षण और तत्काल SMS व ईमेल सूचनाएँ शामिल हैं। इन सुविधाओं से मैन्युअल हस्तक्षेप, प्रक्रियात्मक देरी और परिचालन त्रुटियों में भारी कमी आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि उपराज्यपाल संधू ने OBPS के निर्देश जारी करते समय पहले भी लालफीताशाही और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए थे, जो भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया में लंबे समय से बाधा बने हुए थे।
आम नागरिकों पर असर
दिल्ली में लाखों मकान मालिक, बिल्डर और वास्तुकार हर साल भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन करते हैं। पहले यह प्रक्रिया महीनों खिंचती थी और कई बार DDA के विभिन्न विभागों में अलग-अलग जाना पड़ता था। नई प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मध्यस्थों पर निर्भरता भी घटेगी, जो अक्सर अनुचित शुल्क वसूलते थे।
यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पूरे देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' सूचकांकों में सुधार पर ज़ोर दे रही है। दिल्ली जैसे महानगर में डिजिटल शासन की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
शहरी नियोजन में बड़ा बदलाव
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल प्रौद्योगिकी-आधारित शासन सुधारों और सुव्यवस्थित सार्वजनिक सेवा वितरण के ज़रिए दिल्ली के शहरी नियोजन और विकास ढाँचे के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जवाबदेही, दक्षता और सटीकता में सुधार इस बदलाव के केंद्र में हैं।
आने वाले समय में यह देखना होगा कि OBPS का क्रियान्वयन कितनी तेज़ी से होता है और क्या यह वास्तव में आम नागरिकों की परेशानियाँ कम कर पाता है।