असम विधानसभा सत्र में यूसीसी बिल पेश करेगी सरमा सरकार, जून के पहले सप्ताह में कैबिनेट विस्तार के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार, 20 मई को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पेश करेगी और उसे पारित कराने का पूरा भरोसा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य कैबिनेट का विस्तार जून के पहले सप्ताह में होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट ऐलान
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'इस विधानसभा सत्र में हम समान नागरिक संहिता बिल लाएंगे और हम इसे पारित करेंगे।' उन्होंने इसे अपनी पुरानी प्रतिबद्धता बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले ही उन्होंने वादा किया था कि पहले ही सत्र में यूसीसी पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।'
हालाँकि, मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित कानून के विस्तृत प्रावधानों और बिल पेश किए जाने की सटीक तारीख का खुलासा नहीं किया।
विधानसभा सत्र का पहला दिन
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि सत्र के पहले दिन गुरुवार को असम विधानसभा के नए अध्यक्ष का चुनाव होगा। यह सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी, जिसके बाद यूसीसी बिल सहित अन्य विधायी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
कैबिनेट विस्तार की तैयारी
संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से जुड़े सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट विस्तार जून के पहले सप्ताह में होने की संभावना है और यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी। नए मंत्रियों को शामिल करने का यह कदम विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद अपेक्षित है।
राजनीतिक बहस की आहट
प्रस्तावित यूसीसी बिल से राज्य में एक बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि यह कानून धर्म की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करेगा। वहीं, विपक्षी दल व्यक्तिगत कानूनों और पारंपरिक प्रथाओं पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर आपत्तियाँ उठा सकते हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने यूसीसी लागू किया है। असम के इस कदम को उसी दिशा में एक और बड़ा राज्य-स्तरीय प्रयास माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी की दिशा में विचार-विमर्श कर रही है।
आगे क्या होगा
विधानसभा सत्र में अध्यक्ष चुनाव के बाद यूसीसी बिल पेश होने पर सदन में गहन चर्चा अपेक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि असम में यूसीसी का लागू होना देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नज़ीर बन सकता है। हाल के वर्षों में असम सरकार ने शासन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से कई विधायी और प्रशासनिक सुधार किए हैं।