असम में एनडीए को फिर से मिलेगा बहुमत: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का विश्वास
सारांश
Key Takeaways
- असम में मतदान प्रतिशत 85.38 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया।
- मुख्यमंत्री ने हिंदू और स्वदेशी समुदायों की भागीदारी की सराहना की।
- भाजपा गठबंधन 90 से अधिक सीटें जीतने की उम्मीद कर रहा है।
- महिला मतदाताओं की भागीदारी 85.96 प्रतिशत रही।
- चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण बताया।
गुवाहाटी, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आज हुए विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से हिंदू और स्वदेशी समुदायों में दिखाई दिया उत्साह, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मतदान संपन्न होने के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने स्थानीय और स्वदेशी मतदाताओं की भागीदारी में स्पष्ट वृद्धि को स्वीकार किया।
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय भागीदारी चुनावी प्रणाली को मजबूत करती है और शासन में जनता के भरोसे को दिखाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ता मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि लोग अब अधिक जागरूक हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए उत्सुक हैं।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान और मतदाताओं का उत्साह असम में जीवंत लोकतांत्रिक संस्कृति को दर्शाता है।
सरमा ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के प्रति भी विश्वास जताया और कहा कि 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन 90 से अधिक सीटें जीत सकता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से मिले समर्थन से साफ संकेत मिलता है कि जनता का जनादेश सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अधिक मतदान से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और इससे अधिक प्रतिनिधित्व वाली सरकार बनेगी।
उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजे असम की जनता की आकांक्षाओं को दर्शाएंगे, क्योंकि इस बार असम में हाल के वर्षों के सबसे अधिक भागीदारी वाले चुनावों में से एक देखा गया।
चुनाव आयोग के अनुसार, असम में इस बार 85.38 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ, जो 2016 के 84.67 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
अधिकारियों ने मतदान को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया, जहां केवल कुछ स्थानों से मामूली घटनाएं सामने आईं।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, महिला मतदाताओं (85.96 प्रतिशत) की भागीदारी पुरुषों (84.80 प्रतिशत) से थोड़ी अधिक रही, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं का प्रतिशत 36.84 रहा।