20 जुलाई 2026
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कर्नाटक: कांग्रेस के निर्णय पर मुस्लिम नेताओं का असंतोष, शिवशंकरप्पा के पोते को टिकट

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कर्नाटक: कांग्रेस के निर्णय पर मुस्लिम नेताओं का असंतोष, शिवशंकरप्पा के पोते को टिकट

सारांश

कर्नाटक में दावणगेरे विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने शिवशंकरप्पा के पोते को उम्मीदवार बनाया है, जिससे मुस्लिम नेताओं में भारी नाराजगी है। जानिए इस मुद्दे पर क्या कहते हैं मुस्लिम नेता और इसके राजनीतिक प्रभाव क्या हो सकते हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने दावणगेरे में शिवशंकरप्पा के पोते को उम्मीदवार बनाया है।
इस निर्णय से मुस्लिम नेताओं में नाराजगी है।
कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय की आवाज सुननी चाहिए।
पूर्व में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देने के कारण पार्टी की साफ सफाई संतोषजनक नहीं रही।
इस निर्णय का राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हो सकता है।

दावणगेरे, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में दावणगेरे विधानसभा सीट, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण खाली हो गई थी। इसके पश्चात, जमीयत उलेमा-ए-कर्नाटक के नेताओं ने आग्रह किया था कि कांग्रेस उपचुनाव में मुस्लिम समुदाय से किसी उम्मीदवार को उतारे। लेकिन, पार्टी ने शिवशंकरप्पा के पोते को अपना उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया, जिससे मुस्लिम नेताओं में गहरी नाराजगी पैदा हुई।

नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक बार फिर मुस्लिम समुदाय को नजरअंदाज किया है। उनका कहना था कि इस निर्णय से कर्नाटक की राजनीति में दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

जमीयत उलेमा-ए-कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी ने कहा कि यह मुद्दा अचानक नहीं उभरा, बल्कि इसे 2023 में ही कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष उठाया गया था।

उन्होंने कहा कि पिछले मामलों में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देने के लिए पार्टी की सफाई संतोषजनक नहीं थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बागलकोट में एक नेता की मृत्यु के बाद उनके बेटे को टिकट दिया गया, और दावणगेरे में भी ऐसा ही निर्णय लिया गया।

कासमी ने बताया कि शिवशंकरप्पा के बेटे पहले से विधायक और मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों को बार-बार चुनने से अन्य समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना कम हो जाती है।

कासमी ने पार्टी नेतृत्व से निवेदन किया था कि इस बार परिवार के सदस्यों को टिकट देने के बजाय अल्पसंख्यक समुदाय के किसी उम्मीदवार पर विचार किया जाए। हालांकि, उन्होंने निराशा जताई कि उनकी यह मांग मान नहीं गई।

कासमी ने आरोप लगाया कि बाद में हुए संगठनात्मक बदलाव, जिसमें कांग्रेस एमएलसी अब्दुल जब्बार और नसीर अहमद को उनके पदों से हटाना शामिल है, पार्टी में चल रही 'दबाव की राजनीति' को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व को धमकी नहीं दी थी, बल्कि उनकी मंशा सिर्फ अपनी चिंताओं को सामने रखना था।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सुधारात्मक कदम उठाने का स्वागत करने की बात कही।

इस बीच, 'वेलफेयर ऑफ ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के अध्यक्ष मौलाना शब्बीर अहमद नदवी ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री के सलाहकार अब्दुल जब्बार और जब्बार अहमद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटाने के फैसले की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद की जानी चाहिए थी। नेताओं को उनकी सफाई देने का उचित अवसर भी दिया जाना चाहिए था।

नदवी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस तरह की कार्रवाई करना अनुचित है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला से निवेदन किया था कि दावणगेरे से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा जाए।

उन्होंने दावा किया कि सुरजेवाला ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उस आश्वासन का पालन नहीं किया गया।

वेलफेयर स्कूलों के समन्वयक सैयद आसिम अब्दुल्ला ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों ने एक मिसाल कायम की है और उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने पर भविष्य में इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में दावणगेरे सीट खाली क्यों हुई?
दावणगेरे विधानसभा सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण खाली हुई है।
कांग्रेस ने किसे उम्मीदवार बनाया है?
कांग्रेस ने शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते को उम्मीदवार बनाया है।
मुस्लिम नेताओं का इस निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया है?
मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस के इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया है और इसे समुदाय को नजरअंदाज करने के रूप में देखा है।
क्या कांग्रेस की इस रणनीति का राजनीतिक प्रभाव हो सकता है?
जी हां, इस निर्णय का कर्नाटक में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार पर विचार करना चाहिए था, लेकिन उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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