क्या बढ़ती लोकसभा सीटों के बीच सभी सांसदों को मिलेगा बोलने का अवसर? सपा सांसद ने उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा जारी है।
- सपा सांसद ने बढ़ती सीटों पर चिंता जताई।
- महिलाओं के अधिकारों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग।
- सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए।
- लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर तक आरक्षण की आवश्यकता।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन और डीलिमिटेशन से संबंधित संविधान संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राम शिरोमणि वर्मा ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल को धन्यवाद दिया और साथ ही बढ़ती हुई लोकसभा सीटों पर अपनी चिंता व्यक्त की।
सपा सांसद राम शिरोमणि वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में लोकसभा में 543 सांसद हैं, फिर भी गंभीर मुद्दों पर सभी सांसदों को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में जब लोकसभा सीटें 800 से अधिक हो जाएंगी, तब क्या हर सांसद को सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा? उन्होंने प्रश्न किया, "क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक सांसद को सदन में अपनी बात रखने का उचित समय मिले?"
इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने उत्तर दिया, "क्या यह आज रात 1:00 बजे तक नहीं चल रहा है?"
राम शिरोमणि वर्मा ने आगे कहा कि सदन में केवल एक विधेयक पर चर्चा नहीं हो रही है, बल्कि देश की आधी आबादी यानी माताओं, बहनों और बेटियों के अधिकारों, उनके प्रतिनिधित्व और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण विषय पर बहस चल रही है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का धन्यवाद किया और कहा कि सपा की विचारधारा हमेशा से सामाजिक न्याय और महिलाओं को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है।
सांसद ने महिला आरक्षण के 33 प्रतिशत प्रावधान का पूरा समर्थन किया, लेकिन सरकार की मंशा और टाइमिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "2023 में बिल पास हुआ था। अगर सरकार चाहती तो उसी समय इसे लागू कर सकती थी। अब 2027 में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं, तब इस विधेयक को लाया जा रहा है। यह सरकार की मंशा को साफ जाहिर करता है। जब अधिकार देने का समय था, तब सरकार सोई रही और अब चुनाव के समय महिलाओं का अधिकार याद आ गया।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब महिलाओं को केवल संसद और विधानसभा में नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर तक 33 प्रतिशत आरक्षण का वास्तविक और समान प्रतिनिधित्व मिले, क्योंकि सशक्त भारत की नींव गांव से ही पड़ती है।
वर्मा ने आगे मांग की कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत आधी आबादी वाला महिलाओं का देश है। सरकारी नौकरियों में, शिक्षा क्षेत्र में, मंत्रिमंडल में और खेल क्षेत्र में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।" इसके अलावा उन्होंने ओबीसी महिलाओं के लिए भी राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद में आरक्षण लागू करने की मांग की।