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वैशाख अमावस्या: भक्तों ने शिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगाई, पंचक्रोशी यात्रा का हुआ समापन

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वैशाख अमावस्या: भक्तों ने शिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगाई, पंचक्रोशी यात्रा का हुआ समापन

सारांश

उज्जैन में वैशाख अमावस्या पर बड़ी संख्या में भक्त शिप्रा नदी में स्नान के लिए पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव को जल अर्पित किया और पितरों को जल अर्पण करते हुए धार्मिक अनुष्ठान किए। यह दिन पंचक्रोशी यात्रा का अंतिम दिन भी है।

मुख्य बातें

वैशाख अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
भक्त शिप्रा नदी में स्नान करते हैं।
यह दिन पंचक्रोशी यात्रा का अंतिम दिन है।
दान और अनुष्ठान का इस दिन खास महत्व है।
भक्तों का आस्था प्रदर्शन उज्जैन में देखने को मिलता है।

उज्जैन, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैशाख अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त शिप्रा नदी में स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं। भक्त भगवान शिव को जल अर्पित करते हुए धार्मिक अनुष्ठान भी कर रहे हैं और अपने पितरों को जल अर्पण कर रहे हैं।

यह पावन तिथि पंचक्रोशी यात्रा से जुड़ी हुई है, जो एकादशी से अमावस्या तक की 118 किलोमीटर की तीर्थयात्रा है। आज भक्तों का इस यात्रा का अंतिम दिन है।

सनातन धर्म में वैशाख मास की अमावस्या का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन भगवान शिव को जल अर्पित करने का विधान है, जिससे महादेव को शीतलता प्राप्त होती है और साधक को कई जन्मों के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पंडित दीपक पंड्या ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया, "वैशाख कृष्ण अमावस्या के दिन स्नान का महत्व शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित है। उज्जैन में हजारों श्रद्धालु शिप्रा में पवित्र स्नान करते हैं, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।"

इस दिन दान का महत्व बताते हुए पुजारी ने कहा, "आज के दिन दान और पितरों के लिए अनुष्ठान का बहुत महत्व है।"

वहीं पंडित राकेश जोशी ने कहा, "वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व है। वैशाख, श्रावण और कार्तिक जैसे महीने अत्यधिक शुभ होते हैं, इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। विशेषकर भगवान शिव को शीतल जल अर्पित किया जाता है, जिससे वे अपने भक्तों के जीवन में भी शीतलता प्रदान करें।"

गौरतलब है कि वैशाख मास की महिमा इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसी समय महाकुंभ और पवित्र पंचक्रोशी यात्रा का संयोग बनता है। एकादशी से अमावस्या तक चलने वाली इस कठिन यात्रा में श्रद्धालु भक्ति भाव से नगर परिक्रमा करते हैं। जो लोग मुख्य यात्रा करने में असमर्थ हैं, वे छोटी पंचक्रोशी यात्रा या चौरासी महादेव के दर्शन कर पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने से आयु, आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भक्तों के लिए एकता और आस्था के प्रतीक के रूप में भी कार्य करता है। यह एक ऐसा मौका है जब लाखों लोग अपनी भक्ति का प्रदर्शन करते हैं।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैशाख अमावस्या का महत्व क्या है?
वैशाख अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, विशेषकर भगवान शिव की पूजा के लिए।
पंचक्रोशी यात्रा क्या है?
पंचक्रोशी यात्रा एक 118 किलोमीटर की तीर्थयात्रा है जो एकादशी से अमावस्या तक होती है।
इस दिन दान का क्या महत्व है?
इस दिन दान और पितरों के लिए अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है।
शिप्रा नदी में स्नान करने का क्या महत्व है?
शिप्रा नदी में स्नान करने से भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
वैशाख अमावस्या पर क्या विशेष अनुष्ठान होते हैं?
इस दिन भक्त भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं और पितरों के लिए जल तर्पण करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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