असम में भाजपा का महिला सशक्तीकरण पर जोर: मुख्यमंत्री सरमा का संदेश
सारांश
Key Takeaways
- महिला सशक्तीकरण पर भाजपा का विशेष ध्यान।
- मुख्यमंत्री सरमा का मतदाता अपील।
- महिलाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा योजनाएं।
- उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहायता।
- असम में महिला मतदाता की भूमिका बढ़ती जा रही है।
गुवाहाटी, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को मतदाताओं से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी ने राज्यभर में महिलाओं को सशक्त करने पर जोर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एक वोट में परिवारों को बदलने और समाज में महिलाओं की आवाज को मजबूत करने की शक्ति होती है।
मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक वोट का अधिकार हर घर की आवाज को बदल सकता है। महिला सशक्तीकरण के प्रति भाजपा का दृष्टिकोण बताते हुए सीएम सरमा ने कहा कि असम में पार्टी की नीतियां हमेशा से नारी शक्ति को मजबूत करने के लिए रही हैं। उन्होंने कहा कि 'भाजपा-फॉर असम' का मुख्य उद्देश्य असम की महिलाओं को सशक्त बनाना है, जो हमारे हर कार्य में स्पष्ट है।
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में विकास कार्यक्रमों और कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करती रहेगी। उन्होंने मतदाताओं से आगामी चुनावों में समझदारी से निर्णय लेने की अपील की और कहा कि यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा। विधानसभा चुनावों से पहले अपनी अपील में सरमा ने कहा कि समझदारी से चुनें, भाजपा को चुनें।
असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता में आने के बाद से कई महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य राज्यभर में महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना और उनमें उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
प्रमुख योजना 'ओरुनोदोई' के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को प्रति माह 1,250 रुपये की सीधी नकद राशि दी जाती है, जिससे वर्तमान में 19 लाख से अधिक लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय सहायता महिलाओं के माध्यम से परिवारों तक पहुंचे, जिससे घरेलू निर्णय लेने में उनकी भूमिका बढ़े और आवश्यक वस्तुओं तक उनकी पहुंच में सुधार हो। इसके अलावा, सरकार ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) शुरू किया है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को उद्यमशीलता के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रारंभिक पूंजी और संस्थागत सहायता प्रदान की जाती है, जिसका लक्ष्य 12 लाख महिलाओं को लाभान्वित करना है।
लखपति बैदेव योजना नाम के एक अन्य पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को चरणबद्ध वित्तीय सहायता प्रदान करके सशक्त बनाना है। पहले वर्ष में 10,000 रुपये, दूसरे वर्ष में 25,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 50,000 रुपये दिया जाता है, जिससे कि वे स्थायी सूक्ष्म उद्यम स्थापित कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में महिला मतदाता एक प्रभावशाली मतदाता वर्ग के रूप में उभर रही हैं, और प्रमुख राजनीतिक दल महिला कल्याण और सशक्तीकरण पर केंद्रित नीतियों और चुनावी संदेशों पर विशेष जोर दे रहे हैं। राज्य में भाजपा नेतृत्व ने सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भूमिका को बार-बार रेखांकित किया है और पार्टी नेताओं ने चुनाव से पहले अपने जनसंपर्क अभियान के तहत अक्सर सरकारी पहलों को प्रमुखता से दिखाया है।