असम के सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन, कहा- यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन है

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असम के सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन, कहा- यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन है

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की सराहना की है। उन्होंने इसे भारत में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया और विधायी निकायों में महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है।
  • यह विधेयक लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा।
  • असम के सीएम ने इसे क्रांतिकारी कदम बताया है।
  • यह विधेयक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज को मजबूत बनाएगा।
  • विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होगा।

गुवाहाटी, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' की सराहना करते हुए इसे भारत में लैंगिक समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि विधायी निकायों में महिलाओं का बढ़ा हुआ प्रतिनिधित्व शासन को अधिक समावेशी और संतुलित बनाएगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि यह कानून भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि नीतियों और देश के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की आवाज अधिक मजबूत हो।

उन्होंने कहा कि दशकों से नीतियां बनाने में महिलाओं की आवाज को कम प्रतिनिधित्व मिला है। यह सुधार इस स्थिति को बदलता है और उन्हें उस मंच पर उनका सही स्थान देता है, जहां देश का भविष्य तय होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला नेता अपने जीवन के अनुभवों पर आधारित दृष्टिकोण लाती हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में नीति-निर्माण को काफी हद तक प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा प्रतिनिधित्व महिलाओं और युवा लड़कियों को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए आगे आने के लिए भी प्रेरित करेगा।

सरमा ने कहा कि यह सिर्फ एक सुधार नहीं है, बल्कि एक ज्यादा प्रतिनिधि और न्यायसंगत भारत की दिशा में उठाया गया एक कदम है।

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम', जिसे आम तौर पर 'महिला आरक्षण विधेयक' के नाम से जाना जाता है, पर भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुलाए गए संसद के एक विशेष सत्र के दौरान चर्चा की जाएगी। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना है।

संसद का यह विशेष सत्र, जो 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है, मोदी सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना है।

इस कानून को व्यापक रूप से एक ऐतिहासिक कदम बताया गया है, क्योंकि यह भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लंबे समय से चली आ रही लैंगिक असमानता को दूर करने का प्रयास करता है, हालांकि इसके लागू होने की उम्मीद परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही है।

यह कदम केंद्र सरकार के 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास' पर दिए जा रहे व्यापक जोर के अनुरूप है, जो हाल के वर्षों में मोदी सरकार द्वारा उजागर किया गया एक प्रमुख विषय रहा है।

सरमा की टिप्पणियां राजनीतिक क्षेत्र के विभिन्न नेताओं से मिल रहे समर्थन की बढ़ती आवाजों में शामिल हो गई हैं, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को नया रूप देने में इस कानून के महत्व को रेखांकित करती हैं।

Point of View

बल्कि यह राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा। इस कानून के माध्यम से, महिलाओं को उनके अधिकारों और प्रतिनिधित्व का सही स्थान मिलेगा।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना है।
असम के मुख्यमंत्री ने इस विधेयक के बारे में क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे भारत में लैंगिक समानता की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया।
यह विधेयक कब चर्चा के लिए लाया जाएगा?
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा संसद के विशेष सत्र में 16 अप्रैल से की जाएगी।
इस विधेयक का क्या महत्व है?
यह विधेयक भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लैंगिक असमानता को दूर करने का प्रयास करता है।
महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का क्या महत्व है?
यह महिलाओं की सशक्तीकरण की दिशा में एक व्यापक कदम है, जो उनके विकास और अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
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