असम में महिला आरक्षण बिल पर भाजपा विधायकों का समर्थन, बोले — 'नारियों को मिलना चाहिए राजनीतिक हक'
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा में 26 मई 2026 को महिला आरक्षण बिल और समान नागरिक संहिता (UCC) पर चर्चा से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायकों ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया। विधायकों ने एक स्वर में कहा कि देश की 71 करोड़ महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
विधायकों की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक विक्टर कुमार दास ने कहा, 'महिला आरक्षण बिल का हम 100 प्रतिशत समर्थन करते हैं। हम चाहते हैं कि देश की माताओं-बहनों को राजनीतिक अधिकार मिलना चाहिए। इसीलिए इस बिल की जरूरत है। देश में 71 करोड़ महिलाएँ हैं।'
भाजपा विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा कि नारियों को 'नारायणी' मानने वाले समाज में उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि जब लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तभी वे अपने मुद्दों पर प्रभावी ढंग से बात कर सकेंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की कोशिश है कि यह बिल पारित न हो।
भाजपा विधायक पुलोक गोहेन ने कहा कि नारी शक्ति वंदन और UCC — दोनों विषयों को सदन से पास कराना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता और देश के खिलाफ जाती है।
बरहमपुर से भाजपा विधायक जीतू गोस्वामी ने UCC और महिला सशक्तिकरण को जोड़ते हुए कहा कि देश की सभ्यता और संस्कृति में विश्वास रखने वाले हर समाज को इसका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि पिता की संपत्ति में हर बेटी का हक होना चाहिए और महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना समय की माँग है।
विधानसभा में क्या होगा चर्चा का एजेंडा
सूत्रों के अनुसार 26 मई को असम विधानसभा के सत्र में महिला आरक्षण बिल और समान नागरिक संहिता (UCC) — दोनों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित थी। भाजपा विधायकों ने सत्र से पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया, जिससे सत्तापक्ष की एकजुटता का संकेत मिलता है।
विपक्ष पर आरोप
कई भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) महिला आरक्षण बिल को रोकने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इस पर कोई तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। गौरतलब है कि महिला आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर वर्षों से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।
आम जनता और महिलाओं पर असर
यदि यह बिल पारित होता है, तो असम विधानसभा की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएँगी। यह कदम राज्य की महिला मतदाताओं और राजनीतिक आकांक्षाओं रखने वाली महिलाओं के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। देश में 71 करोड़ महिलाओं की आबादी को देखते हुए विधायकों ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया।
आगे क्या
विधानसभा में चर्चा के बाद बिल पर मतदान की स्थिति स्पष्ट होगी। भाजपा के बहुमत को देखते हुए बिल के पारित होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, लेकिन विपक्ष की आपत्तियाँ सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं।