11 जुलाई 2026
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असम में महिला आरक्षण बिल पर भाजपा विधायकों का समर्थन, बोले — 'नारियों को मिलना चाहिए राजनीतिक हक'

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असम में महिला आरक्षण बिल पर भाजपा विधायकों का समर्थन, बोले — 'नारियों को मिलना चाहिए राजनीतिक हक'

सारांश

असम विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा से पहले भाजपा के चार विधायकों ने 33% आरक्षण का पुरजोर समर्थन किया। देश की 71 करोड़ महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और UCC को लेकर सत्तापक्ष एकजुट दिखा, जबकि विपक्ष पर बिल रोकने का आरोप लगाया गया।

मुख्य बातें

असम विधानसभा में 26 मई 2026 को महिला आरक्षण बिल और UCC पर चर्चा प्रस्तावित थी।
भाजपा विधायक विक्टर कुमार दास ने बिल को 100 प्रतिशत समर्थन देने की घोषणा की।
विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा — लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ने पर वे अपने मुद्दे खुद उठाएँगी।
विधायक जीतू गोस्वामी ने पिता की संपत्ति में बेटियों के हक और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की वकालत की।
भाजपा विधायकों ने कांग्रेस पर बिल को रोकने की कोशिश का आरोप लगाया।
देश में 71 करोड़ महिलाओं की आबादी का हवाला देते हुए बिल को ऐतिहासिक बताया गया।

असम विधानसभा में 26 मई 2026 को महिला आरक्षण बिल और समान नागरिक संहिता (UCC) पर चर्चा से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायकों ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया। विधायकों ने एक स्वर में कहा कि देश की 71 करोड़ महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।

विधायकों की प्रतिक्रिया

भाजपा विधायक विक्टर कुमार दास ने कहा, 'महिला आरक्षण बिल का हम 100 प्रतिशत समर्थन करते हैं। हम चाहते हैं कि देश की माताओं-बहनों को राजनीतिक अधिकार मिलना चाहिए। इसीलिए इस बिल की जरूरत है। देश में 71 करोड़ महिलाएँ हैं।'

भाजपा विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा कि नारियों को 'नारायणी' मानने वाले समाज में उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि जब लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तभी वे अपने मुद्दों पर प्रभावी ढंग से बात कर सकेंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की कोशिश है कि यह बिल पारित न हो।

भाजपा विधायक पुलोक गोहेन ने कहा कि नारी शक्ति वंदन और UCC — दोनों विषयों को सदन से पास कराना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता और देश के खिलाफ जाती है।

बरहमपुर से भाजपा विधायक जीतू गोस्वामी ने UCC और महिला सशक्तिकरण को जोड़ते हुए कहा कि देश की सभ्यता और संस्कृति में विश्वास रखने वाले हर समाज को इसका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि पिता की संपत्ति में हर बेटी का हक होना चाहिए और महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना समय की माँग है।

विधानसभा में क्या होगा चर्चा का एजेंडा

सूत्रों के अनुसार 26 मई को असम विधानसभा के सत्र में महिला आरक्षण बिल और समान नागरिक संहिता (UCC) — दोनों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित थी। भाजपा विधायकों ने सत्र से पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया, जिससे सत्तापक्ष की एकजुटता का संकेत मिलता है।

विपक्ष पर आरोप

कई भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) महिला आरक्षण बिल को रोकने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इस पर कोई तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। गौरतलब है कि महिला आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर वर्षों से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।

आम जनता और महिलाओं पर असर

यदि यह बिल पारित होता है, तो असम विधानसभा की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएँगी। यह कदम राज्य की महिला मतदाताओं और राजनीतिक आकांक्षाओं रखने वाली महिलाओं के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। देश में 71 करोड़ महिलाओं की आबादी को देखते हुए विधायकों ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया।

आगे क्या

विधानसभा में चर्चा के बाद बिल पर मतदान की स्थिति स्पष्ट होगी। भाजपा के बहुमत को देखते हुए बिल के पारित होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, लेकिन विपक्ष की आपत्तियाँ सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बिल के प्रावधान कितने ठोस हैं और आरक्षण लागू होने की समयसीमा क्या होगी — इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई। विपक्ष पर लगाए गए आरोप राजनीतिक हैं, परंतु कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति सामने न आना एक खाली जगह छोड़ता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण बिल वर्षों से लंबित है — असम का यह कदम राज्य-स्तरीय पहल है या केंद्रीय कानून का समर्थन, यह भेद स्पष्ट होना जरूरी है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में महिला आरक्षण बिल क्या है?
यह विधेयक असम विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव करता है। 26 मई 2026 को इस पर विधानसभा में चर्चा प्रस्तावित थी और भाजपा विधायकों ने इसे पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
भाजपा विधायकों ने महिला आरक्षण के बारे में क्या कहा?
भाजपा विधायक विक्टर कुमार दास ने 100 प्रतिशत समर्थन की बात कही, जबकि जीतू गोस्वामी ने पिता की संपत्ति में बेटियों के हक और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की वकालत की। कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा कि विधायिका में महिलाओं की संख्या बढ़ने पर वे अपने मुद्दे खुद उठा सकेंगी।
असम विधानसभा में UCC पर भी चर्चा होगी?
हाँ, भाजपा विधायक पुलोक गोहेन ने बताया कि 26 मई को नारी शक्ति वंदन और समान नागरिक संहिता (UCC) — दोनों विषयों पर सदन में चर्चा होगी। उनका लक्ष्य दोनों को सदन से पास कराना है।
कांग्रेस का इस बिल पर क्या रुख है?
भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिल को पारित होने से रोकने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
देश में कितनी महिलाएँ हैं और यह बिल क्यों जरूरी बताया जा रहा है?
भाजपा विधायक विक्टर कुमार दास के अनुसार देश में 71 करोड़ महिलाएँ हैं। इतनी बड़ी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए यह आरक्षण जरूरी बताया जा रहा है, ताकि महिलाएँ विधायिका में अपने मुद्दे सीधे उठा सकें।
राष्ट्र प्रेस
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