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मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा की मंशा पर उठे सवाल

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मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा की मंशा पर उठे सवाल

सारांश

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अजय सिंह ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने में लगी है, जबकि महिलाओं को सशक्त बनाने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल में 33% आरक्षण का प्रावधान है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।
सरकार की दिशा और कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी है।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

भोपाल, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने बुधवार को महिला आरक्षण बिल के प्रस्ताव और इसे लागू करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने यह आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने में लगी है।

सोनिया गांधी का समर्थन करते हुए सिंह ने कहा कि उनके हालिया हस्तक्षेप से इस बिल में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं, जिसे एक ऐतिहासिक सुधार का दर्जा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार इस कानून को ऐतिहासिक मान रही है, वहीं इसके लागू करने से जुड़ी शर्तें सरकार की मंशा पर सवाल उठाती हैं।

सिंह ने यह भी कहा कि जिस तरह से इस बिल को तैयार किया गया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा का ध्यान महिलाओं को असल में सशक्त बनाने के बजाय सुर्खियों में बने रहने पर है। महिलाओं को वर्षों तक इंतजार कराना उचित नहीं है। इस कानून, जिसका आधिकारिक नाम 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' है, को सितंबर 2023 में संसद के एक विशेष सत्र के दौरान पारित किया गया था। यह लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है। हालांकि, इसका कार्यान्वयन अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। आलोचकों का कहना है कि इन शर्तों के कारण इसे लागू करने में कई वर्षों की देरी हो सकती है।

सिंह ने बताया कि कांग्रेस ने पहले भी महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है। उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान राज्यसभा में यह बिल पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि भाजपा, जिसने उस समय इसका विरोध किया था, अब इसे नए तरीके से पेश कर रही है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं कर रही कि इसे समय पर लागू किया जाए।

उन्होंने आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के संभावित राजनीतिक परिणामों पर भी चिंता जताई। सिंह के अनुसार, इस तरह के कदम से विभिन्न क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना कोई निष्पक्ष प्रशासनिक कदम नहीं है; इसके राजनीतिक परिणाम होते हैं। इससे असंतुलन उत्पन्न होने और निष्पक्षता पर सवाल उठने का खतरा है, खासकर उन राज्यों के लिए जो जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं।

सिंह ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह रवैया मौजूदा और भविष्य के चुनावों से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि घोषणाओं में स्पष्टता है, लेकिन उन्हें लागू करने के तरीके के बारे में कोई सुनिश्चितता नहीं है। अगर सरकार की मंशा वास्तव में नेक होती, तो इसे तुरंत लागू करने की व्यवस्था करती।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है। हालांकि, समय और कार्यान्वयन में देरी से यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में सरकार की मंशा सही है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल एक कानून है जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है।
इस बिल का क्या महत्व है?
यह बिल महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि प्रदान करता है, जिससे उनके अधिकारों और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
कांग्रेस का इस बिल के प्रति क्या रुख है?
कांग्रेस ने महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है और इसे लागू करने में भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा पर क्या आरोप हैं?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा इस मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है, जबकि महिलाओं को असल में सशक्त नहीं बना रही है।
परिसीमन और आरक्षण का क्या संबंध है?
आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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