11 जुलाई 2026
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असम विधानसभा में UCC पर सरमा का बड़ा बयान: अल्पसंख्यक महिलाओं को मिलेगी समान कानूनी सुरक्षा

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असम विधानसभा में UCC पर सरमा का बड़ा बयान: अल्पसंख्यक महिलाओं को मिलेगी समान कानूनी सुरक्षा

सारांश

असम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने UCC को वोट बैंक की राजनीति से परे सामाजिक न्याय का कदम बताया। उनका तर्क है कि यह कानून उन अल्पसंख्यक महिलाओं की ढाल बनेगा जो निजी कानूनों के तहत अब तक असुरक्षित रही हैं — लेकिन विपक्ष धार्मिक स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अड़ा है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 मई 2026 को विधानसभा में UCC विधेयक का बचाव किया।
सरमा ने कहा कि UCC अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को विवाह, विरासत और सामाजिक सुरक्षा के मामलों में उच्चतम कानूनी सुरक्षा देगा।
BJP सरकार ने विधानसभा के पहले सत्र में ही UCC विधेयक पेश किया, जिसे सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता बताया गया।
विधेयक में स्वदेशी और आदिवासी समुदायों के हितों की सुरक्षा का भी प्रावधान होगा।
विपक्षी दलों ने विधेयक को धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक प्रथाओं में हस्तक्षेप बताते हुए विरोध जारी रखा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 मई 2026 को असम विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि यह कानून अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को विवाह, विरासत और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा और न्याय दिलाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है।

मुख्यमंत्री का मुख्य तर्क

सदन में हुई बहस में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि BJP सरकार ने विधानसभा के पहले ही सत्र में UCC विधेयक पेश किया, जो सामाजिक न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'हम यहाँ सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं आए हैं। अपने समर्थकों या राजनीतिक हितों के लिए कुछ भी करने से पहले, हम सामाजिक न्याय के लिए समान नागरिक संहिता विधेयक लाए हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को 'उच्चतम स्तर की सुरक्षा' प्रदान करेगा और विवाह, विरासत तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित मामलों में उनके अधिकारों को मजबूत करेगा।

विपक्ष पर लगाए आरोप

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर UCC के उद्देश्य को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने विधानसभा में रायजोर दल के एक विधायक के साथ हुई पिछली बातचीत का भी उल्लेख किया और कहा, 'मैंने इस सदन में पहले भी स्पष्ट रूप से कहा था कि यह सरकार न्याय और समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुधारों को आगे बढ़ाएगी।'

उन्होंने तर्क दिया कि UCC किसी एक धर्म या समुदाय को लक्षित नहीं करता, बल्कि इसका उद्देश्य उन महिलाओं को समान अधिकार दिलाना है जो निजी कानूनों के तहत अब तक असुरक्षित रही हैं।

सरकार का रुख और विधेयक की विशेषताएँ

BJP सरकार का कहना है कि असम के प्रस्तावित UCC विधेयक में लैंगिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित प्रावधान होंगे। साथ ही, स्वदेशी और आदिवासी समुदायों के हितों की सुरक्षा का भी आश्वासन दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में UCC को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।

विपक्ष की आपत्तियाँ

विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध जारी रखते हुए आरोप लगाया कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक प्रथाओं में अनुचित हस्तक्षेप करता है। आलोचकों का कहना है कि विविध सामाजिक-धार्मिक संरचना वाले असम में एकसमान नागरिक कानून लागू करना जटिल और संवेदनशील है।

आगे की राह

गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने UCC लागू किया है। असम उसके नक्शेकदम पर चलने की तैयारी में है। विधेयक पर विधानसभा में बहस जारी है और इसके पारित होने की प्रक्रिया आने वाले सत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल व्यापक राष्ट्रीय UCC एजेंडे की राज्य-स्तरीय प्रतिध्वनि है। उत्तराखंड के UCC अनुभव से अब तक कोई ठोस क्रियान्वयन डेटा सामने नहीं आया है, जो असम के लिए एक चेतावनी संकेत है। स्वदेशी और आदिवासी समुदायों को छूट देने की बात तो कही गई है, लेकिन उसकी सीमाएँ अभी अस्पष्ट हैं — और यही अस्पष्टता विपक्ष को सबसे बड़ा हथियार दे रही है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम का प्रस्तावित UCC विधेयक क्या है?
असम सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक एक ऐसा कानून है जो विवाह, विरासत और सामाजिक सुरक्षा जैसे निजी मामलों में सभी नागरिकों के लिए एकसमान कानूनी ढाँचा स्थापित करेगा। इसका विशेष ध्यान उन महिलाओं पर है जो धार्मिक निजी कानूनों के तहत अब तक असमान व्यवहार का सामना करती रही हैं।
मुख्यमंत्री सरमा ने UCC को अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए ज़रूरी क्यों बताया?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का तर्क है कि मौजूदा निजी कानूनों के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाएँ अक्सर विवाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में कमज़ोर स्थिति में रहती हैं। उनके अनुसार UCC इन महिलाओं को संवैधानिक अधिकारों के आधार पर समान सुरक्षा देगा।
विपक्ष UCC विधेयक का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि UCC धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक प्रथाओं में अनुचित हस्तक्षेप करता है। उनका कहना है कि असम की विविध सामाजिक-धार्मिक संरचना को देखते हुए एकसमान कानून लागू करना व्यावहारिक रूप से जटिल और समुदायों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
क्या असम UCC में आदिवासी और स्वदेशी समुदायों को छूट मिलेगी?
BJP सरकार के अनुसार प्रस्तावित UCC विधेयक में स्वदेशी और आदिवासी समुदायों के हितों की सुरक्षा का प्रावधान किया जाएगा। हालाँकि, इस छूट की सटीक सीमाएँ और शर्तें अभी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई हैं।
असम UCC विधेयक अब तक किस चरण में है?
विधेयक विधानसभा में बहस के चरण में है। BJP सरकार ने इसे विधानसभा के पहले सत्र में ही पेश किया था। अभी तक यह पारित नहीं हुआ है और आने वाले सत्रों में इस पर आगे की प्रक्रिया होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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