10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पेश, CM हिमंता बोले — 'समय की आवश्यकता है यह कानून'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पेश, CM हिमंता बोले — 'समय की आवश्यकता है यह कानून'

सारांश

असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक-2026 पेश होते ही राजनीतिक बहस तेज हो गई। CM हिमंता का दांव असम को उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बना सकता है — आदिवासी छूट के साथ, जो विधेयक की स्वीकार्यता की असली कसौटी होगी।

मुख्य बातें

असम समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 सोमवार, 25 मई 2026 को विधानसभा में पेश किया गया।
संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने CM हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से विधेयक सदन में रखा।
विधेयक विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और बहुविवाह जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत करने का प्रस्ताव करता है।
राज्य के पहाड़ी और मैदानी आदिवासी समुदायों को विधेयक के प्रावधानों से छूट दी जाएगी।
विधानसभा का सत्र 27 मई तक बढ़ाया गया; विधेयक पर चर्चा मंगलवार को प्रस्तावित।
असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी पेश करने वाला तीसरा राज्य बनने की ओर।

असम विधानसभा में सोमवार, 25 मई 2026 को असम समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 औपचारिक रूप से पेश किया गया। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से यह विधेयक सदन के पटल पर रखा। विपक्षी विधायकों ने तत्काल विरोध जताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से विधेयक पेश न करने का अनुरोध किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।

मुख्यमंत्री और मंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, 'असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता 2026 विधेयक पेश होने से इस बात पर खुलकर चर्चा का मार्ग प्रशस्त हुआ है कि यूसीसी असम की समय की आवश्यकता क्यों है और यह हमारे संस्थापकों द्वारा निर्धारित मार्ग को साकार करने में कैसे मदद करेगा।' मंत्री अतुल बोरा ने भी एक्स पर पोस्ट किया, 'मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से मैंने आज विधानसभा में असम समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 प्रस्तुत किया।'

विधेयक में क्या है

सरकार के अनुसार, यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए — चाहे उनका कोई भी धर्म हो — विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों का एकीकृत समूह लागू करना है। प्रस्तावित कानून विवाह की कानूनी उम्र, बहुविवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को भी संबोधित करता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य के पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों को इस कानून के प्रावधानों से छूट दी जाएगी।

विधानसभा सत्र और आगे की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, असम विधानसभा का कार्यकाल एक दिन बढ़ाकर 27 मई 2026 तक कर दिया गया है। विधेयक पर विस्तृत चर्चा मंगलवार को होने की संभावना है। गौरतलब है कि असम मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह ही यूसीसी के मसौदे को मंजूरी दी थी, और यह निर्णय नव निर्वाचित असम विधानसभा के पहले सत्र से ठीक पहले आया है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं और धार्मिक समूहों को अपने मामलों के प्रबंधन की अनुमति देते हैं। दूसरी ओर, अनुच्छेद 44 राज्य से अपेक्षा करता है कि वह सभी नागरिकों पर समान नागरिक संहिता लागू करे — यह एक निदेशक सिद्धांत है, बाध्यकारी अधिकार नहीं। यही संवैधानिक तनाव यूसीसी की बहस का केंद्र रहा है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी विधेयक पेश और पारित करने वाला तीसरा राज्य बनने की राह पर है। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने यूसीसी को विधायी रूप दिया। असम में इस कदम को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के व्यापक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यक्तिगत कानूनों में अनावश्यक हस्तक्षेप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की उस रणनीति की अगली कड़ी है जो उत्तराखंड से शुरू होकर राज्य-दर-राज्य यूसीसी को ज़मीन पर उतारना चाहती है। असली परीक्षा आदिवासी छूट के प्रावधानों की व्यापकता और स्पष्टता होगी — क्योंकि असम की जनसांख्यिकीय जटिलता उत्तराखंड से कहीं अधिक है। विपक्ष का विरोध अभी सांकेतिक है, लेकिन चर्चा के दौरान यदि छूट की परिभाषाएँ अस्पष्ट रहीं, तो यह विधेयक अदालतों में लंबी लड़ाई का मंच बन सकता है। केंद्र में यूसीसी अभी भी अधर में है — राज्यों की यह पहल दबाव की राजनीति भी है और एक प्रयोगशाला भी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम यूसीसी विधेयक 2026 क्या है?
असम समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 एक प्रस्तावित कानून है जो राज्य के सभी नागरिकों पर — धर्म की परवाह किए बिना — विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े एकीकृत व्यक्तिगत कानून लागू करेगा। यह विधेयक 25 मई 2026 को असम विधानसभा में पेश किया गया।
असम यूसीसी विधेयक में आदिवासी समुदायों को छूट क्यों दी गई है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि राज्य के पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों को इस कानून के प्रावधानों से छूट मिलेगी। यह छूट आदिवासी परंपरागत कानूनों और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए दी गई है।
असम यूसीसी विधेयक पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
विधेयक पर विस्तृत चर्चा मंगलवार, 26 मई 2026 को होने की संभावना है। असम विधानसभा का सत्र एक दिन बढ़ाकर 27 मई तक किया गया है, जिससे विधेयक को पारित करने का अवसर मिल सके।
यूसीसी लागू करने वाले राज्यों में असम का क्या स्थान है?
असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी विधेयक पेश करने वाला तीसरा राज्य बनने जा रहा है। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने इसे विधायी रूप से लागू किया।
विपक्ष ने असम यूसीसी विधेयक का विरोध क्यों किया?
विपक्षी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से विधेयक पेश न करने का अनुरोध किया। आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यक्तिगत कानूनों में अनावश्यक हस्तक्षेप करता है और संविधान के अनुच्छेद 25-28 द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से टकरा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले