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टोंक में तेंदुए का शराब दुकान पर हमला: तीन घायल, 5 घंटे बाद वन विभाग ने किया रेस्क्यू

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टोंक में तेंदुए का शराब दुकान पर हमला: तीन घायल, 5 घंटे बाद वन विभाग ने किया रेस्क्यू

सारांश

राजस्थान के टोंक में एक तेंदुआ शराब की दुकान में घुस गया, तीन लोगों को घायल किया और पाँच घंटे तक अंदर फंसा रहा। घायल विक्रेता की सूझबूझ ने शटर गिराकर बड़ा हादसा टाला। झालाना से बुलाई गई रेस्क्यू टीम ने एक ही डार्ट में पाँच साल के नर तेंदुए को काबू किया।

मुख्य बातें

20 जुलाई को टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में एक तेंदुआ शराब की दुकान में घुसा और तीन लोगों को घायल किया।
घायलों में वन मित्र राकेश , दुकान के बाहर बैठे फतेह लाल कोली (40) और विक्रेता संजय गुर्जर (25) शामिल हैं।
घायल अवस्था में संजय गुर्जर ने दुकान का शटर गिराकर तेंदुए को बाज़ार में फैलने से रोका।
जयपुर के झालाना से बुलाई गई विशेष टीम ने दोपहर 2 बजे एक ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट से तेंदुए को काबू किया।
बचाया गया जानवर पाँच साल का नर तेंदुआ है; चिकित्सा जाँच के बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में सोमवार, 20 जुलाई को उस समय अफरातफरी मच गई जब एक तेंदुआ बाज़ार की एक शराब की दुकान में घुस गया और तीन लोगों को घायल कर दिया। जानवर करीब पाँच घंटे तक दुकान के भीतर फंसा रहा, जिसके बाद वन विभाग के विशेष बचाव दल ने उसे सुरक्षित काबू में किया।

घटनाक्रम: कैसे शुरू हुई दहशत

अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए को सबसे पहले सोमवार सुबह करीब 8:45 बजे कस्बे के समीप झाड़ियों में देखा गया। स्थानीय वन मित्र राकेश को निवासियों की सूचना पर मौके पर पहुँचाया गया। जैसे ही वे झाड़ियों के करीब पहुँचे, तेंदुए ने अचानक उन पर झपट्टा मारा और वहाँ से करीब 400 मीटर दूर स्थित शराब की दुकान की ओर भाग निकला।

जानवर ने पहले दुकान के बाहर बैठे फतेह लाल कोली (40) पर हमला किया और फिर दुकान के भीतर घुसकर विक्रेता संजय गुर्जर (25) को अपना निशाना बनाया। तीनों घायलों की पहचान राकेश (वन मित्र), फतेह लाल कोली और संजय गुर्जर के रूप में हुई है।

संजय गुर्जर की सूझबूझ ने बड़ा हादसा टाला

घायल अवस्था में भी संजय गुर्जर ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने तेंदुए को धक्का देकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया और भागते हुए दुकान का शटर नीचे खींच दिया, जिससे जानवर अंदर ही बंद हो गया और भीड़भाड़ वाले बाज़ार में आगे नहीं बढ़ पाया। संजय ने बताया — 'मैंने किसी तरह तेंदुए को धक्का देकर भगाया और बाहर निकलने की तरफ भागा। भागते समय मैंने शटर नीचे खींच दिया। उसके बाद मैं बेहोश हो गया।' संजय के हाथ, कंधे और नाक पर तेंदुए के पंजों के गहरे घाव आए और उन्हें बाद में उपचार के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया।

पुलिस घेराबंदी और पाँच घंटे का रेस्क्यू अभियान

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके को घेर लिया और लोगों को घटनास्थल के पास जाने से रोका। खबर फैलते ही भारी भीड़ जमा हो गई। वन विभाग ने जयपुर के झालाना से एक विशेष बचाव दल बुलाया। दोपहर करीब 2 बजे बचाव दल ने एक ही ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट से तेंदुए को सफलतापूर्वक बेहोश कर सुरक्षित पकड़ लिया, जिससे पाँच घंटे का तनावपूर्ण अभियान समाप्त हुआ।

तेंदुए की पहचान और आगे की कार्रवाई

टोंक के सहायक वन संरक्षक (ACF) अनुराग महर्षि ने बताया कि बचाया गया जानवर पाँच साल का नर तेंदुआ है। उन्होंने कहा कि तेंदुए को उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने से पहले उसकी पूरी चिकित्सा जाँच की जाएगी। गौरतलब है कि राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं, विशेषकर उन कस्बों में जो वन क्षेत्रों की सीमा पर बसे हैं।

घायलों का हाल

राकेश को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि संजय गुर्जर और फतेह लाल कोली को आगे के इलाज के लिए रेफर किया गया। तीनों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि तेंदुआ आबादी वाले इलाके में कैसे पहुँचा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी सुरक्षात्मक साज़ोसामान के। असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन मानव-वन्यजीव बफर ज़ोन की समीक्षा करेगा, या अगली घटना का इंतज़ार करेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टोंक में तेंदुए का हमला कब और कहाँ हुआ?
यह घटना 20 जुलाई को सुबह करीब 8:45 बजे राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में हुई, जब एक तेंदुआ बाज़ार की शराब की दुकान में घुस गया। जानवर पाँच घंटे तक दुकान के अंदर फंसा रहा।
तेंदुए के हमले में कौन-कौन घायल हुए?
तीन लोग घायल हुए — वन मित्र राकेश, दुकान के बाहर बैठे फतेह लाल कोली (40) और दुकान विक्रेता संजय गुर्जर (25)। राकेश को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई, जबकि संजय और फतेह लाल को जयपुर रेफर किया गया।
तेंदुए को कैसे पकड़ा गया?
वन विभाग ने जयपुर के झालाना से एक विशेष बचाव दल बुलाया, जिसने दोपहर करीब 2 बजे एक ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट से तेंदुए को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ लिया। यह पाँच साल का नर तेंदुआ है।
संजय गुर्जर ने बड़ा हादसा कैसे टाला?
घायल होने के बावजूद विक्रेता संजय गुर्जर ने तेंदुए को धक्का देकर खुद बाहर निकले और तुरंत दुकान का शटर गिरा दिया, जिससे जानवर अंदर बंद हो गया और भीड़भाड़ वाले बाज़ार में नहीं फैल पाया। इसके बाद वे बेहोश हो गए।
पकड़े गए तेंदुए का आगे क्या होगा?
टोंक के सहायक वन संरक्षक अनुराग महर्षि के अनुसार, तेंदुए की पहले पूरी चिकित्सा जाँच की जाएगी और उसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ा जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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