पूर्णिया में तेंदुए का आतंक: तीन दिन बाद ग्रामीणों ने घेरकर मारा, 3 घायल, वन विभाग जांच में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के पूर्णिया जिले के टीकापट्टी थाना क्षेत्र स्थित चकला बहियार गांव में पिछले तीन दिनों से खौफ फैला रहे एक तेंदुए को ग्रामीणों ने बुधवार, 27 मई को मार डाला। तेंदुए पर मवेशियों और ग्रामीणों पर लगातार हमले करने का आरोप है, जिसमें कम से कम तीन ग्रामीण घायल हो गए थे। सभी घायलों का उपचार नज़दीकी रेफरल अस्पताल में कराया गया और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ कई दिनों से गांव और आसपास के खेतों में घूम रहा था। इस दौरान उसने दो बछड़ों और एक बकरी को मार डाला तथा कई ग्रामीणों पर हमला किया। बुधवार को एक बार फिर खेतों में तेंदुआ दिखने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और उसे चारों ओर से घेर लिया। लंबे संघर्ष के बाद ग्रामीणों ने उसे मार डाला।
प्रशासन को पहले दी गई थी सूचना
गांव की मुखिया शांति देवी ने बताया कि तेंदुए की गतिविधियों और हमलों की जानकारी पहले ही प्रशासन और वन विभाग को दी गई थी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग और प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए का शव अपने कब्जे में ले लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जो तीन पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किया जाएगा।
वन विभाग की जांच
वन विभाग के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है कि तेंदुआ आबादी वाले इलाके में कैसे पहुंचा। एक अधिकारी के अनुसार, भीषण गर्मी और उमस के कारण तेंदुआ पानी और भोजन की तलाश में मानव बस्ती की ओर आया होगा। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आसपास के क्षेत्रों में अन्य जंगली जानवरों की मौजूदगी तो नहीं है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से इलाके में जंगली जानवरों की आवाजाही देखी जा रही थी। तेंदुए के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत बढ़ती जा रही थी। यह घटना ऐसे समय में आई है जब बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसे विशेषज्ञ वन क्षेत्र के सिकुड़ने और गर्मी के मौसम में जानवरों के भोजन-पानी की तलाश से जोड़ते हैं।
क्या होगा आगे
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत तेंदुआ एक संरक्षित प्रजाति है, इसलिए वन विभाग की जांच में यह भी देखा जाएगा कि ग्रामीणों की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तेंदुए की उम्र, स्वास्थ्य और हमले की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। स्थानीय प्रशासन से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक उपाय करने की मांग भी उठ रही है।