15 जुलाई 2026
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क्या लखीमपुर खीरी में तीन बच्चों को शिकार बनाने वाली मादा तेंदुआ आखिरकार कैद हो गई?

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क्या लखीमपुर खीरी में तीन बच्चों को शिकार बनाने वाली मादा तेंदुआ आखिरकार कैद हो गई?

सारांश

लखीमपुर खीरी में एक मादा तेंदुआ ने तीन बच्चों का शिकार किया, जिससे पूरा क्षेत्र आतंकित हो गया। वन विभाग ने उसे पकड़ लिया और उसकी चिकित्सा जांच चल रही है। जानिए तेंदुए के अजीब व्यवहार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बारे में।

मुख्य बातें

लखीमपुर खीरी में मादा तेंदुआ ने तीन बच्चों को शिकार बनाया।
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ लिया है।
तेंदुए का व्यवहार असामान्य और आक्रामक था।
घायल तेंदुआ छोटे बच्चों को आसान शिकार मान रहा था।
मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।

लखीमपुर खीरी, २६ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के दक्षिण खीरी वन प्रभाग में पिछले तीन महीनों में तीन बच्चों का शिकार करने वाली मादा तेंदुआ को वन विभाग ने रविवार को पकड़ लिया। यह तेंदुआ सरदार नगर रेंज के आस-पास के गांवों में घूम रही थी, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ था।

वन अधिकारियों के अनुसार, इस तेंदुए का पहला हमला २६ जुलाई को ज्ञानपुर गांव में हुआ, जब बादल कुमार नाम का एक छह साल का लड़का खेत में अपने पिता के पास सोया हुआ था। इस घटना में बच्चे की मौत हो गई। उसके पिता सुनील कुमार रात में बच्चे को फसलों की रखवाली के लिए साथ ले गए थे।

दूसरा हमला २७ सितंबर को राजा रामपुरवा गांव में हुआ, जहां तेंदुए ने राधा नाम की नौ साल की बच्ची पर जानलेवा हमला किया। तीसरी घटना ७ अक्टूबर को खंभरखेड़ा गांव में हुई, जहां अनाया नाम की सात साल की बच्ची को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया।

वन अधिकारी पहले हमले के बाद से ही तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से कई जगहों पर कैमरा ट्रैप और पिंजरे लगाए गए। रविवार को मादा तेंदुआ आखिरकार सरदार नगर रेंज में एक पिंजरे में फंस गई।

दक्षिण खीरी के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) संजय बिस्वाल ने कहा कि तेंदुए का व्यवहार 'असामान्य रूप से आक्रामक' था। पशु चिकित्सा जांच में पाया गया कि उसके एक पैर और पंजे में चोट थी। इस चोट के कारण उसे जंगली शिकार करने में कठिनाई हो रही थी और वह छोटे बच्चों को आसान शिकार बनाने लगी थी।

तेंदुए को आगे की चिकित्सा निगरानी और व्यवहार अध्ययन के लिए भेजा जाएगा ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उसका पुनर्वास किया जा सकता है या उसे कैद में ही रहना होगा।

दक्षिण खीरी प्रभाग दुधवा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा है। यहां हाल के वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। वन अधिकारी इसके लिए घटते वन क्षेत्र, जंगल के किनारों पर गन्ने की खेती और तेंदुओं के क्षेत्रों के साथ मानव गतिविधियों के अतिक्रमण को जिम्मेदार मानते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखीमपुर खीरी में तेंदुए का शिकार करने का मामला कब शुरू हुआ?
तेंदुए का पहला शिकार 26 जुलाई को ज्ञानपुर गांव में हुआ था।
क्या तेंदुए को सुरक्षित किया गया?
हाँ, वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ लिया है और उसकी चिकित्सा जांच चल रही है।
तेंदुए का व्यवहार क्यों असामान्य था?
तेंदुआ घायल था, जिससे उसे शिकार करने में कठिनाई हो रही थी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण क्या हैं?
घटते वन क्षेत्र, गन्ने की खेती और बढ़ती मानव गतिविधियाँ इसके मुख्य कारण हैं।
तेंदुए का भविष्य क्या होगा?
तेंदुए को पुनर्वास करने या कैद में रखने का निर्णय चिकित्सा जांच के बाद लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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