8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान: नीमकाथाना में बीमार मादा लेपर्ड का 22 घंटे में सफल रेस्क्यू

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान: नीमकाथाना में बीमार मादा लेपर्ड का 22 घंटे में सफल रेस्क्यू

सारांश

राजस्थान के नीमकाथाना में एक बीमार मादा लेपर्ड की रेस्क्यू टीम द्वारा 22 घंटे की मेहनत के बाद सफल रेस्क्यू ने स्थानीय लोगों को राहत दी है। जानें इस अद्भुत रेस्क्यू की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

लेपर्ड का सफल रेस्क्यू स्थानीय लोगों में राहत का कारण बना।
रेस्क्यू में 22 घंटे लगे, जिसमें वन विभाग की तत्परता शामिल थी।
लेपर्ड का इलाज जयपुर के बायोलॉजिकल पार्क में किया जाएगा।
बीमार लेपर्ड में न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण थे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

सीकर, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र में एक बीमार मादा लेपर्ड ने गांव वालों में दहशत का माहौल बना दिया था।

शुक्रवार को दोपहर लगभग तीन बजे, महावा गांव की दुर्गा वाली ढाणी में पुरणमल शर्मा के घर के पीछे यह लेपर्ड घुस आया। ग्रामीणों ने तत्क्षण वन विभाग को सूचित किया, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची। लेकिन लेपर्ड कांटेदार झाड़ियों में छिप गया, जिससे रेस्क्यू में कठिनाई उत्पन्न हुई। शाम के समय ऑपरेशन पूरा नहीं हो सका।

शनिवार सुबह से ही स्थानीय लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। लेपर्ड खेतों की फसलों में घुसकर दहाड़ते हुए इधर-उधर घूमने लगा। कई बार वह लड़खड़ाते हुए भी नजर आया, फिर से कांटेदार झाड़ियों में छिप गया। जयपुर से आई चिड़ियाघर की रेस्क्यू टीम के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू की तैयारी की।

जब टीम ने लेपर्ड को पकड़ने का प्रयास किया, तो वह अचानक वनकर्मियों पर हमला करने की कोशिश करने लगा। वनकर्मी जान बचाकर भाग खड़े हुए। पहले बिना बेहोश किए रेस्क्यू करने का प्रयास किया गया, लेकिन लेपर्ड लगातार आक्रामक बना रहा। डॉ. अशोक कुमार ने हल्की डोज से ट्रेंक्यूलाइज किया, जिससे उसे काबू में किया जा सका। कुल 22 घंटे की मेहनत के बाद लेपर्ड को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया।

डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह लगभग ढाई साल की मादा लेपर्ड है, जिसमें न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण देखे गए हैं, जिसके कारण वह बीमार और असंतुलित दिख रही थी। इसी कारण वह आक्रामक व्यवहार कर रही थी और चलने में भी दिक्कत महसूस कर रही थी। लेपर्ड को उपचार के लिए जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। वहां उसका समुचित उपचार किया जाएगा और स्वस्थ होने के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

इस सफल रेस्क्यू से स्थानीय लोगों में राहत की लहर है। वन विभाग की टीम ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई की, जिसके लिए उनकी सराहना की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ाता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेपर्ड को क्यों रेस्क्यू किया गया?
लेपर्ड बीमार और आक्रामक व्यवहार कर रहा था, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल था।
लेपर्ड का इलाज कहाँ किया जाएगा?
लेपर्ड का इलाज जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर में किया जाएगा।
रेस्क्यू टीम ने कैसे काम किया?
रेस्क्यू टीम ने पिंजरा लगाकर और हल्की डोज का उपयोग करके लेपर्ड को काबू में किया।
लेपर्ड की उम्र क्या है?
लेपर्ड की उम्र लगभग ढाई साल है।
क्या यह रेस्क्यू स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण था?
हाँ, यह रेस्क्यू स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा और राहत का प्रतीक बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले