जयशंकर-सैदोव वार्ता: भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार दोगुना करने और निवेश बढ़ाने पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 20 जुलाई को उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर सहमति बनी। दोनों देशों के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब भारत और उज्बेकिस्तान अगले तीन वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य पर पहले ही सहमत हो चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सोमवार को उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से अच्छी बातचीत हुई। हमने व्यापार, निवेश और दूसरे कई क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग को और बढ़ाने पर बात की।' उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव ने भी पुष्टि की कि दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति बनी।
व्यापार और निवेश का एजेंडा
गौरतलब है कि पिछले महीने भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग के 14वें सत्र में दोनों देशों ने व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करने, नॉन-टैरिफ बाधाओं को घटाने और अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य पर सहमति जताई थी। वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल और उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के उप मंत्री शोखरुख गुलामोव ने इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता की। बैठक ताशकंद में आयोजित हुई, जिसमें भारतीय पक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया।
निर्यात के संभावित क्षेत्र
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बयान के अनुसार, उस बैठक में भारत से उज्बेकिस्तान को निर्यात बढ़ाए जाने वाले उत्पादों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें दवाइयाँ, मेडिकल उपकरण, कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, कृषि मशीनें, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, ट्रैक्टर के पुर्जे, कपड़ा और कपड़ा मशीनें, रसायन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाएँ भी शामिल हैं।
रणनीतिक साझेदारी की दिशा
सैदोव ने बताया कि दोनों पक्षों ने आने वाले समय में शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों के कार्यक्रम पर भी विचार किया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सहयोग को और सुदृढ़ करने के तरीके भी तलाशे गए। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने परस्पर विश्वास और नियमित संवाद को आगे बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई।
आगे की राह
यह बातचीत भारत की मध्य एशिया नीति के व्यापक ढाँचे में महत्वपूर्ण कड़ी है। उज्बेकिस्तान भारत के लिए मध्य एशिया में एक प्रमुख व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है, और आने वाले महीनों में उच्च-स्तरीय बैठकों की संभावना से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई मिलने की उम्मीद है।