जयशंकर-सैदोव वार्ता: उज्बेकिस्तान को बताया 'विस्तारित पड़ोस', ₹1 बिलियन डॉलर व्यापार बढ़ाने पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा हुई। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का अभिन्न हिस्सा मानता है और दोनों देशों के बीच मौजूदा 1 बिलियन डॉलर के व्यापार को और आगे ले जाने की दृढ़ इच्छाशक्ति जताई।
बैठक की पृष्ठभूमि
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य एशिया के साथ भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक कूटनीति को नई गति देने की कोशिशें तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के मंच का उपयोग करते हुए मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को व्यवस्थित रूप दिया है।
जयशंकर के मुख्य वक्तव्य
बैठक में अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने कहा, 'मंत्री बख्तियार सैदोव और दोनों प्रतिनिधिमंडलों का भारत में स्वागत करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि आज की हमारी मीटिंग निश्चित रूप से हमारे संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत पुराना है, और लोगों, विचारों तथा वस्तुओं का आदान-प्रदान निरंतर जारी रहा है।
व्यापार और सहयोग के क्षेत्र
जयशंकर ने बताया कि द्विपक्षीय संबंध अब निर्माण, डिजिटल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में फैले हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस सहयोग को खनन (माइनिंग) क्षेत्र तक भी विस्तारित करना चाहते हैं। मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 बिलियन डॉलर है और दोनों पक्षों का मानना है कि यह आँकड़ा बढ़ना चाहिए। साथ ही, दोनों देशों के संसदीय संपर्कों को संस्थागत रूप देने के लिए भारत-उज्बेकिस्तान पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का गठन किया गया है।
आतंकवाद और विदेश नीति पर साझा रुख
विदेश नीति के मोर्चे पर जयशंकर ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद, उग्रवाद और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे मुद्दों पर एकसमान दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता की इस बात के लिए सराहना की कि उसने 'आतंकवाद के हर रूप से लड़ने के लिए मजबूत स्टैंड' लिया है। दोनों देश शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
ब्रिक्स और NAM पर भारत का समर्थन
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स का अध्यक्ष है और उन्होंने ब्रिक्स की गतिविधियों में उज्बेकिस्तान के साझेदार देश के रूप में दिए गए समर्थन की सराहना की। उन्होंने 2027-2029 की अवधि के लिए नॉन-अलाइनमेंट मूवमेंट (NAM) की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान को भारत का समर्थन देने की घोषणा भी की। यह कदम भारत की 'पड़ोस पहले' नीति को मध्य एशिया तक विस्तारित करने की रणनीतिक मंशा को दर्शाता है।