4 अगस्त 2026
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जयशंकर-सैदोव वार्ता: उज्बेकिस्तान को बताया 'विस्तारित पड़ोस', ₹1 बिलियन डॉलर व्यापार बढ़ाने पर सहमति

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जयशंकर-सैदोव वार्ता: उज्बेकिस्तान को बताया 'विस्तारित पड़ोस', ₹1 बिलियन डॉलर व्यापार बढ़ाने पर सहमति

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को महज़ मध्य एशियाई देश नहीं, बल्कि भारत के 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा घोषित किया — यह सांकेतिक भाषा नहीं, रणनीतिक पुनर्परिभाषा है। 1 बिलियन डॉलर के व्यापार को बढ़ाने की प्रतिबद्धता और NAM अध्यक्षता के समर्थन के साथ भारत मध्य एशिया में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच ने 4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत ने उज्बेकिस्तान को 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा बताया; मौजूदा 1 बिलियन डॉलर व्यापार को और बढ़ाने पर जोर।
सहयोग के नए क्षेत्रों में खनन (माइनिंग) को जोड़ने की योजना; निर्माण, डिजिटल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा में पहले से सहयोग जारी।
भारत-उज्बेकिस्तान पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का गठन किया गया।
भारत ने 2027-2029 के लिए NAM की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान का समर्थन किया।
दोनों देशों ने आतंकवाद और ड्रग तस्करी पर जीरो टॉलरेंस की साझा नीति की पुष्टि की।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा हुई। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का अभिन्न हिस्सा मानता है और दोनों देशों के बीच मौजूदा 1 बिलियन डॉलर के व्यापार को और आगे ले जाने की दृढ़ इच्छाशक्ति जताई।

बैठक की पृष्ठभूमि

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य एशिया के साथ भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक कूटनीति को नई गति देने की कोशिशें तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के मंच का उपयोग करते हुए मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को व्यवस्थित रूप दिया है।

जयशंकर के मुख्य वक्तव्य

बैठक में अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने कहा, 'मंत्री बख्तियार सैदोव और दोनों प्रतिनिधिमंडलों का भारत में स्वागत करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि आज की हमारी मीटिंग निश्चित रूप से हमारे संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत पुराना है, और लोगों, विचारों तथा वस्तुओं का आदान-प्रदान निरंतर जारी रहा है।

व्यापार और सहयोग के क्षेत्र

जयशंकर ने बताया कि द्विपक्षीय संबंध अब निर्माण, डिजिटल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में फैले हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस सहयोग को खनन (माइनिंग) क्षेत्र तक भी विस्तारित करना चाहते हैं। मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 बिलियन डॉलर है और दोनों पक्षों का मानना है कि यह आँकड़ा बढ़ना चाहिए। साथ ही, दोनों देशों के संसदीय संपर्कों को संस्थागत रूप देने के लिए भारत-उज्बेकिस्तान पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का गठन किया गया है।

आतंकवाद और विदेश नीति पर साझा रुख

विदेश नीति के मोर्चे पर जयशंकर ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद, उग्रवाद और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे मुद्दों पर एकसमान दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता की इस बात के लिए सराहना की कि उसने 'आतंकवाद के हर रूप से लड़ने के लिए मजबूत स्टैंड' लिया है। दोनों देश शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं।

ब्रिक्स और NAM पर भारत का समर्थन

जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स का अध्यक्ष है और उन्होंने ब्रिक्स की गतिविधियों में उज्बेकिस्तान के साझेदार देश के रूप में दिए गए समर्थन की सराहना की। उन्होंने 2027-2029 की अवधि के लिए नॉन-अलाइनमेंट मूवमेंट (NAM) की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान को भारत का समर्थन देने की घोषणा भी की। यह कदम भारत की 'पड़ोस पहले' नीति को मध्य एशिया तक विस्तारित करने की रणनीतिक मंशा को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो SCO की सदस्यता के बाद और तेज हुई है। लेकिन 1 बिलियन डॉलर का व्यापार आँकड़ा — जो वर्षों से इसी स्तर पर बना हुआ है — यह सवाल उठाता है कि क्या यह साझेदारी बयानों से आगे ज़मीन पर उतर पाई है। माइनिंग सहयोग की बात नई है, लेकिन इसके लिए अफगानिस्तान से होकर गुज़रने वाले कनेक्टिविटी मार्गों की चुनौती अभी भी अनसुलझी है। NAM अध्यक्षता का समर्थन एक कम लागत वाला कूटनीतिक निवेश है — असली परीक्षा तब होगी जब व्यापार और निवेश के ठोस लक्ष्य तय होंगे।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच बैठक में क्या हुआ?
4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई। भारत ने उज्बेकिस्तान को 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा बताया और 1 बिलियन डॉलर के व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार कितना है और इसे कितना बढ़ाने की योजना है?
फिलहाल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 बिलियन डॉलर है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह आँकड़ा बढ़ना चाहिए, हालांकि कोई विशेष लक्ष्य संख्या इस बैठक में सार्वजनिक नहीं की गई।
भारत-उज्बेकिस्तान पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप क्या है?
यह दोनों देशों के संसदीय प्रतिनिधियों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने के लिए गठित एक संस्थागत मंच है। जयशंकर ने इसकी घोषणा इस बैठक में की और उम्मीद जताई कि यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।
भारत ने NAM अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान का समर्थन क्यों किया?
जयशंकर ने 2027-2029 की अवधि के लिए नॉन-अलाइनमेंट मूवमेंट (NAM) की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान को भारत का समर्थन देने की घोषणा की। यह कदम दोनों देशों के बीच विदेश नीति में साझा दृष्टिकोण और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को दर्शाता है।
आतंकवाद पर भारत और उज्बेकिस्तान का साझा रुख क्या है?
दोनों देशों ने क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद, उग्रवाद और नशीली दवाओं की तस्करी के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की पुष्टि की है। जयशंकर ने उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता की आतंकवाद के हर रूप से लड़ने के लिए मजबूत स्टैंड लेने की सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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