3 अगस्त 2026
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राष्ट्रपति मुर्मु से मिले उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव, भारत-उज्बेक रणनीतिक साझेदारी गहरी करने पर बनी सहमति

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राष्ट्रपति मुर्मु से मिले उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव, भारत-उज्बेक रणनीतिक साझेदारी गहरी करने पर बनी सहमति

सारांश

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का तीन दिवसीय भारत दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और प्रौद्योगिकी में साझेदारी को नई गति देने की कोशिश है। राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात और जयशंकर के साथ आगामी वार्ता भारत-मध्य एशिया कूटनीति के लिए एक अहम पड़ाव है।

मुख्य बातें

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने 3 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने और साझेदारी गहरी करने पर सहमति जताई।
सैदोव का आधिकारिक दौरा 3 से 5 अगस्त तक; विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर से भी वार्ता निर्धारित।
नई दिल्ली में बिज़नेस फोरम में आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग के अवसरों पर चर्चा होगी।
दोनों देशों ने मई 2026 में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वाँ दौर नई दिल्ली में आयोजित किया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 3 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने और आपसी साझेदारी को और मज़बूत बनाने पर सहमति जताई। यह मुलाकात सैदोव के 3 से 5 अगस्त तक के आधिकारिक भारत दौरे के पहले दिन हुई।

मुलाकात में क्या हुआ

राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जिनकी जड़ें प्राचीन व्यापार मार्गों तक फैली हुई हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि यह दौरा साझेदारी को नई ऊँचाई देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी एक्स पर पोस्ट कर सैदोव के नई दिल्ली पहुँचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

दौरे का पूरा कार्यक्रम

राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद उज्बेक विदेश मंत्री सैदोव, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भी वार्ता करेंगे। इसके अलावा वे नई दिल्ली में आयोजित एक बिज़नेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा।

गौरतलब है कि इस दौरे से पहले 20 जुलाई को विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और सैदोव के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की गई थी। उस वार्ता के बाद सैदोव ने कहा था कि दोनों पक्ष अपने विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसे पर आधारित संवाद जारी रखने पर सहमत हैं।

रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और उज्बेकिस्तान व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देना चाहते हैं। दोनों देशों ने इसी वर्ष मई में नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वाँ दौर आयोजित किया था, जिसमें अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य एशिया के साथ भारत की कूटनीतिक सक्रियता — विशेषकर SCO और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के संदर्भ में — तेज़ी से बढ़ रही है।

आगे की राह

सैदोव का यह दौरा 5 अगस्त तक जारी रहेगा। बिज़नेस फोरम और जयशंकर के साथ वार्ता के नतीजे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत उज्बेकिस्तान एक महत्वपूर्ण धुरी बनकर उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बार-बार होने वाली इन उच्च-स्तरीय बैठकों के बाद ठोस आर्थिक नतीजे कितने निकलते हैं। भारत-उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी नीचे है, और कनेक्टिविटी की चुनौतियाँ — ज़मीनी रास्ते की अनुपस्थिति सहित — बरकरार हैं। 17वें विदेश कार्यालय परामर्श के बाद यह दौरा गति का संकेत देता है, पर बिज़नेस फोरम से निकलने वाले ठोस समझौते ही बताएंगे कि यह कूटनीति कागज़ से ज़मीन पर उतरती है या नहीं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का भारत दौरा क्यों हो रहा है?
बख्तियार सैदोव भारत सरकार के निमंत्रण पर 3 से 5 अगस्त 2026 तक आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली में हैं। इस दौरे का मकसद व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी सहित कई क्षेत्रों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है।
राष्ट्रपति मुर्मु और सैदोव की बैठक में क्या हुआ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 3 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में सैदोव से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने पर सहमति जताई।
सैदोव के दौरे में और क्या कार्यक्रम हैं?
राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद सैदोव विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वे नई दिल्ली में एक बिज़नेस फोरम में भी भाग लेंगे जहाँ आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग के अवसरों पर चर्चा होगी।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हाल में और कौन-सी कूटनीतिक गतिविधियाँ हुई हैं?
दोनों देशों ने मई 2026 में नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वाँ दौर आयोजित किया था। इससे पहले 20 जुलाई को डॉ. जयशंकर और सैदोव के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने पर चर्चा की गई थी।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध किन क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं?
दोनों देश व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी में अपनी रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देना चाहते हैं। भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत उज्बेकिस्तान एक प्रमुख साझेदार देश के रूप में उभर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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