29 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

PM मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा: 11 साल बाद ताशकंद यात्रा, व्यापार-रक्षा समेत बहुआयामी एजेंडे पर होगी चर्चा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
PM मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा: 11 साल बाद ताशकंद यात्रा, व्यापार-रक्षा समेत बहुआयामी एजेंडे पर होगी चर्चा

सारांश

11 साल के अंतराल के बाद PM मोदी ताशकंद पहुँच रहे हैं — और एजेंडा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है। व्यापार में 300% और निवेश में 700% की वृद्धि की पृष्ठभूमि में, यह दौरा महत्वपूर्ण खनिजों, फिनटेक, अंतरिक्ष और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने का अवसर है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी शनिवार से दो दिवसीय राजकीय दौरे पर उज्बेकिस्तान जाएंगे — यह 11 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ताशकंद की द्विपक्षीय यात्रा है।
यह मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है; राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है।
2015 के बाद से द्विपक्षीय व्यापार में 300% और निवेश में 700% की वृद्धि दर्ज हुई है; मौजूदा व्यापार 1.3 बिलियन डॉलर है।
एजेंडे में महत्वपूर्ण खनिज, दुर्लभ मृदा, फिनटेक , AI , अंतरिक्ष , परमाणु ऊर्जा , रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग शामिल हैं।
उज्बेकिस्तान भारत के लिए चिकित्सा पर्यटन का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी उज्बेकिस्तान दौरे को भारत की उज्बेकिस्तान में राजदूत स्मिता पंत ने 'अत्यंत महत्वपूर्ण' करार दिया है। 28 अगस्त को ताशकंद में बोलते हुए राजदूत पंत ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव को और सुदृढ़ करेगा और भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा। यह 11 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा है।

दौरे का पृष्ठभूमि और महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली बार 2015 में उज्बेकिस्तान का दौरा किया था। राजदूत पंत के अनुसार, उस दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है — द्विपक्षीय व्यापार में 300 प्रतिशत और निवेश में 700 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी, जो उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है।

गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य एशिया में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है और कनेक्टिविटी तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।

बहुआयामी एजेंडा: व्यापार से लेकर अंतरिक्ष तक

राजदूत पंत ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार और निवेश, कनेक्टिविटी, महत्वपूर्ण खनिज, दुर्लभ मृदा, विकास सहयोग, सांस्कृतिक सहयोग, रक्षा और सुरक्षा, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय व भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श होगा।

व्यापार विस्तार की संभावनाएँ

वर्तमान में भारत-उज्बेकिस्तान द्विपक्षीय व्यापार 1.3 बिलियन डॉलर है। राजदूत पंत ने संकेत दिया कि भारत सर्जिकल उपकरण, चिकित्सा उपकरण और मशीनरी के निर्यात को बढ़ा सकता है, जबकि उज्बेकिस्तान से प्राकृतिक संसाधनों और मूल्यवर्धित उत्पादों के आयात की संभावनाएँ तलाशी जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उज्बेकिस्तान भारत के लिए चिकित्सा पर्यटन का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है और बड़ी संख्या में भारतीय छात्र यहाँ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।

कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंध

राजदूत ने डिजिटल कनेक्टिविटी को भी एजेंडे का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी से द्विपक्षीय व्यापार को और गति मिल सकती है। पंत ने 'दिलों की कनेक्टिविटी' का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग है और दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों पुराना रिश्ता है।

आगे क्या होगा

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय राजकीय दौरे पर ताशकंद पहुँचेंगे और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ शिखर वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा होगी और आगे की राह के लिए एजेंडा तय किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह दौरा महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा पर ठोस आपूर्ति समझौतों में तब्दील होता है — जो भारत की सेमीकंडक्टर और EV महत्वाकांक्षाओं के लिए रणनीतिक रूप से अनिवार्य हैं। मध्य एशिया में चीन की गहरी पैठ को देखते हुए, 11 साल की देरी की भरपाई के लिए घोषणाओं से आगे बढ़कर बाध्यकारी ढाँचे ज़रूरी हैं। 'दिलों की कनेक्टिविटी' की भावना सराहनीय है, लेकिन इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में ठोस प्रगति ही बताएगी कि यह दौरा सिर्फ एक गर्मजोशी भरी मुलाकात था या भारत की मध्य एशिया नीति का नया अध्याय।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा कब और क्यों हो रहा है?
PM मोदी शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय राजकीय दौरे पर उज्बेकिस्तान जा रहे हैं। यह राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रहा है और 2015 के बाद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा है — यानी 11 साल के अंतराल के बाद।
भारत-उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार कितना है?
वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.3 बिलियन डॉलर है। 2015 के बाद से व्यापार में 300% और निवेश में 700% की वृद्धि हुई है, और इस दौरे में इसे और बढ़ाने पर चर्चा होगी।
मोदी-मिर्जियोयेव शिखर वार्ता में किन विषयों पर चर्चा होगी?
एजेंडे में व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, दुर्लभ मृदा, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, सांस्कृतिक सहयोग और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं।
उज्बेकिस्तान भारत के लिए चिकित्सा पर्यटन में क्यों महत्वपूर्ण है?
उज्बेकिस्तान भारत के लिए चिकित्सा पर्यटन का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहाँ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और भारतीय पर्यटकों का आना-जाना भी बढ़ा है।
यह मोदी की उज्बेकिस्तान की कौन सी यात्रा है?
यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। इससे पहले वे 2015 में द्विपक्षीय दौरे पर गए थे और SCO शिखर सम्मेलनों के दौरान भी ताशकंद का दौरा कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. कल
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 साल पहले